नई दिल्ली। देश का 9वां आम बजट पेश करने से पहले वित्त मंत्री निर्मला सीतारमण रविवार को कर्तव्य भवन पहुंचीं। इस दौरान वह बैंगनी रंग की गोल्डन बॉर्डर वाली तमिलनाडु की पारंपरिक कांजीवरम साड़ी में नजर आईं। हर बार की तरह इस बार भी उनकी साड़ी केवल फैशन नहीं, बल्कि एक खास सामाजिक और सांस्कृतिक संदेश लेकर सामने आई।

निर्मला सीतारमण की साड़ियों को अब बजट से जुड़ा एक प्रतीक माना जाने लगा है। वह हर साल अलग-अलग राज्यों की पारंपरिक हथकरघा साड़ियों को चुनकर देश की सांस्कृतिक विविधता और कारीगरों के हुनर को मंच देती हैं। इस बार चुना गया बैंगनी रंग खास माना जा रहा है, जिसे महिला सशक्तिकरण, सम्मान, न्याय और समानता का प्रतीक माना जाता है।

राजनीतिक दृष्टि से भी यह चयन अहम माना जा रहा है, क्योंकि तमिलनाडु में इस वर्ष विधानसभा चुनाव होने हैं। ऐसे में यह संकेत भी माना जा रहा है कि बजट में महिलाओं से जुड़ी योजनाओं, शिक्षा, स्वास्थ्य और आर्थिक सहायता पर विशेष फोकस हो सकता है। बजट में इसका स्पष्ट संकेत 11 बजे संसद में देखने को मिलेगा।

क्या कहता है बैंगनी रंग

बैंगनी रंग अंतरराष्ट्रीय महिला दिवस और महिला अधिकार आंदोलनों से भी जुड़ा रहा है। यह गरिमा, आत्मसम्मान और समान अवसर का प्रतीक माना जाता है। ऐसे में वित्त मंत्री की साड़ी को महिला केंद्रित बजट की ओर इशारा माना जा रहा है।

2019 से चली आ रही है परंपरा

निर्मला सीतारमण ने 2019 से बजट के दिन अलग-अलग राज्यों की हथकरघा साड़ियां पहनने की परंपरा शुरू की। इससे न केवल क्षेत्रीय कला को पहचान मिलती है, बल्कि ग्रामीण अर्थव्यवस्था और महिलाओं की भागीदारी को भी बढ़ावा मिलता है।

पिछले वर्षों की साड़ियां

बजट 2025: ऑफ-व्हाइट मिथिला पेंटिंग साड़ी, जिसे पद्मश्री कलाकार दुलारी देवी ने भेंट किया था।
बजट 2024: पश्चिम बंगाल की नीली तुसार सिल्क साड़ी, कंथा कढ़ाई के साथ।
बजट 2023: कर्नाटक की इलकल बुनाई वाली लाल रेशमी साड़ी।
बजट 2022: ओडिशा की बोमकाई साड़ी, गहरे भूरे रंग में।
बजट 2021: तेलंगाना की पोचमपल्ली इक्कट सिल्क साड़ी।
बजट 2020: चमकीली पीली रेशमी साड़ी, आशा और समृद्धि का प्रतीक।
बजट 2019 गुलाबी मंगलगीरी साड़ी, सुनहरे बॉर्डर के साथ।
हर साल की तरह इस बार भी वित्त मंत्री की साड़ी ने बजट से पहले ही चर्चा का माहौल बना दिया है।

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