AAP Politics : आम आदमी पार्टी ने अपने राज्यसभा सांसद राघव चड्ढा को डिप्टी लीडर पद से हटा दिया है। इस फैसले के बाद पार्टी के भीतर मतभेद खुलकर सामने आ गए हैं और सियासी हलकों में चर्चा तेज हो गई है।

पार्टी के कुछ नेताओं ने आरोप लगाया है कि राघव चड्ढा संसद में केवल पीआर से जुड़े मुद्दों को उठाते थे, जबकि खुद चड्ढा का कहना है कि उन्हें जानबूझकर ‘चुप कराया गया’ क्योंकि वे आम लोगों से जुड़े मुद्दों को लगातार उठाते रहे।

कभी करीबी, अब विवाद के केंद्र में

राघव चड्ढा को अरविंद केजरीवाल का करीबी माना जाता रहा है। दिल्ली और पंजाब की राजनीति में उनकी अहम भूमिका रही है और कई बड़े फैसलों में उनकी राय को महत्व दिया जाता था।

हालांकि अब पार्टी के भीतर बढ़ते मतभेदों के चलते वे खुद विवादों के केंद्र में आ गए हैं।

संसद में उठाए गए प्रमुख मुद्दे

पितृत्व अवकाश और साझा जिम्मेदारी

राघव चड्ढा ने संसद में पितृत्व अवकाश को कानूनी अधिकार बनाने की मांग उठाई थी। उनका कहना था कि बच्चों की देखभाल केवल महिलाओं की जिम्मेदारी नहीं होनी चाहिए, बल्कि इसे साझा जिम्मेदारी के रूप में देखा जाना चाहिए।

मेट्रो शहरों में ट्रैफिक संकट

उन्होंने दिल्ली, मुंबई, बेंगलुरु और चेन्नई जैसे शहरों में बढ़ते ट्रैफिक जाम को गंभीर समस्या बताया। उनके मुताबिक, लोग हर साल सैकड़ों घंटे जाम में फंसे रहते हैं, जिससे उत्पादकता और जीवन गुणवत्ता प्रभावित होती है।

टेलीकॉम प्लान और डेटा नीति पर सवाल

चड्ढा ने टेलीकॉम कंपनियों की 28 दिन वाले रिचार्ज प्लान और ‘यूज इट ऑर लूज इट’ डेटा नीति पर भी सवाल उठाए। उन्होंने कहा कि उपभोक्ताओं से पूरे महीने का पैसा लिया जाता है, लेकिन सेवा 28 दिन की ही मिलती है, जो उपभोक्ताओं के साथ अन्याय है।

पीरियड हेल्थ और बुनियादी सुविधाएं

उन्होंने मासिक धर्म से जुड़ी समस्याओं और स्कूलों में बुनियादी सुविधाओं की कमी को भी प्रमुखता से उठाया। उनका कहना था कि यह व्यक्तिगत नहीं, बल्कि सिस्टम की विफलता है।

एयरपोर्ट पर महंगे खाने का मुद्दा

एयरपोर्ट पर खाने की ऊंची कीमतों को लेकर भी उन्होंने आवाज उठाई और इसे यात्रियों के लिए जरूरी सुविधा बताया। उन्होंने सस्ते फूड विकल्प उपलब्ध कराने की मांग की, जिस पर सरकार ने ‘उड़ान यात्री कैफे’ जैसी पहल को आगे बढ़ाया।

राइट टू रिकॉल की मांग

राजनीतिक सुधार की दिशा में उन्होंने ‘राइट टू रिकॉल’ का समर्थन किया। उनका कहना था कि यदि जनता नेता चुन सकती है, तो उसे हटाने का अधिकार भी होना चाहिए।

गिग वर्कर्स के अधिकार

गिग इकॉनमी से जुड़े कामगारों के लिए बेहतर वेतन, सुरक्षित कामकाजी माहौल और बुनियादी सुविधाओं की मांग भी उन्होंने उठाई।

आगे क्या संकेत

राघव चड्ढा को पद से हटाए जाने के बाद यह साफ हो गया है कि पार्टी के भीतर मतभेद गहराते जा रहे हैं। अब देखना होगा कि यह विवाद आगे किस दिशा में जाता है और इसका राजनीतिक असर कितना व्यापक होता है।

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