रायपुर। छत्तीसगढ़ में लंबे समय से चल रही बहस के बीच धर्म स्वातंत्र्य विधेयक 2026 को विधानसभा में पेश कर दिया गया है। माना जा रहा है कि बजट सत्र के अंतिम दिन इसे पारित किया जा सकता है। यह विधेयक वर्तमान में लागू 1968 के अधिनियम की जगह लेगा, जिसे अब बदलते समय के अनुसार अपर्याप्त माना जा रहा है।

नए धर्म स्वातंत्र्य विधेयक 2026 में जबरन, प्रलोभन या कपटपूर्ण तरीके से धर्मांतरण को रोकने के लिए कड़े प्रावधान किए गए हैं। इसमें अवैध धर्मांतरण कराने पर 7 से 10 साल की जेल और कम से कम 5 लाख रुपये जुर्माने का प्रावधान है। वहीं, यदि पीड़ित महिला, नाबालिग या अनुसूचित वर्ग से है, तो सजा 10 से 20 साल तक और जुर्माना 10 लाख रुपये तक हो सकता है।

सामूहिक धर्मांतरण के मामलों में सजा और भी सख्त रखी गई है, जिसमें 10 साल से लेकर आजीवन कारावास और न्यूनतम 25 लाख रुपये जुर्माने का प्रावधान शामिल है। विधेयक के तहत सभी अपराध संज्ञेय और अजमानतीय होंगे तथा मामलों की सुनवाई विशेष न्यायालय में की जाएगी।

इस धर्म स्वातंत्र्य विधेयक 2026 में यह भी स्पष्ट किया गया है कि झूठ, दबाव, प्रलोभन या डिजिटल माध्यम से धर्म परिवर्तन कराना अवैध माना जाएगा। वहीं, स्वेच्छा से धर्म परिवर्तन के लिए जिला मजिस्ट्रेट को पूर्व सूचना देना अनिवार्य होगा और 30 दिनों तक आपत्ति दर्ज कराने का अवसर भी दिया जाएगा।

इसके अलावा, अंतरधार्मिक विवाह के मामलों में भी नई प्रक्रिया तय की गई है। विवाह कराने वाले व्यक्ति को आठ दिन पहले घोषणा करनी होगी, ताकि यह सुनिश्चित किया जा सके कि विवाह के जरिए धर्मांतरण का प्रयास न हो।

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