एसडीएम करुण डहरिया के कार्यकाल की समीक्षा,खनन और अवैध रेत परिवहन पर रोक,हंसपुर प्रकरण की उच्चस्तरीय जांच की मांग

रायपुर/बलरामपुर। बलरामपुर जिले के कुसमी क्षेत्र में कथित अवैध बॉक्साइट खनन, अवैध रेत परिवहन एवं प्रशासनिक अनियमितताओं से जुड़े मामले में मुख्यमंत्री कार्यालय ने आधिकारिक संज्ञान लिया है। मुख्यमंत्री सचिवालय द्वारा कलेक्टर बलरामपुर को निर्देश जारी कर आवेदन पर नियमानुसार आवश्यक कार्रवाई सुनिश्चित करने को कहा गया है।

उल्लेखनीय है कि ऑल मीडिया प्रेस एसोसिएशन के सरगुजा संभाग अध्यक्ष, छत्तीसगढ़ श्रमजीवी पत्रकार कल्याण संघ राजपुर के प्रवक्ता एवं संचार टुडे सीजीएमपी न्यूज के छत्तीसगढ़ स्टेट हेड अभिषेक कुमार सोनी द्वारा मुख्यमंत्री विष्णु देव साय को इस संबंध में विस्तृत ज्ञापन प्रेषित किया गया था।ज्ञापन में कुसमी क्षेत्र में लंबे समय से कथित रूप से संचालित अवैध बॉक्साइट खनन एवं अवैध रेत परिवहन पर तत्काल प्रभाव से रोक लगाने की मांग की गई है। साथ ही हंसपुर में हुए पूरे प्रकरण की उच्च स्तरीय, निष्पक्ष एवं समयबद्ध जांच कराने तथा कुसमी में पदस्थापन अवधि के दौरान तत्कालीन एसडीएम करुण कुमार डहरिया द्वारा लिए गए प्रशासनिक निर्णयों, आदेशों एवं कार्रवाइयों की समग्र समीक्षा की मांग भी की गई है।


एसडीएम करुण डहरिया के कार्यकाल की समग्र समीक्षा की मांग

ज्ञापन में मांग की गई है कि कुसमी में पदस्थापन अवधि के दौरान तत्कालीन एसडीएम द्वारा पारित सभी महत्वपूर्ण प्रशासनिक आदेशों, अनुमतियों एवं कार्रवाइयों की समग्र समीक्षा की जाए।साथ ही अवैध बॉक्साइट खनन एवं अवैध रेत परिवहन से संबंधित संभावित सांठगांठ, संरक्षण अथवा लापरवाही की स्वतंत्र जांच कराई जाए। राजस्व, खनिज, वन एवं पुलिस विभाग से संबंधित फाइलों, शिकायतों एवं की गई कार्रवाइयों की वस्तुनिष्ठ पड़ताल की भी मांग की गई है।ज्ञापन में कहा गया है कि यदि किसी भी स्तर पर फर्जीवाड़ा, भ्रष्टाचार, पद के दुरुपयोग अथवा आपराधिक संरक्षण की पुष्टि होती है तो संबंधितों के विरुद्ध कठोर वैधानिक एवं दंडात्मक कार्रवाई सुनिश्चित की जाए।

अवैध खनन से जुड़ी आशंकाएं

स्थानीय आदिवासी समाज एवं सामाजिक संगठनों का आरोप है कि कुसमी क्षेत्र में लंबे समय से अवैध बॉक्साइट खनन एवं अवैध रेत परिवहन निर्बाध रूप से संचालित रहा, जिससे जल, जंगल और जमीन प्रभावित हुए हैं। विरोध करने वाले ग्रामीणों को दबाव और भय का सामना करना पड़ा। ज्ञापन में कहा गया है कि छत्तीसगढ़ आदिवासी अधिकारों एवं प्राकृतिक संसाधनों की सुरक्षा के लिए जाना जाता है, ऐसे में इस प्रकरण की पारदर्शी जांच न केवल पीड़ितों को न्याय दिलाने के लिए बल्कि शासन-प्रशासन पर जनता के विश्वास को सुदृढ़ करने के लिए भी आवश्यक है।


क्या था पूरा मामला?

