

रायपुर : से आई ताजा तस्वीर राज्य की शिक्षा व्यवस्था पर गंभीर सवाल खड़े करती है। केंद्रीय गृह मंत्री अमित शाह द्वारा छत्तीसगढ़ को नक्सल मुक्त घोषित किए जाने के बाद जहां विकास की उम्मीदें बढ़ी हैं, वहीं स्कूलों की हालत अब भी बेहद खराब बनी हुई है। खासकर बस्तर संभाग में शिक्षा व्यवस्था चरमराई हुई नजर आ रही है।
खंडहर स्कूल और अधूरी पढ़ाई
नक्सल हिंसा के दौर में कई स्कूल भवन पूरी तरह तबाह हो गए थे। बच्चों को सुरक्षा बलों के कैंप में पढ़ाई करने को मजबूर होना पड़ा। पिछले कुछ सालों में हालात सुधरने पर स्कूलों के पुनर्निर्माण की शुरुआत हुई, लेकिन अब सबसे बड़ी समस्या शिक्षकों की कमी बनकर सामने आई है।
बीजापुर सबसे ज्यादा प्रभावित
बस्तर संभाग में बीजापुर जिले की स्थिति सबसे गंभीर है। यहां 324 स्कूल केवल एक शिक्षक के भरोसे चल रहे हैं। यदि वह शिक्षक अनुपस्थित हो जाए तो स्कूल बंद हो जाता है। इसके अलावा 12 स्कूल ऐसे हैं जहां एक भी शिक्षक नहीं है।
अन्य जिलों की स्थिति भी चिंताजनक
सिर्फ बीजापुर ही नहीं, बल्कि अन्य जिले भी इस समस्या से जूझ रहे हैं।
- बस्तर में 297 स्कूल
- सुकमा में 186 स्कूल
- नारायणपुर में 68 स्कूल
- कांकेर में 74 स्कूल
- कोंडागांव में 19 स्कूल
- दंतेवाड़ा में 10 स्कूल
इन सभी जगहों पर एक ही शिक्षक के भरोसे पढ़ाई चल रही है।
अतिशेष शिक्षक, फिर भी संकट
हैरानी की बात यह है कि कई जिलों में बड़ी संख्या में शिक्षक अतिशेष घोषित हैं।
- कांकेर में 341
- कोंडागांव में 192
- जशपुर में 262
- बलरामपुर रामानुजगंज में 128
- रायपुर में 304
इसके बावजूद स्कूलों में शिक्षक नहीं पहुंच पा रहे हैं, जिससे व्यवस्था पर सवाल उठ रहे हैं।
आदिवासी इलाकों से लेकर राजधानी तक असर
यह समस्या केवल बस्तर तक सीमित नहीं है।
- बलरामपुर रामानुजगंज में 113 स्कूल एकल शिक्षक पर निर्भर
- सूरजपुर में 87
- रायगढ़ में 82
- कोरबा में 95
यहां तक कि राजधानी रायपुर में भी एक स्कूल सिर्फ एक शिक्षक के भरोसे संचालित हो रहा है।
समाधान की दरकार
नक्सल समस्या कम होने के बाद अब शिक्षा व्यवस्था को पटरी पर लाना सबसे बड़ी चुनौती बन गई है। स्कूल भवनों के पुनर्निर्माण के साथ साथ शिक्षकों की समुचित नियुक्ति और समायोजन बेहद जरूरी है, ताकि बच्चों का भविष्य सुरक्षित किया जा सके।
































