

मध्य प्रदेश : की राजनीति में राज्यसभा की तीसरी सीट को लेकर सियासी तापमान लगातार बढ़ता जा रहा है। राजधानी भोपाल में इस सीट को लेकर कांग्रेस और बीजेपी दोनों खेमों में गतिविधियां तेज हो गई हैं। सोमवार को पीसीसी चीफ जीतू पटवारी और वरिष्ठ नेता दिग्विजय सिंह के बीच हुई अहम बैठक ने राजनीतिक चर्चाओं को और हवा दे दी है।
दिग्विजय सिंह के आवास पर बंद कमरे में रणनीति बैठक
पीसीसी चीफ जीतू पटवारी सोमवार को दिग्विजय सिंह के निवास पहुंचे, जहां दोनों नेताओं के बीच बंद कमरे में विस्तृत रणनीतिक चर्चा हुई। इस मुलाकात को राज्यसभा चुनाव की दिशा तय करने वाला अहम कदम माना जा रहा है।
बैठक के बाद जीतू पटवारी ने कहा कि पार्टी में वरिष्ठ नेताओं से लगातार मार्गदर्शन लिया जाता है। उन्होंने बताया कि राज्यसभा चुनाव के साथ-साथ संगठनात्मक मुद्दों और पार्टी रणनीति पर भी विचार-विमर्श हुआ है।
कांग्रेस का दावा, हमारी रणनीति मजबूत
जीतू पटवारी ने दावा किया कि पार्टी पूरी मजबूती के साथ मैदान में है और “हमारा उम्मीदवार ही राज्यसभा जाएगा”। उनके इस बयान से कांग्रेस के भीतर आत्मविश्वास तो झलकता है, लेकिन साथ ही अंदरूनी तैयारियों की गंभीरता भी साफ दिखाई देती है।
बीजेपी के फैसले से बदला राजनीतिक समीकरण
उधर भारतीय जनता पार्टी ने राज्यसभा की तीसरी सीट पर उम्मीदवार न उतारने का निर्णय लेकर राजनीतिक समीकरणों को पूरी तरह बदल दिया है। इस फैसले को कई राजनीतिक विश्लेषक वॉकओवर के तौर पर देख रहे हैं।
सूत्रों के अनुसार बीजेपी के पास आवश्यक संख्या बल से करीब सात विधायकों की कमी है, जिसके चलते पार्टी ने चुनावी मुकाबले से दूरी बनाने का रास्ता चुना है। साथ ही इसे तोड़फोड़ की राजनीति से दूरी बनाए रखने के संदेश के रूप में भी देखा जा रहा है।
कांग्रेस के भीतर बढ़ी लॉबिंग और हलचल
बीजेपी के इस कदम के बाद कांग्रेस खेमे में उत्साह तो है, लेकिन अंदरूनी स्तर पर हलचल भी तेज हो गई है। राज्यसभा उम्मीदवार को लेकर पार्टी में दावेदारों की सक्रियता बढ़ गई है और वरिष्ठ नेताओं के साथ लगातार संपर्क साधा जा रहा है।
राजनीतिक विशेषज्ञों की नजर में अहम मोड़
राजनीतिक जानकारों का मानना है कि यह स्थिति कांग्रेस के लिए एक अवसर भी है और चुनौती भी। सीट लगभग सुरक्षित मानी जा रही है, लेकिन उम्मीदवार के चयन को लेकर पार्टी के भीतर असंतोष और खींचतान की संभावना से इनकार नहीं किया जा सकता।
तीसरी सीट बनी राजनीतिक केंद्र बिंदु
कुल मिलाकर राज्यसभा की तीसरी सीट अब मध्य प्रदेश की राजनीति का बड़ा केंद्र बन गई है। बीजेपी के पीछे हटने और कांग्रेस के भीतर बढ़ती सक्रियता ने इसे एक तरह से ‘गेमचेंजर’ स्थिति में ला दिया है। आने वाले दिनों में यह देखना दिलचस्प होगा कि कांग्रेस किस चेहरे पर भरोसा जताती है और इसका असर पार्टी की आंतरिक राजनीति पर क्या पड़ता है।

































