


सारंगढ़-बिलाईगढ़: नवीन जिला सारंगढ़-बिलाईगढ़ के अंतर्गत आने वाले ग्राम पंचायत गुड़ेली–टिमरलगा में अवैध चूना भट्ठों का कारोबार खुलेआम फल-फूल रहा है। यहां संचालित श्री बालाजी, गाड़ोदिया, कालू और मां चंद्रहासिनी चूना भट्ठा क्षेत्र में अवैध खनिज पत्थर खपत और भीषण प्रदूषण का बड़ा केंद्र बन चुके हैं। खनिज विभाग की कथित मेहरबानी से यह अवैध खेल वर्षों से बिना रोक-टोक जारी है।
ग्रामीणों का कहना है कि इन चूना भट्ठों के कारण क्षेत्र में भारी प्रदूषण फैल रहा है। हालात इतने बदतर हो चुके हैं कि लोगों का सांस लेना भी मुश्किल हो गया है। धुएं और धूल के कारण कई बार सड़क तक दिखाई नहीं देती। बच्चे, बुजुर्ग और महिलाएं लगातार बीमार पड़ रहे हैं। लोगों का कहना है कि वे प्रदूषण के बीच जीने को मजबूर हैं, लेकिन गांव छोड़कर जाने का भी कोई विकल्प नहीं है।

प्रतिदिन सैकड़ों टन अवैध पत्थर की खपत
स्थानीय सूत्रों के अनुसार, यहां प्रतिदिन सैकड़ों टन अवैध चूना पत्थर खपाया जा रहा है। पत्थर बेचने वाले खननकर्ता के पास न तो वैध खनन लीज है और न ही किसी प्रकार की अनुमति। अवैध रूप से निकाले गए पत्थर को 250 से 300 प्रति टन के हिसाब से चूना भट्ठा संचालकों को बेचा जा रहा है।सबसे चौंकाने वाली बात यह है कि भट्ठा संचालक रॉयल्टी पर्ची किसी अन्य के नाम से खरीदकर अपने पास रखते हैं, ताकि जांच के दौरान उन्हें दिखाया जा सके। जबकि प्रतिदिन हो रही भारी खपत का कोई वास्तविक रिकॉर्ड नहीं रखा जा रहा।
खनिज विभाग पर मिलीभगत के आरोप
ग्रामीणों और जानकारों का आरोप है कि यह पूरा अवैध कारोबार खनिज विभाग और चूना भट्ठा संचालकों की मिलीभगत से चल रहा है। वर्षों से इन भट्ठों ने शासन को लाखों–करोड़ों रुपए का राजस्व नुकसान पहुंचाया है। इसके बावजूद अब तक कोई ठोस कार्रवाई नहीं की गई।क्षेत्र में कई बार अधिकारी और जनप्रतिनिधि निरीक्षण कर लौट चुके हैं, लेकिन हालात जस के तस बने हुए हैं। इससे ग्रामीणों का प्रशासन और व्यवस्था से भरोसा उठता जा रहा है।
कब मिलेगी राहत?
गुड़ेली–टिमरलगा के लोग आज भी प्रदूषण, बीमारी और भय के बीच जीवन गुजार रहे हैं। सवाल यह है कि
क्या खनिज विभाग इस अवैध खेल पर लगाम लगाएगा?
या फिर यह क्षेत्र यूं ही अवैध खनन और प्रदूषण की भेंट चढ़ता रहेगा?अब निगाहें प्रशासन की कार्रवाई पर टिकी हैं।
































