रायपुर/बस्तर:  प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी ने रविवार 8 नवंबर 2026 को छत्तीसगढ़ के बस्तर जिले के करनपुर स्थित सीआरपीएफ कैंप में सुरक्षा बलों के जवानों के साथ दीपावली का पर्व मनाया। इस दौरान उन्होंने जवानों को देश का परिवार बताते हुए उनके त्याग, समर्पण, साहस और सेवा भावना की सराहना की। प्रधानमंत्री ने कहा कि देश की सीमाओं से लेकर आंतरिक सुरक्षा तक राष्ट्र की रक्षा में जुटे सभी जवान उनके परिवार का हिस्सा हैं। देश उनके बलिदान और सेवाओं का सदैव ऋणी रहेगा।

प्रधानमंत्री ने कहा कि दीपावली खुशियों और परिवार के साथ मिलने-जुलने का त्योहार है। इस अवसर पर लोग दूर-दूर से अपने घर लौटते हैं और परिजनों के साथ खुशियां साझा करते हैं। लेकिन उन्होंने इस पर्व को जवानों के बीच मनाना चुना, क्योंकि देश की सुरक्षा में तैनात वीर सैनिक और सुरक्षाकर्मी भी उनके परिवार का अभिन्न हिस्सा हैं।

बस्तर में बदलाव का श्रेय जवानों को

पीएम मोदी ने अपने संबोधन में बस्तर के बदलते हालात का विशेष रूप से उल्लेख किया। उन्होंने कहा कि यह वही धरती है, जहां कभी नक्सली हिंसा और आतंक का प्रभाव था, लेकिन सुरक्षा बलों के साहस, त्याग और निरंतर प्रयासों से हालात में बड़ा बदलाव आया है। आज इस क्षेत्र में विकास की नई संभावनाएं सामने आ रही हैं।

प्रधानमंत्री ने कहा कि बस्तर में आए बदलाव के पीछे लाखों वीर जवानों और सुरक्षाकर्मियों का महत्वपूर्ण योगदान है। वह 140 करोड़ देशवासियों की ओर से जवानों के प्रति आभार व्यक्त करने और उनके बलिदान को नमन करने पहुंचे हैं।

उन्होंने 2026 की दीपावली को विशेष बताते हुए कहा कि दशकों से नक्सलवाद और माओवादी हिंसा के खिलाफ जारी लड़ाई में देश ने निर्णायक सफलता हासिल की है। यह पहली दीपावली है, जब देश का हर जिला नक्सलवाद से मुक्त होने की स्थिति में पहुंचा है और करोड़ों देशवासी नक्सली हिंसा के भय से बाहर निकलकर बेहतर भविष्य की उम्मीद कर रहे हैं।

सीआरपीएफ, कोबरा और राज्य पुलिस के योगदान को सराहा

प्रधानमंत्री ने आंतरिक सुरक्षा की जिम्मेदारी निभाने वाले विभिन्न सुरक्षा बलों के योगदान की सराहना की। उन्होंने सीआरपीएफ, कोबरा, बीएसएफ, आईटीबीपी, एसएसबी, आईआरबी और राज्य पुलिस के जवानों का विशेष रूप से उल्लेख किया।

उन्होंने बस्तर फाइटर्स के कमांडो और महिला सुरक्षाकर्मियों के साहस तथा समर्पण की भी प्रशंसा की। पीएम मोदी ने कहा कि इन जवानों ने देश की एकता और अखंडता की रक्षा के लिए असाधारण त्याग किया है। अनेक जवानों ने अपने प्राणों की आहुति देकर देश की आंतरिक सुरक्षा को मजबूत किया है। राष्ट्र उनके बलिदान को हमेशा याद रखेगा।

कभी 230 से अधिक जिले थे नक्सलवाद से प्रभावित

नक्सलवाद के खिलाफ संघर्ष की चुनौतियों को याद करते हुए प्रधानमंत्री ने कहा कि एक समय देश के करीब 20 राज्यों के 230 से अधिक जिले नक्सली गतिविधियों से प्रभावित थे। इन क्षेत्रों में भय और हिंसा का माहौल था। कई इलाकों में शाम होते ही जनजीवन ठहर जाता था। नक्सली आतंक के कारण लोग सामान्य जीवन जीने और लोकतांत्रिक अधिकारों का इस्तेमाल करने से भी डरते थे।

उन्होंने कहा कि ऐसे कठिन हालात में सुरक्षा बलों ने लगातार मोर्चा संभाले रखा। जवानों के साहस, संघर्ष और बलिदान ने देश की आंतरिक सुरक्षा को मजबूत बनाने में अहम भूमिका निभाई।

जवानों के परिवारों के त्याग को भी किया याद

प्रधानमंत्री मोदी ने कहा कि देश की सुरक्षा में तैनात जवानों का त्याग केवल उनका व्यक्तिगत त्याग नहीं है, बल्कि उनके परिवार भी इस जिम्मेदारी में बराबर के भागीदार हैं। जब कोई जवान देश की रक्षा के लिए घर से दूर रहता है, तब उसका परिवार भी कई तरह की चुनौतियों और भावनात्मक परिस्थितियों का सामना करता है।उन्होंने कहा कि जवानों की सतर्कता और समर्पण के कारण ही देशवासी सुरक्षित वातावरण में त्योहार मना पाते हैं। इसलिए जवानों के साथ-साथ उनके परिवारों का योगदान भी सम्मान और सराहना का हकदार है।

प्रधानमंत्री ने कहा कि देश की रक्षा में जुटे वीर जवानों का साहस, त्याग और सेवा भाव आने वाली पीढ़ियों के लिए प्रेरणा बना रहेगा। बस्तर में जवानों के साथ दीपावली मनाकर उन्होंने सुरक्षा बलों के प्रति पूरे देश की कृतज्ञता और सम्मान का संदेश दिया।

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