अम्बिकेश गुप्ता

कुसमी। विकासखंड कुसमी में जिला शिक्षा एवं प्रशिक्षण संस्थान (डीआईटीई) के संचालन को लेकर उठे विवाद पर सबसे पहले "संचार टुडे सीजी एमपी" पर खबर प्रकाशित होने के बाद अब इसका स्पष्ट असर देखने को मिल रहा है। पहले जहां इस मुद्दे पर जनप्रतिनिधियों और संगठनों की चुप्पी थी, वहीं अब राजनीतिक हलचल तेज हो गई है और कुसमी में ही संस्थान के संचालन को लेकर आवाज बुलंद होने लगी है।

खबर सामने आने के बाद युवक कांग्रेस प्रदेश उपाध्यक्ष मुजस्सम नजर के नेतृत्व में कांग्रेस पदाधिकारियों ने सक्रियता दिखाते हुए गुरुवार को मुख्यमंत्री के नाम ज्ञापन सौंपा। साथ ही इसकी प्रतिलिपि शिक्षा मंत्री व बलरामपुर कलेक्टर को भेजी गई हैं। यह ज्ञापन अनुविभागीय अधिकारी (राजस्व) कुसमी के माध्यम से प्रेषित किया गया, जिसमें "डीआईटीई" का संचालन कुसमी के नवीन भवन में ही सुनिश्चित करने की मांग की गई है।

खबर के बाद बढ़ा दबाव, उठी स्थानांतरण पर रोक की मांग..

ज्ञापन में स्पष्ट रूप से उल्लेख किया गया है कि कुसमी में स्थापित "बीआईटीई" को शासन द्वारा उन्नत कर डीआईटीई बनाया गया है और इसके संचालन के लिए नया भवन भी तैयार किया गया है। इसके बावजूद संस्थान को कुसमी से हटाकर बलरामपुर ले जाने की चर्चाओं ने स्थानीय स्तर पर आक्रोश पैदा कर दिया है। खबर के प्रकाशन के बाद इस मुद्दे ने तूल पकड़ लिया और अब इस पर राजनीतिक दबाव भी बनना शुरू हो गया है। ज्ञापन के माध्यम से किसी भी प्रकार के हस्तक्षेप या स्थानांतरण की प्रक्रिया पर तत्काल रोक लगाने की मांग प्रमुखता से उठाई गई है।

कुसमी के विकास से जुड़ा मुद्दा बना जनआंदोलन का रूप..

स्थानीय लोगों और कांग्रेस पदाधिकारियों का भी कहना हैं की "डीआईटीई" का संचालन कुसमी में होने से यह क्षेत्र शिक्षा का केंद्र बन सकता है, जिससे न केवल छात्रों को लाभ मिलेगा बल्कि रोजगार और क्षेत्रीय विकास को भी गति मिलेगी। "संचार टुडे सीजी एमपी" पर खबर आने के बाद अब यह मुद्दा केवल प्रशासनिक निर्णय तक सीमित नहीं रहा, बल्कि जनभावनाओं से जुड़ गया है। कुसमी के कांग्रेस पदाधिकारियों सहित नागरिकों ने भी इस मामले में जल्द निर्णय लेने की मांग तेज कर दी है।

पहले चुप्पी, अब सक्रियता..

इस पूरे घटनाक्रम में सबसे अहम बात यह रही कि 'संचार टुडे सीजी एमपी" में खबर से पहले जहां जनप्रतिनिधियों और संगठनों की ओर से कोई ठोस पहल नजर नहीं आ रही थी, वहीं अब खबर के बाद राजनीतिक दलों ने सक्रियता दिखानी शुरू कर दी है। इसे “खबर का असर” माना जा रहा है, जिसने पूरे मामले को नया मोड़ दे दिया है।

शासन के फैसले पर टिकी निगाहें..

अब सभी की नजरें शासन के आगामी निर्णय पर टिकी हुई हैं। यदि दबाव के बीच शासन अपने पूर्व आदेश पर कायम रहता है, तो कुसमी को एक बड़ी शैक्षणिक सौगात मिल सकती है। वहीं, यदि स्थानांतरण की प्रक्रिया आगे बढ़ती है, तो यह विवाद और गहराने की संभावना से इंकार नहीं किया जा सकता। फिलहाल, कुसमी में डीआईटीई को लेकर चल रही बहस अब खुलकर सामने आ चुकी है शासन स्तर पर इकट्ठा विषय को गंभीरता से नहीं लिए जाने पर आने वाले दिनों में यह मुद्दा और भी गरमा सकता है।

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