
नई दिल्ली: भारत निर्वाचन आयोग ने आगामी चुनावी प्रक्रियाओं को ध्यान में रखते हुए छह राज्यों और केंद्र शासित प्रदेशों में मतदाता सूची के विशेष संक्षिप्त पुनरीक्षण (Special Summary Revision-SSR) का आदेश जारी किया है। इस पुनरीक्षण के लिए 1 जनवरी 2027 को अर्हता तिथि निर्धारित किया गया है। इसके तहत मतदाता सूची को अद्यतन करने के साथ पात्र नागरिकों के नाम जोड़ने और अपात्र नामों को हटाने की प्रक्रिया पूरी की जाएगी।
इन छह राज्यों और केंद्र शासित प्रदेशों में होगा पुनरीक्षण
निर्वाचन आयोग के जारी आदेश के अनुसार अरुणाचल प्रदेश, चंडीगढ़, दादरा एवं नगर हवेली और दमन एवं दीव, मिजोरम, ओडिशा तथा सिक्किम में SSR की प्रक्रिया संचालित की जाएगी।इस प्रक्रिया के तहत 1 जनवरी 2027 तक 18 वर्ष की आयु पूरी करने वाले युवा मतदाता सूची में अपना नाम जुड़वा सकेंगे। इसके अलावा 1 अप्रैल, 1 जुलाई और 1 अक्टूबर 2027 को 18 वर्ष की आयु पूरी करने वाले युवा भी अग्रिम आवेदन कर सकते हैं। इससे नए पात्र मतदाताओं को सूची में शामिल होने का अवसर मिलेगा।
इन राज्यों में बाद में घोषित होगा कार्यक्रम
आयोग ने स्पष्ट किया है कि जिन राज्यों और केंद्र शासित प्रदेशों में विशेष गहन पुनरीक्षण (SIR) की प्रक्रिया जारी है अथवा पूरी हो चुकी है, वहां SSR का कार्यक्रम अलग से घोषित किया जाएगा। इनमें आंध्र प्रदेश, हरियाणा, झारखंड, कर्नाटक, महाराष्ट्र, मेघालय, नागालैंड, दिल्ली, त्रिपुरा और तेलंगाना शामिल हैं।वहीं, हिमाचल प्रदेश, जम्मू-कश्मीर और लद्दाख में मौसम की परिस्थितियों को देखते हुए पुनरीक्षण की तारीखें बाद में निर्धारित की जाएंगी।
यह रहेगा मतदाता सूची पुनरीक्षण का कार्यक्रम
निर्वाचन आयोग ने SSR के लिए चरणबद्ध कार्यक्रम जारी किया है। इसके अनुसार 20 नवंबर 2026 तक मतदान केंद्रों का युक्तिकरण किया जाएगा। इसके बाद 30 नवंबर 2026 को एकीकृत प्रारूप मतदाता सूची (इंटीग्रेटेड ड्राफ्ट रोल) का प्रकाशन होगा।मतदाता सूची पर दावा और आपत्ति दर्ज कराने की प्रक्रिया 30 नवंबर से 30 दिसंबर 2026 तक चलेगी। सभी दावों और आपत्तियों के निराकरण के बाद 21 जनवरी 2027 को अंतिम मतदाता सूची प्रकाशित की जाएगी।पुनरीक्षण की प्रक्रिया पारदर्शी और निर्धारित समयसीमा में पूरी कराने के लिए निर्वाचन आयोग ने अधिकारियों को सख्त निर्देश दिए हैं। जनप्रतिनिधित्व अधिनियम, 1950 की धारा 13CC के तहत मतदाता सूची तैयार करने से जुड़े अधिकारियों को निर्वाचन आयोग में प्रतिनियुक्ति पर माना जाएगा।आयोग ने मुख्य सचिवों को निर्देशित किया है कि मुख्य निर्वाचन पदाधिकारी (CEO), जिला निर्वाचन पदाधिकारी (DEO), निर्वाचक रजिस्ट्रीकरण अधिकारी (ERO) और बूथ लेवल अधिकारी (BLO) के पद रिक्त नहीं रहें। पुनरीक्षण के दौरान संबंधित अधिकारियों का तबादला निर्वाचन आयोग की अनुमति के बिना नहीं किया जा सकेगा।
निर्वाचक रजिस्ट्रीकरण अधिकारियों की जिम्मेदारी होगी कि कोई भी पात्र नागरिक मतदाता सूची में नाम दर्ज कराने से वंचित न रहे और किसी अपात्र व्यक्ति का नाम सूची में शामिल न हो। आयोग ने पूरी प्रक्रिया को निष्पक्षता, पारदर्शिता और निर्धारित समयसीमा के भीतर पूरा करने पर जोर दिया है।











