

रायपुर। छत्तीसगढ़ हाई कोर्ट ने बहुचर्चित कोयला लेवी और आर्थिक अपराध मामले में बड़ा फैसला सुनाते हुए आरोपी देवेंद्र डडसेना की जमानत याचिका खारिज कर दी। न्यायमूर्ति नरेंद्र कुमार व्यास की एकलपीठ ने कहा कि आर्थिक अपराध गंभीर श्रेणी में आते हैं और ऐसे मामलों में जमानत देने में विशेष सावधानी बरतना जरूरी है।
कोयला लेवी घोटाले का मामला
यह मामला एंटी करप्शन ब्यूरो (ACB) / इकोनॉमिक ऑफेंस विंग (EOW) द्वारा दर्ज अपराध से जुड़ा है।
- आईपीसी की धारा 384, 420, 120-बी, 467, 468, 471 के तहत केस दर्ज
- प्रिवेंशन ऑफ करप्शन एक्ट (PMLA) की धाराओं के तहत भी कार्रवाई
- ईडी की जांच में खुलासा: छत्तीसगढ़ में कोयला परिवहन पर अवैध वसूली का बड़ा नेटवर्क
- प्रति टन 25 रुपये की अवैध वसूली
- जुलाई 2020 से जून 2022 के बीच लगभग 540 करोड़ रुपये की वसूली
जांच में कई नौकरशाह, कारोबारी और अन्य लोग इस घोटाले में शामिल पाए गए।
देवेंद्र डडसेना की भूमिका
अदालत में पेश दस्तावेजों और केस डायरी के अनुसार:
- देवेंद्र डडसेना सिंडिकेट की अहम कड़ी था
- उस पर अवैध वसूली की रकम लेने और बांटने का आरोप
- जब्त डायरी और गवाहों के बयानों में लगभग 52 करोड़ रुपये के लेन-देन का खुलासा
- यह राशि राजनीतिक और अन्य खर्चों में उपयोग की गई
आरोपी का पक्ष और कोर्ट का फैसला
- आरोपी का दावा: उसे झूठा फंसाया गया, प्रत्यक्ष साक्ष्य नहीं, केवल सह-आरोपी के बयान
- राज्य सरकार का पक्ष: मामला गंभीर आर्थिक अपराध का है, आरोपी की भूमिका महत्वपूर्ण और सक्रिय
- कोर्ट की टिप्पणी: साक्ष्य में छेड़छाड़ और गवाहों को प्रभावित करने की आशंका है, जांच अभी जारी है, इसलिए जमानत देना उचित नहीं

































