महासमुंद:  कलेक्टर कॉलोनी में राष्ट्रीय तेली कर्मा सेना के संस्थापक व भाजपा किसान नेता अशवंत तुषार साहू  मकर संक्रांति पर बच्चों के साथ पतंग उड़ाना एक आनंदमय अनुभव है, जहाँ आसमान रंग-बिरंगी पतंगों से भर जाता है, बच्चे ‘वो काटा!’ चिल्लाते हैं और यह त्यौहार नई शुरुआत, सूर्य देव के प्रति आभार और शीत ऋतु के अंत का प्रतीक है, जिसमें सभी मिलकर खुशियाँ मनाते हैं, खासकर जब वे साधारण धागों से पतंग उड़ाते हैं. साथ में गीतांशु चक्रधारी आयुष सोनवानी प्रिंस कुर्रे, लक्ष्यदाऊ, रोहन दाऊ, खिलेश दीवान, उपेंद्र बारिहा, उपस्थित रहे।

मकर संक्रांति पर पतंग उड़ाने का अनुभव:

उत्साह और उमंग: मकर संक्रांति के दिन सुबह से ही बच्चे और युवा छतों और खुले मैदानों में रंग-बिरंगी पतंगें लेकर जमा हो जाते हैं, जिससे पूरा आसमान जगमगा उठता है.

पेंच लड़ाना: बच्चे अपनी पतंगों के पेच लड़ाते हैं और जब किसी और की पतंग कट जाती है तो “वो काटा-वो काटा!” का शोर मचाते हैं.पारंपरिक महत्व यह त्योहार सूर्य देव के उत्तरी गोलार्ध में प्रवेश (उत्तरायण) का प्रतीक है, जो जीवन, ऊर्जा और गर्मी प्रदान करते हैं, और यह शीत ऋतु के अंत का भी संकेत देता है.सुरक्षा और सावधानी: आजकल, खतरनाक मांझे (धागे) के बजाय सामान्य धागों का उपयोग करने और पक्षियों तथा स्वयं की सुरक्षा का ध्यान रखने पर जोर दिया जाता है, सामाजिक जुड़ाव: इस दिन लोग परिवार और दोस्तों के साथ मिलकर पतंगबाजी करते हैं, और यह एक-दूसरे से जुड़ने और खुशियाँ बांटने का अवसर होता है, जैसा कि कुछ वीडियो में दिखाया गया है जहां बच्चे मोबाइल छोड़कर साथ पतंग उड़ाते हैं.

बच्चों के लिए यह क्यों खास है:

खुशियों का त्योहार: यह उन्हें प्रकृति के करीब लाता है और नई शुरुआत का एहसास कराता है.सीखने का अवसर: इससे उन्हें धैर्य, लक्ष्य और सकारात्मकता के बारे में सीखने का मौका मिलता है, कि कैसे मजबूत पतंगें ऊंची उड़ती हैं, ठीक वैसे ही जैसे सकारात्मक विचार हमें सफल बनाते हैं.
पारिवारिक बंधन: यह परिवार के साथ बिताए यादगार पलों को बनाता है, जहां वे मिलकर पतंगें उड़ाते और मस्ती करते हैं.

Leave a reply

Please enter your name here
Please enter your comment!