नई दिल्ली। भारतीय रेलवे में एक चौंकाने वाला घोटाला सामने आया है, जहां सेवानिवृत्त कर्मचारियों को सम्मान और सेवा की याद में दिए गए सोने की परत चढ़े “चांदी” के सिक्के/पदक वास्तव में मुख्य रूप से तांबे के बने पाए गए हैं।

एनएबीएल-मान्यता प्राप्त प्रयोगशाला और सरकारी लैब की जांच में पुष्टि हुई है कि इन पदकों में चांदी की मात्रा महज 0.23 प्रतिशत है, जबकि बाकी हिस्सा तांबा है। यह धोखाधड़ी पश्चिम मध्य रेलवे के भोपाल मंडल में 2023 से 2025 के बीच सेवानिवृत्त हुए हजारों कर्मचारियों को प्रभावित करती है।रेलवे ने इंदौर स्थित कंपनी से 23 जनवरी 2023 को 3,640 सिक्कों का ऑर्डर दिया था, जिसमें से 3,631 सिक्के भोपाल के जनरल स्टोर्स डिपो को सप्लाई किए गए। प्रत्येक सिक्के की अनुमानित कीमत लगभग ₹2,200-2,500 अधिक बताई गई थी, जिससे कुल घोटाले की राशि ₹90 लाख से अधिक होने का अनुमान है। रेलवे ने कंपनी के खिलाफ एफआईआर दर्ज कराई है और सप्लायर को ब्लैकलिस्ट करने की प्रक्रिया शुरू की गई है।

पूर्व मुख्य लोको निरीक्षक टी.के. गौतम ने कहा, “ये सिक्के पहले सरकारी टकसाल में ढाले जाते थे और इनका विशेष महत्व था। अब हर सेवानिवृत्त कर्मचारी चिंतित है कि कहीं उनका सम्मान भी नकली तो नहीं था।”इसी तरह, भोपाल कोच फैक्ट्री से जनवरी 2025 में 36 साल की सेवा के बाद सेवानिवृत्त हसरत जहां ने बताया, “मैंने अपना सिक्का ड्राइंग रूम में सावधानी से रखा था। हमें बताया गया था कि यह 99 प्रतिशत चांदी का है। अब रेलवे ने खुद एफआईआर दर्ज कराई है और कहा है कि यह तांबा है। मुझे धोखा महसूस हो रहा है। यह हमारी सेवा के प्रति सम्मान का प्रतीक होना चाहिए था।”

यह मामला तब उजागर हुआ जब कुछ सेवानिवृत्त कर्मचारियों ने सिक्कों को बेचने के लिए जौहरियों के पास ले जाया, जहां जांच में नकली होने का पता चला। रेलवे विजिलेंस विभाग ने तुरंत NABL लैब और सरकारी प्रयोगशाला में टेस्ट करवाए, जिनमें धोखाधड़ी साबित हुई।

Leave a reply

Please enter your name here
Please enter your comment!