नई दिल्ली:  केंद्रीय बजट 2026–27 जो कर्तव्य भवन से पेश किया गया पहला बजट है और वित्त मंत्री का लगातार नौवां बजट भी है, देश को तेज़ आर्थिक विकास के साथ वित्तीय अनुशासन की राह पर आगे बढ़ाने का स्पष्ट संकेत देता है। सरकार ने राजकोषीय घाटा 4.4% से घटाकर 4.3% कर दिया है, जबकि कर्ज-से-जीडीपी अनुपात 56.1% से घटकर 55.6% हो गया है। इससे 2031 तक 50% (±1%) के लक्ष्य की दिशा में मजबूती दिखाई देती है।

बजट में इंफ्रास्ट्रक्चर विकास को प्राथमिकता दी गई है। सार्वजनिक पूंजीगत व्यय में लगभग 12% की बढ़ोतरी कर इसे ₹12.2 लाख करोड़ किया गया है। इससे निजी निवेश को बढ़ावा मिलेगा, उत्पादकता बढ़ेगी और लॉजिस्टिक्स लागत में कमी आएगी।वित्तीय बाजारों को मजबूत बनाने के लिए कई अहम कदम उठाए गए हैं। डेरिवेटिव्स पर एसएसटी बढ़ाकर अत्यधिक सट्टेबाजी पर अंकुश लगाने का प्रयास किया गया है। वहीं, आरईआईटी के जरिए पीएसयू संपत्तियों का मुद्रीकरण, बॉन्ड इंडेक्स डेरिवेटिव्स की शुरुआत और कॉरपोरेट बॉन्ड्स के लिए बेहतर मार्केट-मेकिंग व्यवस्था की घोषणा की गई है।

गिफ्ट सिटी में कर छूट की अवधि 10 साल से बढ़ाकर 20 साल कर दी गई है, जिससे यह विदेशी निवेशकों के लिए और आकर्षक बनेगी। अर्बन फाइनेंस को मजबूत करने के लिए नगरपालिका बॉन्ड्स को फिर से बढ़ावा दिया गया है।

एनआरआई को भारतीय शेयर बाजार में सीधे पोर्टफोलियो निवेश की अनुमति देकर सरकार ने दीर्घकालिक विदेशी पूंजी को विकास से जोड़ने का प्रयास किया है।रणनीतिक और उभरते क्षेत्रों जैसे सेमीकंडक्टर, आर्टिफिशियल इंटेलिजेंस, एडवांस्ड मैन्युफैक्चरिंग, बायो-फार्मा, रेयर अर्थ्स, पर्यटन और टेक्सटाइल पर विशेष ज़ोर दिया गया है।

कुल मिलाकर, बजट 2026–27 में अनुशासन, विकास, बाजार सुधार और भविष्य की अर्थव्यवस्था के लिए संतुलित रोडमैप पेश किया गया है, जो “विकसित भारत 2047” के लक्ष्य की दिशा में मजबूत आधार तैयार करता है।

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