

प्रयागराज | 31 मार्च 2026। इलाहाबाद हाई कोर्ट ने एक महत्वपूर्ण आदेश में स्पष्ट किया है कि स्त्रीधन पर पत्नी का पूरा अधिकार होता है। कोर्ट ने कहा कि पत्नी को अपने स्त्रीधन का उपयोग या निपटान अपनी इच्छा अनुसार करने का पूरा अधिकार है और इसे वापस लेने पर कोई आपराधिक मामला नहीं बनता। इसके तहत ट्रायल कोर्ट द्वारा जारी समन आदेश को हाई कोर्ट ने रद्द कर दिया।
हाई कोर्ट का फैसला
हाई कोर्ट ने अपने आदेश में कहा कि विवाह से पहले, विवाह के समय या विवाह के बाद महिला को जो भी संपत्ति दी जाती है, वह स्त्रीधन होती है और उस पर केवल महिला का ही अधिकार रहता है। कोर्ट ने स्पष्ट किया कि पत्नी अपने स्त्रीधन का उपयोग स्वतंत्र रूप से कर सकती है और इसके खिलाफ पति या अन्य किसी व्यक्ति द्वारा आपराधिक कार्रवाई नहीं की जा सकती।
पति के दावे पर कोर्ट ने लगाई रोक
मामले में पति ने आरोप लगाया था कि पत्नी और उसके परिवार के लोग उसके घर में घुसकर नकदी, आभूषण और घरेलू सामान ले गए। इसके आधार पर ट्रायल कोर्ट ने पत्नी और अन्य आरोपियों को समन जारी किया था। हाई कोर्ट ने इस समन को रद्द करते हुए कहा कि स्त्रीधन की संपत्ति पर पत्नी का नैतिक दायित्व है कि जरूरत पड़ने पर पति को इसका उपयोग या मूल्य लौटाए, लेकिन इसका उल्लंघन आपराधिक अपराध नहीं बनता।
धारा 405 और 406 IPC का स्पष्ट व्याख्यान
हाई कोर्ट ने कहा कि भारतीय दंड संहिता की धारा 405 और 406 केवल उस स्थिति में लागू होती है जब किसी को सौंपी गई संपत्ति का व्यक्ति बेईमानी से दुरुपयोग करे। स्त्रीधन के मामले में महिला स्वयं उसकी मालिक होती है, इसलिए इसके खिलाफ कोई आपराधिक मामला नहीं बनता। कोर्ट ने ट्रायल कोर्ट को आदेश दिया कि कानून की सही समझ के बिना समन जारी करना गलत है।

































