अम्बिकेश गुप्ता

कुसमी। जनपद पंचायत कुसमी अंतर्गत आने वाली ग्राम पंचायतों में विकास कार्यों की गुणवत्ता को लेकर गंभीर सवाल खड़े हो गए हैं। विभिन्न पंचायतों से लगातार ऐसी शिकायतें सामने आ रही हैं कि निर्माण कार्यों में स्वीकृत प्राक्कलन (स्टीमेट) के विपरीत काम कराकर भ्रष्टाचार को बढ़ावा दिया जा रहा है। कागजों में जहां उच्च गुणवत्ता के कार्य दर्शाए जा रहे हैं, वहीं जमीनी हकीकत इससे बिल्कुल उलट नजर आ रही है।

ग्रामीणों का आरोप है कि कई पंचायतों में निर्माण कार्यों के दौरान घटिया सामग्री का उपयोग किया जा रहा है और तकनीकी मानकों की खुलेआम अनदेखी हो रही है। इससे शासन की महत्वाकांक्षी योजनाओं का लाभ आम जनता तक सही तरीके से नहीं पहुंच पा रहा है। लोगों का कहना है कि जिम्मेदारों के बीच कमीशनखोरी का ऐसा तंत्र बन गया है, जिसमें गुणवत्ता पूरी तरह से पीछे छूट गई है। स्थानीय स्तर पर ठेकेदारों द्वारा भी यह स्वीकार किया जा रहा है कि बढ़ती कमीशन व्यवस्था के चलते गुणवत्ता और लागत के बीच संतुलन संभव नहीं रह गया है।

त्रिपुरी में पुलिया निर्माण पर गंभीर आरोप..

ग्राम पंचायत त्रिपुरी में निर्माणाधीन पुलिया को लेकर मामला और अधिक गंभीर हो गया है। त्रिपुरी से सरना टोली मार्ग पर नाले के ऊपर बन रही पुलिया में भारी अनियमितताओं का आरोप लगाते हुए ग्रामीणों ने जनपद पंचायत कुसमी के मुख्य कार्यपालन अधिकारी को आवेदन सौंपकर जांच की मांग की है।

आवेदन के अनुसार, पुलिया निर्माण में निर्धारित मापदंडों का पालन नहीं किया जा रहा है। निर्माण में उपयोग किए जा रहे सीमेंट, गिट्टी और बालू की मात्रा में कमी की जा रही है, जिससे संरचना की मजबूती पर सवाल उठ रहे हैं। साथ ही दीवार और स्लैब निर्माण में भी तकनीकी मानकों की अनदेखी की गई है। ग्रामीणों का कहना है कि जल्दबाजी में कार्य पूरा करने के चक्कर में गुणवत्ता से समझौता किया जा रहा है, जिससे भविष्य में पुलिया के क्षतिग्रस्त होने का खतरा बना हुआ है।

लरिमा में नाली निर्माण में ‘हाईटेक भ्रष्टाचार’..

ग्राम पंचायत लरिमा में भारी भरकम राशि से चल रहें नाली निर्माण को लेकर भी चौंकाने वाली वीडियो सामने आए हैं। यहां निर्माण कार्य की वीडियो सामने आने के बाद “हाईटेक भ्रष्टाचार” की चर्चा तेज हो गई है। वीडियो में स्पष्ट देखा जा सकता है कि किस प्रकार तकनीकी मानकों की अनदेखी करते हुए निर्माण कार्य किया जा रहा है।

कई ग्राम के ग्रामीणों का आरोप है कि पंचायतों को एजेंसी बनाकर ठेकेदारी प्रथा के जरिए काम कराया जा रहा है, जिसमें पारदर्शिता पूरी तरह नदारद है। जांच के नाम पर केवल कागजी खानापूर्ति किए जाने से निर्माणकर्ताओं के हौसले बुलंद हैं। इतना ही नहीं, कई मामलों में यह तक स्पष्ट नहीं किया जा रहा है कि निर्माण कार्य किस मद से स्वीकृत हुआ है।

पारदर्शिता पर भी सवाल, सूचना बोर्ड तक गायब..

निर्माण कार्यों में पारदर्शिता को लेकर भी गंभीर स्थिति बनी हुई है। अधिकांश स्थानों पर कार्य प्रारंभ होने से पहले सूचना बोर्ड तक नहीं लगाए जा रहे हैं, जिससे आम जनता को यह जानकारी नहीं मिल पाती कि कार्य किस योजना के तहत और कितनी लागत से किया जा रहा है।

वहीं, जब कार्य पूर्ण होने के बाद सीसी (कम्प्लीशन) की बात आती है, तो जनपद पंचायत कार्यालय में कई कार्यों की फोटो कंप्यूटर से डिज़ाइन की हुई बताई जाती हैं। यह पूरे सिस्टम की कार्यप्रणाली पर सवाल खड़ा करता है और संभावित गड़बड़ियों की ओर इशारा करता है।

कलेक्टर से हस्तक्षेप की मांग..

लगातार सामने आ रही इन शिकायतों के बीच अब मिडिया के माध्यम ग्रामीणों ने जिला प्रशासन विशेषकर कलेक्टर से इस पूरे मामले में हस्तक्षेप कर निष्पक्ष जांच कराने की मांग की है। लोगों का कहना है कि यदि समय रहते सख्त कार्रवाई नहीं की गई, तो सरकारी योजनाओं का उद्देश्य पूरी तरह विफल हो जाएगा और जनता का भरोसा तंत्र से उठ सकता है।

इन्होने कहा..

उक्त विषय पर जनपद पंचायत कुसमी के प्रभारी सीईओं डॉ अभिषेक पाण्डेय ने कहा ग्राम त्रिपुरी में पुलिया निर्माण की जांच के लिए टीम गठित की गई हैं. तथा ग्राम लरिमा में नाली निर्माण की भी जांच करा लेंगे।

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