रायपुर:  महिला एवं बाल विकास मंत्रालय, भारत सरकार द्वारा 9 से 23 अप्रैल 2026 तक देशभर में आठवें ‘पोषण पखवाड़ा-2026’ का आयोजन किया जा रहा है। इस वर्ष का विषय “जीवन के पहले छह वर्षों में मस्तिष्क के विकास को अधिकतम करना” रखा गया है, जो बच्चों के शुरुआती वर्षों में पोषण, देखभाल और शिक्षा के महत्व को रेखांकित करता है। इस राष्ट्रीय अभियान की शुरुआत 9 अप्रैल को नई दिल्ली स्थित विज्ञान भवन से केंद्रीय महिला एवं बाल विकास मंत्री अन्नपूर्णा देवी के नेतृत्व में की जाएगी, जिसमें राज्य मंत्री  सावित्री ठाकुर एवं सचिव अनिल मलिक की उपस्थिति रहेगी।

छत्तीसगढ़ में भी इस राष्ट्रीय अभियान के अनुरूप राज्य स्तरीय कार्यक्रमों की शुरुआत की जाएगी। महिला एवं बाल विकास विभाग द्वारा सभी जिलों के आंगनवाड़ी केंद्रों के माध्यम से व्यापक गतिविधियों का आयोजन किया जाएगा, जिसमें माताओं, बच्चों, परिवारों और समुदाय की सक्रिय भागीदारी सुनिश्चित की जाएगी।

प्रधानमंत्री  नरेन्द्र मोदी ने पोषण के महत्व को रेखांकित करते हुए कहा है कि “एक स्वस्थ बच्चा एक मजबूत राष्ट्र की नींव होता है।” उन्होंने ‘पोषण अभियान’ को जन आंदोलन बताते हुए प्रत्येक मां और बच्चे तक समुचित पोषण पहुंचाने का आह्वान किया है।

पोषण पखवाड़ा-2026 के तहत विशेष रूप से मातृ एवं शिशु पोषण, जन्म से 3 वर्ष तक के बच्चों में मस्तिष्क विकास हेतु प्रारंभिक प्रोत्साहन, 3 से 6 वर्ष तक के बच्चों के लिए खेल-आधारित शिक्षा, स्क्रीन टाइम में कमी और आंगनबाड़ी केंद्रों को सामुदायिक सहयोग से सशक्त बनाने पर फोकस किया जाएगा। वैज्ञानिक तथ्यों के अनुसार, बच्चे के मस्तिष्क का लगभग 85 प्रतिशत विकास छह वर्ष की आयु तक हो जाता है, जिससे इन वर्षों में पोषण और देखभाल की भूमिका अत्यंत महत्वपूर्ण हो जाती है।

राज्य में इस अवधि के दौरान ‘पोषण पंचायत’, जागरूकता अभियान, प्रारंभिक शिक्षण गतिविधियां, स्वास्थ्य एवं पोषण परामर्श सत्र और व्यवहार परिवर्तन से जुड़ी पहलें संचालित की जाएंगी। साथ ही, आंगनवाड़ी कार्यकर्ताओं की भूमिका को सशक्त करते हुए जमीनी स्तर पर सेवाओं की गुणवत्ता को और बेहतर बनाने पर जोर दिया जाएगा।

उल्लेखनीय है कि पोषण अभियान आज एक राष्ट्रव्यापी जन आंदोलन का रूप ले चुका है, जिसका उद्देश्य कुपोषण मुक्त भारत का निर्माण करना है। ‘पोषण पखवाड़ा’ इसी दिशा में जागरूकता, जनभागीदारी और सामुदायिक एकजुटता को बढ़ावा देने का एक सशक्त माध्यम है।

छत्तीसगढ़ में इस अभियान के माध्यम से यह संदेश दिया जाएगा कि पोषण, देखभाल, प्रारंभिक शिक्षा और समाज की भागीदारी मिलकर ही एक स्वस्थ, शिक्षित और सशक्त भविष्य की नींव रख सकते हैं।

Leave a reply

Please enter your name here
Please enter your comment!