नई दिल्ली। सरकारी कर्मचारियों को हर साल महंगाई भत्ता का बेसब्री से इंतजार रहता है। मौजूदा समय में बढ़ती महंगाई से निपटने के लिए सभी कर्मचारियों की बेसिक सैलरी के साथ महंगाई भत्ता यानी डीए (DA Hike 2025) दिया जाता है।

हर साल फरवरी से अप्रैल और सितंबर से नवंबर के बीच महंगाई भत्ता में इजाफा होता है। सितंबर से नवंबर के बीच एलान होने वाले महंगाई भत्ता को लेकर अभी से ही अलग-अलग अनुमान लगाए जा रहे हैं। बढ़ते CPI- IW इंडेक्स को देखते हुए महंगाई भत्ता में भी बढ़ोतरी का अनुमान आए है। पहले जानते हैं कि CPI- IW या AICPI- IW क्या है?

AICPI- IW इंडेक्स क्या है?

AICPI- IW या CPI- IW का इस्तेमाल मुख्य तौर पर महंगाई भत्ता तय करने के लिए किया जाता है। CPI- IW के आधार पर ही केंद्र/राज्य सरकार और औद्योगिक कर्मचारियों का महंगाई भत्ता तय होता है। ये एक तरह से सीपीआई( Consumer Price Index) का ही समूह है।

अगर AICPI- IW में वृद्धि आती है, तो इसका मतलब है कि महंगाई भत्ता बढ़ेगा। वहीं अगर इसमें गिरावट दर्ज की जाती है, तो महंगाई भत्ता में भी कमी होगी।

कितना बढ़ रहा है AICPI- IW?
Labourbureau की वेबसाइट से मिले आंकड़ों की मानें तो मार्च से ही इसमें वृद्धि देखी जा रही है।

मार्च 2025 में CPI- IW 143 दर्ज किया गया था, फिर अप्रैल 2025 में ये 143.5 दर्ज किया गया। इसके मई 2025 में ये 0.5 बढ़कर 144 हो गया ।

कैसे होता है महंगाई भत्ता निर्धारित?

महंगाई भत्ता कैलकुलेट करने के लिए CPI- IW से जुड़ा एक फॉर्मूला का इस्तेमाल किया जाता है।

12 महीनों का औसत AICPI- IW- 261.42 / 261.42 x 100
12 महीनों का AICPI- IW औसत 144.17 तक पहुंच गया है। इस अनुसार इस बार महंगाई भत्ता 58.85 फीसदी होना चाहिए। अभी ये 55% है, जिसे बढ़ाकर 58 या 59 किया जा सकता है। इसका मतलब हुआ कि महंगाई भत्ते में 3 से 4 फीसदी बढ़ोतरी आ सकती है।

क्या होता है महंगाई भत्ता?

बढ़ती महंगाई से निपटने के लिए हर कर्मचारी को बेसिक सैलरी के साथ महंगाई भत्ता दिया जाता है। ये हर साल दो बार रिवाइज किया जाता है। इसमें कितनी बढ़ोतरी या गिरावट करनी है, वे मौजूदा समय में चल रही महंगाई के आधार पर तय होता है। इसे कैलकुलेट करने के लिए CPI-IW का आंकड़ा लिया जाता है।

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