जानकारी के अनुसार 16 फरवरी 2026 की रात्रि लगभग 8 बजे कुसमी में पदस्थ एसडीएम करुण कुमार डहरिया अपने सहयोगियों विक्की सिंह उर्फ अजय प्रताप सिंह, मंजीत कुमार यादव एवं सुदीप यादव सहित अन्य लोगों के साथ थार एवं बोलेरो वाहन में ग्राम पंचायत हंसपुर क्षेत्र में कथित बॉक्साइट खनन से जुड़े ट्रक की कार्रवाई हेतु पहुंचे थे। इसी दौरान खेत में पानी पटाने वाले आदिवासी ग्रामीण
62 वर्षीय रामनरेश राम पिता रेघा उरांव,60 वर्षीय अजीत पिता लालचंद उरांव,20 वर्षीय आकाश पिता रूपसाय अगरिया के साथ मारपीट की घटना हुई। घायलों को अस्पताल लाया गया, जहां चिकित्सकों ने रामनरेश उरांव को मृत घोषित कर दिया।पुलिस के अनुसार एसडीएम करुण कुमार डहरिया सहित चार आरोपियों के विरुद्ध हत्या का मामला दर्ज कर धारा 103(1), 115(2), 3(5) के तहत केस पंजीबद्ध कर न्यायिक रिमांड पर जेल भेजा गया है। मामले में अन्य संभावित संलिप्तता की जांच जारी है।घटना के बाद सर्व आदिवासी समाज, स्थानीय ग्रामीणों एवं कांग्रेस कार्यकर्ताओं ने “हत्यारों को फांसी दो” के नारों के साथ काका लरंग साय चौक मुख्य सड़क पर सांकेतिक चक्का जाम कर प्रदर्शन किया था। पुलिस की समझाइश के बाद जाम समाप्त हुआ था।

जिला प्रशासन के अग्रिम कार्रवाई पर टिकी निगाहें

मुख्यमंत्री कार्यालय की मोहर लगने के बाद अब जिला प्रशासन की आगामी कार्रवाई पर सभी की निगाहें टिकी हुई हैं। यदि मामले में उच्च स्तरीय जांच समिति गठित की जाती है तो अवैध खनन, खनिजों के अवैध परिवहन, राजस्व हानि तथा प्रशासनिक स्तर पर संभावित लापरवाही या मिलीभगत जैसे कई महत्वपूर्ण पहलुओं की गहराई से पड़ताल हो सकती है। जांच के दौरान संबंधित विभागों के अधिकारियों की भूमिका, खनन से जुड़े पट्टों की स्थिति, परिवहन अनुमति, रॉयल्टी भुगतान और निगरानी व्यवस्था जैसे बिंदुओं की भी विस्तार से जांच होने की संभावना जताई जा रही है।

विशेषज्ञों का मानना है कि यदि निष्पक्ष और पारदर्शी जांच होती है तो इससे न केवल अवैध गतिविधियों पर अंकुश लगेगा, बल्कि भविष्य में ऐसी घटनाओं की पुनरावृत्ति रोकने के लिए भी ठोस व्यवस्था बनाई जा सकती है। वहीं यह मामला शासन-प्रशासन की जवाबदेही और स्थानीय स्तर पर कानून के प्रभावी क्रियान्वयन से भी जुड़ा हुआ माना जा रहा है।इधर स्थानीय जनप्रतिनिधियों, सामाजिक संगठनों और आम नागरिकों के बीच इस मुद्दे को लेकर चर्चा और भी तेज हो गई है। कई लोगों का कहना है कि यदि शिकायतों में सच्चाई पाई जाती है तो दोषियों के विरुद्ध कड़ी कार्रवाई होना जरूरी है, ताकि क्षेत्र में अवैध खनन पर प्रभावी रोक लग सके और पर्यावरण तथा सरकारी राजस्व की सुरक्षा सुनिश्चित की जा सके। अब सभी की नजरें जिला प्रशासन की अगली कार्रवाई और संभावित जांच प्रक्रिया पर टिकी हुई हैं।

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