

रायपुर: छत्तीसगढ़ के बहुचर्चित रामावतार जग्गी हत्याकांड में हाईकोर्ट ने अहम फैसला सुनाते हुए पूर्व मुख्यमंत्री अजीत जोगी के बेटे अमित जोगी को उम्रकैद की सजा दी है। कोर्ट ने स्पष्ट किया कि जब सभी आरोपियों पर एक समान अपराध और समान साक्ष्य हों, तो किसी एक आरोपी के साथ अलग व्यवहार नहीं किया जा सकता।
चीफ जस्टिस रमेश सिन्हा और जस्टिस अरविन्द वर्मा की स्पेशल डिवीजन बेंच ने अपने फैसले में कहा कि यदि सभी आरोपियों के खिलाफ एक जैसे सबूत मौजूद हैं, तो किसी एक को बरी करना और बाकी को उन्हीं आधारों पर दोषी ठहराना न्यायसंगत नहीं है, जब तक कि उसके लिए कोई ठोस और अलग कारण न हो।
गौरतलब है कि 4 जून 2003 को राजधानी रायपुर में एनसीपी नेता रामावतार जग्गी की गोली मारकर हत्या कर दी गई थी। इस मामले में कुल 31 लोगों को आरोपी बनाया गया था, जिनमें से दो लोग सरकारी गवाह बन गए थे। विशेष अदालत ने 2007 में संदेह का लाभ देते हुए अमित जोगी को बरी कर दिया था, जबकि अन्य आरोपियों को सजा सुनाई गई थी।
इस फैसले के खिलाफ जग्गी के बेटे सतीश जग्गी ने सुप्रीम कोर्ट में अपील दायर की थी। सुप्रीम कोर्ट ने मामले को दोबारा सुनवाई के लिए हाईकोर्ट भेज दिया था। इसके बाद हाईकोर्ट की डिवीजन बेंच ने मामले की विस्तृत सुनवाई करते हुए अब अमित जोगी को भी दोषी मानते हुए उम्रकैद की सजा सुनाई है।
मामले की जांच शुरू में राज्य पुलिस द्वारा की गई थी, लेकिन जांच में पक्षपात के आरोप लगने के बाद इसे सीबीआई को सौंप दिया गया। सीबीआई ने अपनी जांच में अमित जोगी समेत कई लोगों पर हत्या और आपराधिक साजिश के आरोप लगाए थे।हाईकोर्ट में सुनवाई के दौरान अभियोजन पक्ष ने तर्क दिया कि यह हत्या एक सुनियोजित साजिश का हिस्सा थी और प्रभाव के चलते सबूतों को प्रभावित किया गया। कोर्ट ने इन तर्कों पर विचार करते हुए फैसला सुनाया।
इस हत्याकांड में पहले ही 28 आरोपियों को दोषी ठहराया जा चुका है, जिनमें पुलिस अधिकारी, जनप्रतिनिधियों से जुड़े लोग और शूटर भी शामिल हैं। यह फैसला प्रदेश की राजनीति और न्यायिक प्रणाली के लिहाज से बेहद महत्वपूर्ण माना जा रहा है।

































