भोपाल। मध्य प्रदेश हाई कोर्ट ने सोम डिस्टलरी से जुड़े अवैध शराब मामले में अपना फैसला सुरक्षित रख लिया है। इस कारण 24 मार्च को होने वाली आबकारी टेंडर प्रक्रिया में सोम ग्रुप हिस्सा नहीं ले पाएगा, क्योंकि उसका लाइसेंस पहले ही निरस्त किया जा चुका है।

न्यायालय ने मामले की सुनवाई के दौरान आबकारी विभाग की कार्यप्रणाली पर भी गंभीर सवाल उठाए। कोर्ट ने देखा कि नियमों और प्रक्रियाओं का पालन नहीं किया गया, जिससे लाइसेंस और टेंडर प्रक्रिया पर प्रभाव पड़ा।

आबकारी अधिकारियों के लिए यह चेतावनी है कि नियमों का पालन और पारदर्शिता सुनिश्चित करना आवश्यक है। वहीं, सोम डिस्टलरी के लिए यह मामला अब हाई कोर्ट में लंबित है और कोर्ट का फैसला आने तक समूह टेंडर प्रक्रिया से बाहर रहेगा।

इस फैसले से यह स्पष्ट हो गया है कि अवैध शराब से जुड़े मामलों में न्यायालय सख्ती बरत रहा है और विभाग की कार्यप्रणाली पर नजर रख रहा है।

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