छत्तीसगढ़/कोरिया (अभिषेक सोनी) अंतरराष्ट्रीय महिला दिवस के अवसर पर पुलिस सेवा में अपनी मेहनत और समर्पण से अलग पहचान बनाने वाली अतिरिक्त पुलिस अधीक्षक डॉ. सुरेशा चौबे की कहानी कई युवतियों के लिए प्रेरणा है।

संचार टुडे CGMP न्यूज के स्टेट हेड से बातचीत करते हुए उन्होंने बताया कि उनका जन्म वर्ष 1985 में बिलासपुर के सरकंडा में हुआ। उन्होंने समाजशास्त्र (Sociology) में पीएचडी की उपाधि प्राप्त की और वर्ष 2005-06 में राज्य लोक सेवा आयोग (PSC) के माध्यम से उनका चयन उप पुलिस अधीक्षक (DSP) पद पर हुआ। अपने कार्यकाल के दौरान बेहतर कार्यों के चलते वर्ष 2015 में उन्हें अतिरिक्त पुलिस अधीक्षक पद पर पदोन्नत किया गया।

निर्भया कांड के बाद महिलाओं और बच्चियों की सुरक्षा को लेकर देशभर में कई पहल शुरू की गईं। उसी क्रम में दुर्ग जिले में अतिरिक्त पुलिस अधीक्षक के रूप में पदस्थ रहते हुए डॉ सुरेशा चौबे ने “रक्षा” टीम का नेतृत्व किया, जिसके माध्यम से बच्चियों और महिलाओं के साथ होने वाली छेड़छाड़, बैड टच और उत्पीड़न के मामलों को लेकर जागरूकता और सुरक्षा का विशेष अभियान चलाया गया। इस सराहनीय पहल के लिए उन्हें FICCI का राष्ट्रीय अवार्ड भी प्राप्त हुआ।

पुलिस सेवा और सामाजिक क्षेत्र में उत्कृष्ट कार्यों के लिए उन्हें कई सम्मान भी मिल चुके हैं, जिनमें महिला एवं बाल विकास विभाग द्वारा मानव रत्न सम्मान, बाल आयोग द्वारा बाल गौरव सम्मान, कोविड काल में मुख्यमंत्री सम्मान तथा पुलिस महानिदेशक सम्मान प्रमुख हैं।डॉ सुरेशा चौबे बताती हैं कि पुलिस सेवा में महिलाओं को कई चुनौतियों का सामना करना पड़ता है। समाज में अभी भी मेल डॉमिनेटिंग मानसिकता के कारण महिलाओं को खुद को साबित करने के लिए अधिक मेहनत करनी पड़ती है। इसके साथ ही पुलिस सेवा में देर रात तक ड्यूटी, लगातार जिम्मेदारियां और परिवार तथा बच्चों से दूर रहना भी महिला अधिकारियों के लिए बड़ी चुनौती होती है।


उन्होंने बताया कि उन्हें पुलिस सेवा में आने की सबसे बड़ी प्रेरणा अपनी माताजी से मिली। उनकी मां चाहती थीं कि उनकी बेटी पुलिस अधिकारी बने। प्रतियोगी परीक्षाओं की तैयारी के दौरान उन्होंने प्रतिदिन 16 से 18 घंटे तक पढ़ाई की, जिसमें उनकी मां ने हर कदम पर उनका पूरा साथ दिया। टीवी सीरियल “उड़ान” की किरदार कल्याणी सिंह को देखकर उनकी माताजी को प्रेरणा मिली और उन्होंने अपनी बेटी को पुलिस अधिकारी बनाने का सपना देखा।

डॉ सुरेशा चौबे की सफलता के पीछे उनके परिवार का भी महत्वपूर्ण योगदान रहा है। उनके पिता एसईसीएल के सेवानिवृत्त कर्मचारी हैं, जिन्होंने उन्हें बचपन से ही अनुशासन और मेहनत का महत्व सिखाया। उनकी माताजी ने पढ़ाई और प्रतियोगी परीक्षाओं की तैयारी के लिए लगातार प्रेरित किया। परिवार के अन्य सदस्य भी विभिन्न क्षेत्रों में कार्यरत हैं—उनके बड़े भाई पत्रकार, छोटे भाई पुलिस विभाग में इंस्पेक्टर तथा बड़ी बहन शिक्षिका हैं। वहीं उनके पति दिल्ली में आईटी सेक्टर में कार्यरत हैं और हमेशा उनके कार्य एवं जिम्मेदारियों में सहयोग करते हैं।

अंतरराष्ट्रीय महिला दिवस के अवसर पर युवतियों को संदेश देते हुए उन्होंने कहा कि “अपने कर्तव्यों का ईमानदारी से निर्वहन करना जरूरी है। केवल अधिकारों की मांग करना ही पर्याप्त नहीं है। यदि आप अपने काम को पूरी लगन और ईमानदारी से करते हैं तो पहचान अपने आप बन जाती है।”

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