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अम्बिकेश गुप्ता

कुसमी। बलरामपुर - रामानुजगंज जिले में विकास के बड़े-बड़े दावों के बीच जिले के कुसमी विकासखंड अंतर्गत साबाग ग्राम पंचायत का सहायक ग्राम झालबासा आज भी बुनियादी सुविधाओं के अभाव में जूझ रहा है। लगभग 200 से 250 की आबादी वाले इस गांव में अधिकांश लोग आदिवासी बृजिया समाज से हैं, जो वर्षों से उपेक्षा का दंश झेलते आ रहे हैं। 175 मतदाताओं वाले इस गांव की स्थिति यह है कि यहां आज भी स्वच्छ पेयजल जैसी मूलभूत सुविधा उपलब्ध नहीं हो सकी है।

उल्लेखनीय हैं की उक्त गांव में एक भी हैंडपंप नहीं होने के कारण ग्रामीणों को नदी-नालों के भरोसे रहना पड़ता है। हालात इतने खराब हैं कि लोग कपड़े से छानकर गंदा पानी पीने को मजबूर हैं। गर्मी और बरसात के दिनों में यही पानी और अधिक दूषित हो जाता है, जिससे संक्रामक बीमारियों का खतरा लगातार बना रहता है। यहां के ग्रामीणों ने बताया कि वे नदी में “चुआं” बनाकर पानी निकालते हैं और उसी से पीने व खाना बनाने का काम करते हैं। यह स्थिति न केवल चिंताजनक है, बल्कि आदिवासी क्षेत्रों में विकास की वास्तविकता को भी उजागर करती है।

इस गांव के ग्रामीणों की उम्मीदें तब जगी थीं जब दो वर्ष पहले गांव में जल जीवन मिशन के तहत कार्य शुरू हुआ था। लेकिन यह योजना अधूरी ही छोड़ दी गई। पाइपलाइन और अन्य निर्माण कार्य पूर्ण नहीं होने से आज तक गांव को इसका लाभ नहीं मिल सका। इससे ग्रामीणों में गहरी निराशा है और शासन-प्रशासन की कार्यशैली पर सवाल खड़े हो रहे हैं।

शिक्षा और स्वास्थ्य सुविधाओं का भी अभाव

झालबासा गांव में शिक्षा व्यवस्था भी बेहद कमजोर है। छोटे-छोटे बच्चों को कई किलोमीटर पैदल चलकर स्कूल जाना पड़ता है। वहीं प्राथमिक स्वास्थ्य सुविधा का भी यहां पूर्णतः अभाव है। ग्रामीणों का कहना है कि बच्चों के आधार कार्ड तक बनाने के लिए कोई शिविर नहीं लगाया गया जिससे उन्हें अन्य सरकारी योजनाओं का लाभ लेने में भी कठिनाई हो रही है।

अधिकारियों की अनदेखी, शिकायतें बेअसर..

ग्रामीणों का आरोप है कि उन्होंने कई बार अपनी समस्याएं संबंधित अधिकारियों तक पहुंचाई, लेकिन कोई ठोस कार्रवाई नहीं हुई। एक बार अधिकारी गांव पहुंचे जरूर, लेकिन उसके बाद दोबारा किसी ने हाल-चाल तक नहीं लिया। इससे ग्रामीणों में आक्रोश और निराशा दोनों देखने को मिल रही है।

बरसात में हालात और भी भयावह,आखिर विकास की किरण कब पहुंचेगी ?

पहाड़ी क्षेत्र होने के कारण बरसात के दिनों में स्थिति और खराब हो जाती है। कई बार बाढ़ जैसी स्थिति बन जाती है, जिससे नदी का पानी और अधिक गंदा हो जाता है। ऐसे में ग्रामीण उसी पानी के साफ होने का इंतजार करते हैं और फिर छानकर पीते हैं। यह स्थिति उनके स्वास्थ्य के लिए गंभीर खतरा बनी हुई है। झालबासा गांव के हालात यह सवाल खड़ा करते हैं कि आखिर कब तक आदिवासी बृजिया समाज के लोग बुनियादी सुविधाओं से वंचित रहेंगे ? न पानी, न शिक्षा, न स्वास्थ्य—ऐसे में विकास के दावों की सच्चाई खुद-ब-खुद सामने आ जाती है।

ग्रामीणों की मांग..

गांव के ग्रामीणों ने मिडिया के माध्यम शासन-प्रशासन से मांग की है कि जल्द से जल्द गांव में स्वच्छ पेयजल की व्यवस्था की जाए, अधूरी जल जीवन मिशन योजना को पूर्ण किया जाए, साथ ही शिक्षा और स्वास्थ्य सुविधाएं उपलब्ध कराई जाएं, ताकि उन्हें भी सम्मानजनक जीवन मिल सके।

जनपद पंचायत कुसमी सीईओ डॉ अभिषेक पांडे ने कहा कि समस्या उनके संज्ञान में है और जल्द ही बोरिंग कर पानी की व्यवस्था की जाएगी। साथ ही गांव तक पहुंच के लिए सड़क निर्माण कार्य भी जारी है।

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