
नई दिल्ली। भारतीय नौसेना की विमानवाहक पोत आधारित युद्धक क्षमता को मजबूत करने की दिशा में राफेल-M लड़ाकू विमानों के परीक्षण महत्वपूर्ण माने जा रहे हैं। गोवा में भारतीय नौसेना के विमानवाहक पोत INS विक्रांत के साथ राफेल-M (मरीन) लड़ाकू विमानों के परीक्षण किए जा रहे हैं। इनका उद्देश्य विमानवाहक पोत से उड़ान भरने और उस पर सुरक्षित लैंडिंग करने की क्षमता का आकलन करना है। परीक्षणों से यह समझने में मदद मिलेगी कि राफेल-M भारतीय नौसेना के विमानवाहक पोतों के संचालन के अनुकूल किस तरह काम करता है।
भारत ने फ्रांस से नौसेना के लिए 26 राफेल-M लड़ाकू विमान खरीदने का समझौता किया है। इस बेड़े में 22 सिंगल-सीटर लड़ाकू विमान और चार ट्विन-सीटर विमान शामिल हैं। इन विमानों की आपूर्ति निर्धारित कार्यक्रम के अनुसार पूरी होने के बाद नौसेना की समुद्री हवाई ताकत को मजबूती मिलने की उम्मीद है।
INS विक्रांत की युद्धक क्षमता को मिलेगा सहारा
राफेल-M को विशेष रूप से विमानवाहक पोत से संचालन के लिए तैयार किया गया है। इसकी मजबूत संरचना, विशेष लैंडिंग गियर और लैंडिंग हुक इसे समुद्र में तैनात विमानवाहक पोत पर उतरने में सक्षम बनाते हैं। विमान को पोत पर उतरते समय अरेस्टर वायर की मदद से कम दूरी में रोकना होता है, इसलिए कैरियर के साथ उसकी अनुकूलता का परीक्षण बेहद अहम है।
INS विक्रांत और INS विक्रमादित्य जैसे विमानवाहक पोतों से लड़ाकू विमानों का संचालन भारतीय नौसेना की समुद्री सुरक्षा रणनीति का महत्वपूर्ण हिस्सा है। राफेल-M के शामिल होने से हवाई निगरानी, समुद्री क्षेत्रों में सुरक्षा और आवश्यकता पड़ने पर दुश्मन के हवाई तथा समुद्री लक्ष्यों के खिलाफ कार्रवाई की क्षमता को बढ़ावा मिल सकता है।
आधुनिक रडार और इलेक्ट्रॉनिक युद्ध प्रणाली से लैस
फ्रांस की कंपनी दसॉल्ट एविएशन द्वारा निर्मित राफेल-M दो इंजनों वाला मल्टीरोल लड़ाकू विमान है। इसकी अधिकतम गति लगभग 1.8 मैक बताई जाती है। इसमें साफ्रान के दो M88 टर्बोफैन इंजन लगे हैं। विमान को हवाई युद्ध, निगरानी और विभिन्न प्रकार के सामरिक अभियानों के लिए तैयार किया गया है।
इसमें थेल्स का RBE2 AESA रडार है, जो हवाई और सतह के लक्ष्यों का पता लगाने तथा उन्हें ट्रैक करने में मदद करता है। इसके साथ SPECTRA इलेक्ट्रॉनिक वॉरफेयर प्रणाली भी है, जो संभावित खतरों की पहचान, चेतावनी और इलेक्ट्रॉनिक प्रतिरोध में सहायता करती है। ये प्रणालियां पायलट को जटिल युद्ध परिस्थितियों में परिस्थितियों का आकलन करने और मिशन को प्रभावी ढंग से संचालित करने में मदद करती हैं।
मिसाइलों और लंबी दूरी के अभियानों की क्षमता
राफेल परिवार के विमानों में Meteor और MICA जैसी हवा से हवा में मार करने वाली मिसाइलों का इस्तेमाल किया जा सकता है। Meteor को दृश्य सीमा से परे स्थित हवाई लक्ष्यों को निशाना बनाने के लिए विकसित किया गया है। इसके अलावा SCALP जैसी हवा से सतह पर मार करने वाली लंबी दूरी की क्रूज मिसाइल और 30 मिलीमीटर की तोप भी राफेल परिवार की प्रमुख क्षमताओं में शामिल हैं।
उपयुक्त कॉन्फिगरेशन में एंटी-शिप हथियारों का भी इस्तेमाल किया जा सकता है। हालांकि, भारतीय नौसेना के राफेल-M विमानों में कौन-कौन से हथियार शामिल होंगे, यह संबंधित अनुबंध, एकीकरण और परिचालन प्रमाणन पर निर्भर करेगा। विमान में हवा में ईंधन भरने की क्षमता भी है, जिससे मिशन की अवधि और परिचालन पहुंच बढ़ाई जा सकती है।
भारत-फ्रांस के बीच करीब 63 हजार करोड़ रुपये का समझौता
भारत और फ्रांस के बीच 28 अप्रैल 2025 को भारतीय नौसेना के लिए 26 राफेल-M विमानों की खरीद का समझौता हुआ था। इसकी अनुमानित लागत करीब 63,000 करोड़ रुपये बताई गई। इस खरीद में 22 सिंगल-सीटर लड़ाकू विमान और चार ट्विन-सीटर विमान शामिल हैं। विमानों की आपूर्ति का निर्धारित कार्यक्रम नौसेना की भविष्य की परिचालन आवश्यकताओं को ध्यान में रखकर तैयार किया गया है।
युद्धपोत मंगरोल भी नौसेना में शामिल
इसी बीच भारतीय नौसेना में उथले समुद्री क्षेत्रों में पनडुब्बियों का पता लगाने और उनसे निपटने की क्षमता वाले युद्धपोत ‘मंगरोल’ को भी शामिल किए जाने की जानकारी सामने आई है। ऐसे पोत तटीय और उथले समुद्री क्षेत्रों में पनडुब्बी रोधी अभियानों में महत्वपूर्ण भूमिका निभा सकते हैं।
कुल मिलाकर, राफेल-M के परीक्षण और नौसेना में नए युद्धपोतों की तैनाती भारत की समुद्री सुरक्षा क्षमताओं को विकसित करने की व्यापक प्रक्रिया का हिस्सा हैं। राफेल-M की वास्तविक परिचालन क्षमता विमानवाहक पोतों के साथ सफल अनुकूलता, हथियार प्रणालियों के एकीकरण और नौसेना के अन्य प्लेटफॉर्म के साथ समन्वय पर निर्भर करेगी।
तथ्य-जांच के लिए स्रोत: राफेल-M परीक्षण और डिलीवरी की समयसीमा संबंधी जानकारी 21–22 अक्टूबर 2026 की रिपोर्टों पर आधारित है।




















