नई दिल्ली। Middle East War का असर अब भारत में भी साफ नजर आने लगा है। एलएनजी और नेचुरल गैस की सप्लाई प्रभावित होने के बाद सरकार ने बड़ा कदम उठाया है। इस स्थिति को संभालने के लिए केंद्र सरकार ने Essential Commodities Act, 1955 की धारा 3 के तहत एक अहम आदेश जारी किया है।

इस आदेश के अनुसार, सभी पेट्रोलियम और नेचुरल गैस से जुड़ी कंपनियों को “Petroleum and Natural Gas (Furnishing of Information) Order, 2026” के तहत Petroleum Planning & Analysis Cell (PPAC) को अनिवार्य रूप से अपना डेटा देना होगा। इससे सरकार को निजी और सरकारी दोनों कंपनियों की पूरी जानकारी एक जगह उपलब्ध हो सकेगी।

सरकार का उद्देश्य साफ है—तेल और गैस सेक्टर की हर गतिविधि पर नजर रखना। इस आदेश के तहत कोई भी कंपनी जानकारी देने से इनकार नहीं कर सकेगी। कंपनियों को उत्पादन, आयात, निर्यात, स्टॉक, भंडारण, परिवहन, आपूर्ति और खपत से जुड़ी पूरी जानकारी साझा करनी होगी।

Middle East War के कारण वैश्विक बाजार में अस्थिरता बढ़ी है। ऐसे में सरकार के पास यदि रियल-टाइम डेटा रहेगा, तो वह जरूरत के अनुसार सप्लाई को नियंत्रित कर सकेगी। इससे संकट की स्थिति में भी देश में तेल और गैस की कमी को काफी हद तक रोका जा सकता है।

सरकार के इस फैसले को ऊर्जा सुरक्षा के लिहाज से बड़ा और जरूरी कदम माना जा रहा है। आने वाले समय में इससे आम लोगों को राहत मिलने की उम्मीद है, भले ही अंतरराष्ट्रीय स्तर पर हालात चुनौतीपूर्ण बने रहें।

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