

रानू बैरागी
इंदौर। भारतीय राजनीति के वर्तमान युग को यदि किसी एक शब्द में समझा जाए, तो वह शब्द है मोदी मैजिक। यह शब्द केवल किसी नेता की लोकप्रियता को नहीं दर्शाता, बल्कि उस गहरे भावनात्मक, सामाजिक और राजनीतिक परिवर्तन को भी बयान करता है जो पिछले एक दशक में भारत के मतदाता के भीतर घटित हुआ है। प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी ने जिस तरह राजनीति, नेतृत्व और जनता के रिश्ते को पुनर्परिभाषित किया है, उसने भारत के लोकतांत्रिक व्यवहार को एक नई दिशा दी है।
मोदी की लोकप्रियता किसी एक चुनाव या किसी एक योजना का परिणाम नहीं है। यह वर्षों की सुनियोजित छवि- निर्माण, निरंतर संवाद, मजबूत संगठनात्मक शक्ति और सबसे बढ़कर जनता की भावनाओं को समझने की कला का संयुक्त परिणाम है। मोदी आज सिर्फ प्रधानमंत्री नहीं हैं, वे करोड़ों भारतीयों के लिए एक उम्मीद, एक पहचान और एक सुरक्षा कवच बन चुके हैं। इस पूरे घटनाक्रम को समझने के लिए हमें पहले यह समझना होगा कि भारतीय राजनीति केवल नीतियों से नहीं चलती, वह भावनाओं से चलती है। भारत का मतदाता जब वोट डालता है, तो वह केवल सरकार नहीं चुनता, वह अपने भविष्य, अपनी पहचान और अपने सम्मान पर निर्णय करता है। मोदी इस मनोविज्ञान को गहराई से समझते हैं।
नरेंद्र मोदी की राजनीतिक यात्रा साधारण नहीं है। एक चाय बेचने वाले से लेकर देश के प्रधानमंत्री बनने तक का उनका सफर एक ऐसी कहानी है जिसमें संघर्ष, मेहनत और आत्मनिर्भरता का संदेश छिपा है। यह कहानी करोड़ों गरीब, निम्न मध्यमवर्गीय और ग्रामीण परिवारों के दिल को छूती है। उन्हें लगता है कि मोदी उनमें से एक हैं। यही भावनात्मक रिश्ता मोदी को बाकी नेताओं से अलग बनाता है। मोदी ने खुद को एक ऐसे नेता के रूप में प्रस्तुत किया है जो सत्ता से नहीं, बल्कि सेवा से जुड़ा है। उनका सादा जीवन या लगातार काम करना, यह सब मिलकर उन्हें एक त्यागी और समर्पित नेता के रूप में दर्शाता है। यह छवि उस आम नागरिक के लिए बहुत आकर्षक है जो लंबे समय से नेताओं को सुविधा और भ्रष्टाचार में डूबा देखता आया है।
इस भावनात्मक जुड़ाव को मोदी ने निरंतर संवाद के माध्यम से और मजबूत किया। “मन की बात” जैसे कार्यक्रमों के जरिए उन्होंने प्रधानमंत्री पद को एक दूर की कुर्सी से निकालकर घर की बैठक तक पहुंचा दिया। लोग रेडियो पर उनकी आवाज सुनते हैं, अपने जैसे लोगों की कहानियां सुनते हैं और महसूस करते हैं कि देश का नेता उनकी दुनिया को समझता है। सोशल मीडिया ने इस जुड़ाव को और गहरा किया है। मोदी आज भारत के सबसे बड़े डिजिटल रूप से सक्रीय राजनेता हैं। वे ट्विटर, फेसबुक, इंस्टाग्राम और अपने मोबाइल ऐप के जरिए हर दिन करोड़ों लोगों तक पहुंचते हैं। इस निरंतर उपस्थिति ने उन्हें एक ऐसे नेता के रूप में स्थापित किया है जो हमेशा जनता के साथ और उनसे घिरा हुआ नजर आता है।
