


भोपाल : में सोमवार और मंगलवार की दरमियानी रात आसमान में एक बेहद दुर्लभ और आकर्षक दृश्य देखने को मिला। चांद के चारों ओर बना गोल और चमकदार घेरा लोगों के लिए कौतूहल का केंद्र बन गया। इस खगोलीय घटना को वैज्ञानिक भाषा में ‘लूनर हेलो’ या ‘मून हेलो’ कहा जाता है।
इस खूबसूरत दृश्य को कई लोगों ने अपने मोबाइल और कैमरों में कैद किया।
कैसे बनता है यह अद्भुत घेरा
विशेषज्ञों के अनुसार, यह घटना तब होती है जब चांद की रोशनी ऊंचाई पर मौजूद पतले बादलों में फैले बर्फ के सूक्ष्म कणों से होकर गुजरती है। ये बर्फीले कण प्रिज्म की तरह काम करते हैं और रोशनी को एक निश्चित कोण पर मोड़ देते हैं, जिससे चांद के चारों ओर गोलाकार घेरा दिखाई देता है।
रोशनी और क्रिस्टल का वैज्ञानिक संबंध
वायुमंडल में मौजूद ये बर्फीले कण अलग अलग दिशाओं में फैले रहते हैं, लेकिन जब सही कोण पर स्थित कणों से रोशनी गुजरती है, तभी यह घेरा स्पष्ट रूप से दिखाई देता है। यही वजह है कि हर बार यह दृश्य नजर नहीं आता, बल्कि खास परिस्थितियों में ही बनता है।
रंगों का मनमोहक प्रभाव
कई बार इस घेरे के अंदर हल्की लालिमा और बाहरी किनारों पर नीले रंग की झलक भी देखी जाती है। यह प्रभाव प्रकाश के अपवर्तन और विभाजन के कारण बनता है, जिससे यह नजारा और भी आकर्षक लगने लगता है।
आकार को प्रभावित करने वाले कारक
वैज्ञानिकों का कहना है कि इस घेरे का आकार बर्फीले कणों के आकार और चांद की स्थिति पर निर्भर करता है। छोटे क्रिस्टल होने पर घेरा बड़ा दिखाई देता है, जबकि चांद यदि क्षितिज के करीब हो, तो यह घेरा थोड़ा अंडाकार भी नजर आ सकता है।
विज्ञान और सुंदरता का अनोखा संगम
यह खगोलीय घटना न केवल वैज्ञानिक दृष्टि से रोचक है, बल्कि आम लोगों के लिए भी प्रकृति की खूबसूरती का शानदार उदाहरण है। ऐसे दुर्लभ नजारे यह याद दिलाते हैं कि आसमान में हर पल कुछ नया और अद्भुत घटित होता रहता है।

































