मध्य प्रदेश : के नगरीय निकाय इन दिनों भारी बिजली बिलों के बोझ से जूझ रहे हैं। बिलों का भुगतान न हो पाने के कारण हर महीने उन्हें मिलने वाली चुंगी क्षतिपूर्ति की राशि से सीधे कटौती कर बिजली वितरण कंपनियों के खाते में जमा कर दी जा रही है। इस स्थिति से निजात दिलाने और बिजली खर्च कम करने के लिए राज्य सरकार ने अब एनर्जी ऑडिटर्स की तैनाती का फैसला लिया है।

165 नगरीय निकायों में होगी एनर्जी ऑडिटर्स की नियुक्ति
फिलहाल रीवा, सागर, जबलपुर और शहडोल संभाग के 165 नगरीय निकायों में विद्युत इंजीनियर या एनर्जी ऑडिटर्स की नियुक्ति की जा रही है। ये विशेषज्ञ एलटी और एचटी कनेक्शनों का परीक्षण करेंगे और पावर फैक्टर का विश्लेषण कर उसमें सुधार कराएंगे। इससे बिजली की खपत कम होगी और बिल में भी उल्लेखनीय कमी आएगी। साथ ही सौर ऊर्जा और अन्य गैर-पारंपरिक स्रोतों से बिजली उत्पादन को बढ़ावा देने पर भी जोर दिया जाएगा, जिससे कार्बन फुटप्रिंट घटाने में मदद मिलेगी।

हर महीने करोड़ों की कटौती से बढ़ी मुश्किलें
पिछले पांच वर्षों से नगरीय निकायों को मिलने वाली चुंगी क्षतिपूर्ति से हर महीने 50 से 60 करोड़ रुपये की कटौती की जा रही है। भोपाल और इंदौर जैसे बड़े नगर निगमों से ही 25 से 30 करोड़ रुपये हर माह बिजली कंपनियों को दिए जा रहे हैं। इस वजह से अधिकारियों और कर्मचारियों के वेतन और भत्तों के भुगतान में भी दिक्कतें आ रही हैं।

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