मध्य प्रदेश :में रेलवे से जुड़ा एक बड़ा घोटाला सामने आया है, जहां गोल्ड प्लेटेड सिल्वर मेडल की सप्लाई में भारी अनियमितता पाई गई है। मामले की गंभीरता को देखते हुए Central Bureau of Investigation ने जांच शुरू करते हुए इंदौर की एक फर्म और रेलवे के अज्ञात अधिकारियों के खिलाफ केस दर्ज किया है।

करोड़ों के मेडल निकले फर्जी

जांच के दौरान सामने आया कि भोपाल स्थित रेलवे कोच जनरल स्टोर डिपो में सप्लाई किए गए 3640 मेडल, जिनकी कुल कीमत करीब 49.68 लाख रुपये थी, गुणवत्ता परीक्षण में नकली पाए गए।

इस मामले में ‘मैसर्स वायबल डायमंड्स’ नाम की फर्म को आरोपी बनाया गया है, जिसने इन मेडल की आपूर्ति की थी।

2023 में हुआ था समझौता

जानकारी के अनुसार, West Central Railway और संबंधित फर्म के बीच 23 जनवरी 2023 को एक अनुबंध हुआ था। इस समझौते के तहत फर्म को गोल्ड प्लेटेड सिल्वर मेडल उपलब्ध कराने थे।

प्रारंभिक स्तर पर फर्म ने दावा किया था कि मेडल 99.9 प्रतिशत शुद्ध चांदी से बने हैं और परीक्षण रिपोर्ट में भी इसे सही बताया गया था।

दोबारा जांच में सामने आई सच्चाई

बाद में जब रेलवे के सतर्कता विभाग ने दोबारा परीक्षण कराया, तो चौंकाने वाला खुलासा हुआ। जांच में पाया गया कि मेडल में चांदी के बजाय लगभग 99.8 प्रतिशत तांबा मिला हुआ था। यानी यह पूरी सप्लाई मानकों के अनुरूप नहीं थी और सामग्री नकली साबित हुई।

अधिकारियों की भूमिका भी जांच के दायरे में

इस पूरे प्रकरण में केवल फर्म ही नहीं, बल्कि रेलवे के संबंधित अधिकारियों की भूमिका भी संदेह के घेरे में है। सप्लाई के दौरान निगरानी में लापरवाही और संभावित मिलीभगत की आशंका जताई जा रही है।

सीबीआई अब यह पता लगाने में जुटी है कि इस मामले में किन अधिकारियों की संलिप्तता रही और क्या जानबूझकर घटिया सामग्री को मंजूरी दी गई। साथ ही परीक्षण रिपोर्ट में हुई गड़बड़ी की भी जांच की जा रही है।

आगे और बड़े खुलासों की संभावना

मामला सामने आने के बाद रेलवे महकमे में हड़कंप मच गया है। जांच एजेंसी दस्तावेजों की जांच और संबंधित लोगों से पूछताछ कर पूरे नेटवर्क को खंगाल रही है। माना जा रहा है कि जांच आगे बढ़ने पर और भी अहम खुलासे हो सकते हैं।

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