पाकिस्तान : के प्रधानमंत्री शहबाज शरीफ एक बार फिर अपने फैसले को लेकर घरेलू राजनीतिक विवाद में घिर गए हैं। अमेरिकी राष्ट्रपति डोनाल्ड ट्रंप की पहल पर गठित Board Of Peace Pakistan में शामिल होने के लिए उन्होंने समझौते पर हस्ताक्षर कर दिए, जिसके बाद विपक्षी दलों ने उनकी जमकर आलोचना की है। विपक्ष का आरोप है कि शहबाज शरीफ ने बिना संसद में चर्चा और परामर्श के यह कदम उठाया, जो लोकतांत्रिक प्रक्रिया के खिलाफ है।

बताया जा रहा है कि 22 जनवरी को डोनाल्ड ट्रंप की अध्यक्षता में आयोजित कार्यक्रम में कई देशों के राष्ट्रपति और प्रधानमंत्री शामिल हुए थे। यह बोर्ड गाजा के पुनर्निर्माण के उद्देश्य से गठित किया गया है। इस दौरान जब शहबाज शरीफ के सामने करार की फाइल आई, तो उन्होंने मुस्कुराते हुए चुपचाप हस्ताक्षर कर दिए। ट्रंप के बगल में बैठे शहबाज के इस रवैये को लेकर पाकिस्तान में लोगों और राजनीतिक दलों में नाराजगी देखी जा रही है।

Board Of Peace Pakistan के मुद्दे पर पूर्व प्रधानमंत्री इमरान खान की पार्टी पीटीआई के अध्यक्ष बैरिस्टर गोहर अली खान ने सरकार पर गंभीर आरोप लगाए। उन्होंने कहा कि सरकार ने संसद को नजरअंदाज किया और विपक्ष से कोई चर्चा नहीं की। उन्होंने सवाल उठाया कि क्या पाकिस्तान हमास को हथियार छोड़ने के लिए कोई भूमिका निभाएगा।

पीटीआई के वरिष्ठ नेता असद कैसर ने भी इस फैसले को दुर्भाग्यपूर्ण बताया और कहा कि लोकतंत्र में ऐसे अहम निर्णय संसद में चर्चा के बाद ही लिए जाने चाहिए। वहीं, जमीयत उलेमा-ए-इस्लाम (जेयूआई-एफ) के प्रमुख मौलाना फजलुर रहमान ने भी नाराजगी जताते हुए कहा कि फिलिस्तीनियों की पीड़ा के लिए जिम्मेदार लोग इस बोर्ड का हिस्सा हैं, और गाजा पर बमबारी जारी रहते हुए इस तरह की पहल पर सवाल उठाए।

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