CG News : छत्तीसगढ़ हाई कोर्ट ने पंचायत एवं ग्रामीण विकास विभाग द्वारा वर्ष 2011 में की गई सब-इंजीनियर (सिविल) भर्ती में हुई गंभीर अनियमितताओं पर कड़ा रुख अपनाया है। हाई कोर्ट ने 67 उप अभियंताओं की नियुक्तियों को अवैध करार देते हुए उन्हें निरस्त कर दिया है। यह फैसला भर्ती प्रक्रिया में नियमों के उल्लंघन को लेकर एक महत्वपूर्ण न्यायिक हस्तक्षेप माना जा रहा है।

मुख्य न्यायाधीश रमेश सिन्हा और न्यायमूर्ति रवींद्र कुमार अग्रवाल की खंडपीठ ने यह निर्णय रवि तिवारी द्वारा दायर रिट अपील पर सुनाया। याचिकाकर्ता की ओर से अधिवक्ता शाल्विक तिवारी ने पक्ष रखा। न्यायालय ने वर्ष 2011 में निकाले गए 275 सब-इंजीनियर पदों की भर्ती प्रक्रिया की वैधता की विस्तार से समीक्षा की।

सुनवाई के दौरान कोर्ट के समक्ष यह तथ्य सामने आया कि भर्ती विज्ञापन के अनुसार अभ्यर्थियों के पास 23 मार्च 2011 तक आवश्यक शैक्षणिक योग्यता—डिग्री या डिप्लोमा—होना अनिवार्य था। इसके बावजूद विभाग ने ऐसे अभ्यर्थियों को भी नियुक्ति दे दी, जिन्होंने कट-ऑफ तिथि के बाद योग्यता प्राप्त की थी। कोर्ट ने स्पष्ट किया कि जिन उम्मीदवारों के पास अंतिम तिथि तक निर्धारित योग्यता नहीं थी, उनकी नियुक्ति प्रारंभ से ही शून्य मानी जाएगी।

CG News में यह भी सामने आया कि जांच समितियों की रिपोर्ट में 89 उम्मीदवारों को अपात्र पाया गया था, फिर भी उन्हें सेवा में बनाए रखा गया। कोर्ट ने इसे भर्ती प्रक्रिया में गंभीर लापरवाही और नियमों की अनदेखी बताया।

हाई कोर्ट के इस फैसले से पंचायत एवं ग्रामीण विकास विभाग की 2011 की भर्ती प्रक्रिया पर गंभीर सवाल खड़े हो गए हैं। साथ ही, इस निर्णय को सरकारी भर्तियों में पारदर्शिता, समान अवसर और नियमों के सख्त पालन की दिशा में एक अहम कदम माना जा रहा है। यह फैसला भविष्य की भर्तियों के लिए एक स्पष्ट संदेश भी देता है कि योग्यता और कट-ऑफ नियमों से किसी भी प्रकार का समझौता स्वीकार्य नहीं होगा।

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