नई दिल्ली: ट्रेन से सफर करने वाले लाखों यात्रियों के लिए एक राहत भरी खबर सामने आई है। लंबे समय से जिस मांग को यात्री उठा रहे थे, अब उस पर रेलवे ने बड़ा फैसला ले लिया है। अप्रैल के मध्य से देश की 10 प्रमुख ट्रेनों से सुपरफास्ट का दर्जा हटा दिया जाएगा। इसके साथ ही इन ट्रेनों का किराया भी कम हो जाएगा, जिससे आम यात्रियों की जेब पर पड़ने वाला बोझ घटेगा। खास बात यह है कि ये सभी ट्रेनें अब सामान्य एक्सप्रेस की श्रेणी में चलेंगी और इनके नंबर भी बदल दिए जाएंगे।

रेलवे की यह नई व्यवस्था 13 से 16 अप्रैल के बीच लागू होगी। जिन ट्रेनों से सुपरफास्ट का टैग हटाया जा रहा है, उनमें प्रयागराज रामबाग से हावड़ा जाने वाली विभूति एक्सप्रेस और हावड़ा से प्रयागराज जंक्शन होकर कालका जाने वाली नेताजी एक्सप्रेस प्रमुख हैं। विभूति एक्सप्रेस रामबाग से हावड़ा के बीच 31 स्टेशनों पर रुकती है, जबकि नेताजी एक्सप्रेस का ठहराव प्रयागराज जंक्शन समेत कुल 38 स्टेशनों पर है।

इसके अलावा वाराणसी और लखनऊ के रास्ते चलने वाली हावड़ा-देहरादून कुंभ एक्सप्रेस, हावड़ा-देहरादून उपासना एक्सप्रेस और हावड़ा-जम्मूतवी हिमगिरि एक्सप्रेस जैसी ट्रेनों को भी सुपरफास्ट की लिस्ट से बाहर किया जा रहा है। इन ट्रेनों में ठहराव की संख्या काफी अधिक है, जिसके कारण इनका यात्रा समय सामान्य एक्सप्रेस ट्रेनों के बराबर हो गया था।

यात्रियों का कहना था कि जब ट्रेनें सुपरफास्ट की गति से नहीं चल रही हैं, तो अतिरिक्त शुल्क क्यों लिया जाए। रेलवे सुपरफास्ट ट्रेनों के नाम पर जनरल, स्लीपर और एसी कोच में अतिरिक्त चार्ज वसूलता है। उदाहरण के तौर पर, विभूति एक्सप्रेस के स्लीपर कोच में 30 रुपये और एसी थ्री व एसी टू में 45 रुपये का अतिरिक्त शुल्क लिया जाता था।

रेलवे का क्या मानना?

अब सुपरफास्ट का दर्जा हटने के बाद यह अतिरिक्त किराया नहीं देना होगा। रेलवे का मानना है कि इससे किराया तर्कसंगत होगा और यात्रियों को सीधी राहत मिलेगी। कुल मिलाकर, यह फैसला उन यात्रियों के लिए बड़ी खुशखबरी है जो रोजमर्रा या लंबी दूरी की यात्रा ट्रेन से करते हैं।

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