

देश के केंद्रीय बैंक भारतीय रिजर्व बैंक ने नए वित्त वर्ष 2026-27 की पहली मौद्रिक नीति बैठक में बड़ा फैसला लिया है। इस बैठक में रेपो रेट को बिना किसी बदलाव के 5.25 प्रतिशत पर ही कायम रखा गया है। इस निर्णय से साफ संकेत मिलता है कि फिलहाल लोन की ब्याज दरों में कोई बढ़ोतरी नहीं होगी और आम लोगों की EMI भी स्थिर रहेगी।
RBI गवर्नर की अगुवाई में हुई अहम बैठक
इस अहम बैठक की अध्यक्षता RBI गवर्नर संजय मल्होत्रा ने 8 अप्रैल को की। मौद्रिक नीति समिति की इस बैठक में वैश्विक और घरेलू आर्थिक परिस्थितियों का आकलन करने के बाद यह तय किया गया कि अभी रेपो रेट में बदलाव करना उचित नहीं होगा। विशेषज्ञों का मानना है कि मिडिल ईस्ट में बढ़ते तनाव का असर भी इस फैसले पर पड़ा है।
रेपो रेट क्या है और इसका असर कैसे पड़ता है
रेपो रेट वह दर होती है, जिस पर RBI बैंकों को कर्ज देता है। इसी दर के आधार पर बैंक अपने ग्राहकों को लोन की ब्याज दर तय करते हैं।
- रेपो रेट घटने पर लोन सस्ते हो जाते हैं
- EMI कम हो जाती है
- रेपो रेट बढ़ने पर लोन महंगे हो जाते हैं
फिलहाल रेपो रेट में कोई बदलाव नहीं होने से होम लोन, पर्सनल लोन और वाहन लोन लेने वालों के लिए स्थिति जस की तस बनी रहेगी।
पहले हो चुकी है कटौती
इससे पहले दिसंबर 2025 में RBI ने रेपो रेट में 0.25 प्रतिशत की कटौती की थी। उस समय ग्राहकों को EMI में थोड़ी राहत मिली थी। अब नए फैसले के तहत उसी स्तर को बरकरार रखा गया है।
महंगाई को लेकर RBI की चिंता
RBI गवर्नर ने साफ संकेत दिया है कि कच्चे तेल की बढ़ती कीमतें देश में आयातित महंगाई को बढ़ा सकती हैं। इसी वजह से केंद्रीय बैंक सतर्क रुख अपनाए हुए है।
तिमाही के अनुसार ग्रोथ अनुमान
- पहली तिमाही: 6.8 प्रतिशत
- दूसरी तिमाही: 6.7 प्रतिशत
- तीसरी तिमाही: 7 प्रतिशत
- चौथी तिमाही: 7.2 प्रतिशत
महंगाई का नया अनुमान
मौजूदा वित्त वर्ष की पहली तिमाही के लिए महंगाई दर का अनुमान बढ़ाकर 4.4 प्रतिशत कर दिया गया है, जो पहले 4 प्रतिशत था। हालांकि दूसरी तिमाही में महंगाई में कुछ नरमी आने की उम्मीद जताई गई है।
आम लोगों के लिए क्या मायने
इस फैसले का सीधा असर आम लोगों की जेब पर पड़ता है। फिलहाल राहत की बात यह है कि लोन लेने वालों की EMI न तो बढ़ेगी और न ही घटेगी। यानी जो स्थिति अभी है, वही आगे भी बनी रहने वाली है।

































