
रायपुर : 15 अगस्त से 2 अक्टूबर तक चले साइबर सुरक्षा जागरूकता अभियान के जरिए पुलिस ने प्रदेश में करीब दो करोड़ लोगों तक पहुंचने का दावा किया। स्कूलों, कॉलेजों, बैंकों और सामाजिक समूहों के बीच कार्यक्रम आयोजित कर लोगों को ऑनलाइन धोखाधड़ी से बचने के तरीके बताए गए। इसके बावजूद साइबर ठगी के मामले सामने आते रहे। अभियान के दौरान रायपुर से साइबर क्राइम पोर्टल पर 955 से अधिक शिकायतें दर्ज की गईं। इनमें डिजिटल अरेस्ट, एपीके फाइल और ठगी के अन्य तरीके शामिल रहे।
प्रदेशभर में इस अवधि के दौरान साइबर ठगी से जुड़ी 5,220 शिकायतें पोर्टल पर दर्ज हुईं। इनमें लगभग 20 प्रतिशत मामलों में एफआईआर दर्ज की गई। रायपुर में शिकायतों के करीब 21 प्रतिशत मामलों में केस दर्ज हुआ, जबकि शेष मामलों की जांच जारी है।
पुलिस के अनुसार, रायपुर पुलिस कमिश्नरेट क्षेत्र में 4.12 लाख लोगों और ग्रामीण इलाकों में 50 हजार से अधिक लोगों को साइबर सुरक्षा के प्रति जागरूक किया गया। इसके लिए अलग-अलग वर्गों को ध्यान में रखकर कार्यक्रम चलाए गए। गौरतलब है कि रायपुर में हर साल साइबर ठगी की चार हजार से अधिक शिकायतें आती है, लेकिन इनमें केवल 100 से 120 मामलों में एफआईआर दर्ज होने की जानकारी है।
डिजिटल अरेस्ट के नाम पर लाखों की ठगी
नर्मदापारा की 62 वर्षीय रीता खन्ना को ठग ने खुद को महाराष्ट्र में तैनात एनआईए अधिकारी विक्रम सिंह बताया। मनी लॉन्ड्रिंग के मामले में फंसाने की धमकी देकर उन्हें पांच दिन तक वीडियो कॉल पर रखा गया और इस दौरान 7 लाख रुपए ठग लिए गए।
इसी तरह उरकुरा के 64 वर्षीय कारोबारी देवसिंह साहू और उनकी पत्नी को फर्जी सीबीआई तथा आईपीएस अधिकारी बनकर डराया गया। उन्हें 6.80 करोड़ रुपए की मनी लॉन्ड्रिंग में फंसाने की धमकी दी गई। ठगों ने 44 दिन तक उन्हें अपने जाल में उलझाए रखा और 8.50 लाख रुपए ऐंठ लिए। रकम जुटाने के लिए परिवार को जेवर तक बेचने पड़े।
दूसरी ओर, एक कारोबारी को शादी के निमंत्रण और एक रिटायर्ड बैंककर्मी को पेंशन कार्ड के नाम पर एपीके फाइल भेजी गई। फाइल डाउनलोड करने के बाद दोनों के बैंक खातों से कुल 8.15 लाख रुपए निकाल लिए गए।
अलग-अलग वर्गों के लिए अलग जागरूकता कार्यक्रम
अभियान में लोगों की जरूरत और साइबर अपराध के संभावित तरीकों के आधार पर जागरूकता कार्यक्रम आयोजित किए गए।
- स्कूल और कॉलेज: डिजिटल सतर्कता तथा साइबर सुरक्षा की बुनियादी जानकारी।
- बैंक और वित्तीय संस्थान: वित्तीय धोखाधड़ी और यूपीआई लेन-देन में सावधानी।
- वरिष्ठ नागरिक: डिजिटल अरेस्ट और फर्जी अधिकारियों की कॉल से बचाव।
- महिला समूह: स्मार्टफोन की गोपनीयता और सुरक्षित इंटरनेट इस्तेमाल।
- युवा: नौकरी के नाम पर ठगी और फिशिंग से सतर्कता।
- आम नागरिक: निजी डेटा और सोशल मीडिया खातों की सुरक्षा।
- गांव और स्थानीय निकाय: साइबर अपराध से बचाव के लिए सामूहिक संकल्प।
साइबर अपराध के मास्टरमाइंड तक पहुंचना जरूरी
मुकेश चौधरी, साइबर क्राइम एक्सपर्ट
साइबर ठगी के मामलों में केवल बैंक खाते उपलब्ध कराने वालों पर कार्रवाई करना पर्याप्त नहीं है। इससे अपराध के पीछे सक्रिय मुख्य आरोपियों तक पहुंचने में मुश्किल आती है। डिजिटल अरेस्ट के मामलों में ठग फर्जी नोटिस और जांच एजेंसियों का भय दिखाकर लोगों से रकम वसूलते है।
ऐसे अपराधों पर अंकुश लगाने के लिए पैसों के लेन-देन की कड़ियों, डिजिटल साक्ष्यों और विदेश से जुड़े नेटवर्क की गहन जांच जरूरी है। साथ ही, संबंधित एजेंसियों के बीच बेहतर तालमेल, आईटी एक्ट की समीक्षा और नियमित जनजागरूकता पर भी जोर देना होगा।




















