रायपुर। छत्तीसगढ़ सरकार ने राज्य की आबकारी नीति में बड़ा संशोधन करते हुए देशी एवं विदेशी मदिरा पर उत्पाद शुल्क की नई दरें लागू करने का निर्णय लिया है। वाणिज्यिक कर (आबकारी) विभाग द्वारा 30 जनवरी 2026 को जारी अधिसूचना के अनुसार यह संशोधित व्यवस्था 1 अप्रैल 2026 से प्रभावी होगी। सरकार का यह कदम राजस्व बढ़ाने और शराब बिक्री प्रणाली को अधिक व्यवस्थित व पारदर्शी बनाने की दिशा में महत्वपूर्ण माना जा रहा है।

छत्तीसगढ़ शासन के वाणिज्यिक कर (आबकारी) विभाग ने वर्ष 2026–27 के लिए मदिरा पर लगने वाले आबकारी शुल्क में व्यापक संशोधन किया है। इस संबंध में अधिसूचना छत्तीसगढ़ राजपत्र (असाधारण) में प्रकाशित कर दी गई है।राजपत्र में प्रकाशित अधिसूचना के अनुसार यह संशोधन छत्तीसगढ़ आबकारी अधिनियम, 1915 तथा छत्तीसगढ़ आबकारी नीति 2018 के अंतर्गत किया गया है। इसके तहत देशी मदिरा, विदेशी मदिरा (स्पिरिट), बीयर, वाइन, रेडी-टू-ड्रिंक एवं लो अल्कोहलिक बेवरेज की श्रेणियों में आबकारी शुल्क की दरें पुनर्निर्धारित की गई हैं।नई दरें 1 अप्रैल 2026 से प्रदेशभर में प्रभावशील होंगी।

नई व्यवस्था के अनुसार देशी मदिरा की मसाला (25.0 UP) एवं प्लेन (50.0 UP) किस्मों पर ₹435 प्रति प्रूफ लीटर ड्यूटी दर निर्धारित किया गया है। शक्ति (UP) में अंतर होने के बावजूद दोनों श्रेणियों के लिए समान शुल्क तय किया गया है, जिससे देशी शराब के दामों में बहुत अधिक उतार-चढ़ाव की संभावना नहीं है।विदेशी मदिरा के मामले में सरकार ने खुदरा मूल्य (MRP) के आधार पर स्लैब प्रणाली लागू की है। अब जितनी महंगी शराब होगी, उस पर उतना ही अधिक उत्पाद शुल्क देना होगा। नई दरों के अनुसार ₹900 तक की विदेशी शराब पर ₹475 प्रति प्रूफ लीटर,₹901 से ₹1250 तक की शराब पर ₹675 प्रति प्रूफ लीटर,₹1251 से ₹1850 तक की शराब पर ₹805 प्रति प्रूफ लीटर,₹1851 से ₹2400 तक की शराब पर ₹970 प्रति प्रूफ लीटर और आगे की उच्च श्रेणियों में शुल्क क्रमशः बढ़ते हुए ₹1400 प्रति प्रूफ लीटर तक निर्धारित किया गया है।यह शुल्क कार्टेलाइजेशन ड्यूटी/अन्य आबकारी शुल्क को छोड़कर लगाया जाएगा।यानी अंतिम खुदरा कीमत पर अन्य करों का अतिरिक्त प्रभाव भी रहेगा।

बीयर के लिए भी खुदरा मूल्य के आधार पर शुल्क तय किया गया है।₹100 तक की बीयर पर कम दर,₹101 से ₹120 तक मध्यम दर,और ₹121 या उससे अधिक कीमत वाली बीयर पर उच्च दर लागू होगी।इसके साथ ही कम अल्कोहल वाली बीयर (Low Alcoholic Beer) के लिए अलग से रियायती प्रावधान रखा गया है।विदेशी मदिरा स्पिरिट (वाइन) के मामले में भी मूल्य आधारित शुल्क प्रणाली अपनाई गई है। वहीं रेडी-टू-ड्रिंक एवं लो अल्कोहलिक बेवरेज (10% v/v तक) पर ₹475 प्रति प्रूफ लीटर की समान दर तय की गई है।


सरकार को उम्मीद है कि इस नीति से विशेष रूप से महंगी विदेशी शराब पर टैक्स से राजस्व में वृद्धि होगी। ठेकेदारों और उपभोक्ताओं को नई दरों के अनुसार अपने स्टॉक और मूल्य निर्धारण में बदलाव करना होगा, जिससे उपभोक्ताओं के लिए कीमतों में संभावित बढ़ोतरी हो सकती है।हालांकि, इस नीति के संभावित नकारात्मक प्रभावों का भी ध्यान रखना होगा, जैसे कि अवैध शराब की बिक्री और बिक्री मॉडल में बदलाव, जो असंतोष का कारण बन सकते हैं। शराब एक सामाजिक मुद्दा भी है, और यदि उच्च शुल्क से उसका उपभोग कम होता है तो इसे सकारात्मक रूप से देखा जा सकता है। छत्तीसगढ़ सरकार की यह नई आबकारी नीति राजस्व वृद्धि के लिए एक महत्वपूर्ण कदम है, लेकिन इसकी प्रभावशीलता इस बात पर निर्भर करेगी कि सरकार नए राजस्व का उपयोग जनकल्याण और सामाजिक विकास में कैसे करती है।

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