यह केवल प्रचार नहीं है, यह एक मनोवैज्ञानिक जुड़ाव है। जब कोई व्यक्ति रोज आपके सामने आता है, आप उसकी बातें सुनते हैं, तो वह आपके जीवन का हिस्सा बन जाता है। मोदी इस मनोविज्ञान को बहुत अच्छे से समझते हैं। मोदी मैजिक के एक और बड़े आधार के रूप में तकनीक व डेटा के उपयोग को समझा जा सकता है। 2014 के बाद से भारतीय राजनीति में एक नई शैली आई है जिसे डिजिटल राजनीति कहा जा सकता है। भाजपा ने लोगों की पसंद, उनकी जरूरतों और उनकी सोच को समझने के लिए बड़े पैमाने पर डेटा का इस्तेमाल किया। इसके आधार पर अलग-अलग वर्गों के लिए अलग-अलग संदेश तैयार किए गए। किसी युवा से नौकरी और स्टार्टअप की बात की गई, तो किसी किसान से सम्मान निधि और फसल बीमा की। महिलाओं के लिए उज्ज्वला और शौचालय जैसी योजनाओं को सामने रखा गया। इससे हर वर्ग को लगा कि सरकार सीधे उससे बात कर रही है।
व्हाट्सएप जैसे माध्यमों ने इस संदेश को गांव-गांव तक पहुंचाया। पारंपरिक मीडिया पर निर्भर रहने के बजाय भाजपा ने अपने समर्थकों के नेटवर्क को ही एक बड़ा संचार तंत्र बना दिया। इससे मोदी का संदेश बिना रुके, बिना बदले, सीधे लोगों तक पहुंचा। मोदी मैजिक का एक बहुत बड़ा हिस्सा राष्ट्रीय गर्व और सांस्कृतिक पहचान से जुड़ा है। मोदी ने भारत की प्राचीन संस्कृति, परंपरा और इतिहास को गर्व का विषय बनाया। राम मंदिर का निर्माण केवल एक धार्मिक मुद्दा नहीं रहा, बल्कि इसे राष्ट्रीय सम्मान और ऐतिहासिक न्याय के रूप में प्रस्तुत किया गया। सेना के साहसिक कदमों और सीमा पर की गई कार्रवाइयों को “मजबूत भारत” की पहचान के रूप में दिखाया गया। इससे लोगों को लगा कि अब देश कमजोर नहीं है, बल्कि आत्मविश्वास से भरा हुआ है। मोदी ने भारत को एक ऐसे देश के रूप में प्रस्तुत किया है जो दुनिया में सम्मान चाहता है और सम्मान पाता भी है। अंतरराष्ट्रीय मंचों पर उनकी सक्रियता ने इस छवि को और मजबूत किया है।
हालाँकि इन सबके पीछे एक मजबूत संगठन भी काम करता है। भाजपा और उससे जुड़े संगठन गांव से लेकर महानगर तक फैले हुए हैं। हर कार्यकर्ता मोदी के संदेश को आगे बढ़ाने का काम करता है। पार्टी में अनुशासन और नेतृत्व की स्पष्टता है, जिससे भ्रम की स्थिति नहीं बनती है। मोदी की राजनीति ने विपक्ष को भी एक तरह से परिभाषित कर दिया है। उन्होंने खुद को एक ऐसे नेता के रूप में पेश किया है जो देश को खतरों से बचा सकता है। ऐसे में जो भी उनकी आलोचना करता है, वह कई बार जनता की नजर में देश के खिलाफ खड़ा दिखने लगता है। सही मायने में देखें तो इस पूरी प्रक्रिया में मोदी एक ऐसे केंद्र बन गए हैं जिसके चारों ओर राजनीति घूमती है। चुनाव अब केवल पार्टियों के बीच नहीं, बल्कि मोदी बनाम बाकी सब के रूप में देखे जाने लगे हैं। मोदी ने राजनीति को एक भावनात्मक अनुभव में बदल दिया है, जहां नेता केवल सरकार नहीं चलाता, बल्कि लोगों की उम्मीदों और सपनों का प्रतिनिधि बन जाता है। जब तक मोदी इस भावनात्मक जुड़ाव, राष्ट्रीय गर्व और निरंतर संवाद को बनाए रखेंगे, तब तक मोदी मैजिक भारतीय राजनीति की सबसे शक्तिशाली ताकत बना रहेगा।






















