अंबिकापुर: छत्तीसगढ़ राज्य के जनजातीय अंचलों के विद्यार्थियों में अंग्रेजी संप्रेषण कौशल विकसित करने तथा विशेष रूप से जनजातीय छात्र-छात्राओं के अकादमिक सशक्तिकरण एवं सर्वांगीण विकास के उद्देश्य से छत्तीसगढ़ शासन की महत्वाकांक्षी योजना के अंतर्गत एकदिवसीय प्रशिक्षण कार्यशाला का आयोजन राजीव गांधी स्नातकोत्तर महाविद्यालय, अंबिकापुर में किया गया। यह प्रशिक्षण कार्यक्रम प्रदेश के जनजातीय क्षेत्रों के चयनित 148 महाविद्यालयों में पायलट प्रोजेक्ट के रूप में लागू की जा रही योजना के प्रभावी क्रियान्वयन की दिशा में एक महत्वपूर्ण पहल है।

यह महत्वाकांक्षी योजना प्रदेश के माननीय मुख्यमंत्री  विष्णु देव साय तथा माननीय उच्च शिक्षा मंत्री  टंक राम वर्मा की प्रेरणा और छत्तीसगढ़ शासन के उच्च शिक्षा सचिव  अविनाश चंपावत एवं आयुक्त  रीता यादव के मार्गदर्शन में संचालित की जा रही है। योजना का प्रमुख उद्देश्य जनजातीय विद्यार्थियों में अंग्रेजी भाषा के प्रति आत्मविश्वास बढ़ाना, उनके संप्रेषण कौशल को विकसित करना तथा उच्च शिक्षा के क्षेत्र में उन्हें अधिक सक्षम एवं आत्मनिर्भर बनाना है।

मां सरस्वती के पूजन के साथ हुआ शुभारंभ

कार्यशाला का शुभारंभ मुख्य अतिथियों द्वारा मां सरस्वती के छायाचित्र पर माल्यार्पण एवं पूजन के साथ हुआ। कार्यक्रम की अध्यक्षता राजीव गांधी स्नातकोत्तर महाविद्यालय, अंबिकापुर के प्राचार्य  अनिल कुमार सिन्हा ने की।
कार्यक्रम में मुख्य अतिथि के रूप में डॉ. एस. गुप्ता, संयुक्त संचालक, रूसा एवं RQIACC, उच्च शिक्षा संचालनालय उपस्थित रहे। विशिष्ट अतिथियों में डॉ. सोमाली गुप्ता, राज्य समन्वयक, अंग्रेजी संप्रेषण प्रशिक्षण कार्यक्रम तथा प्रोफेसर बी.के. पटेल, प्राचार्य, शासकीय महाविद्यालय जांजगीर एवं नोडल अधिकारी, बिलासपुर शामिल रहे। कार्यक्रम का संचालन डॉ. एस.एन. पांडेय, संभाग समन्वयक द्वारा किया गया।

स्वागत उद्बोधन में महाविद्यालय के प्राचार्य श्री सिन्हा ने अतिथियों एवं प्रतिभागियों का स्वागत करते हुए कार्यशाला के महत्व पर प्रकाश डाला। इसके पश्चात प्रोफेसर बी.के. पटेल ने पायलट प्रोजेक्ट की विस्तृत रूपरेखा प्रस्तुत की तथा इसके उद्देश्यों, कार्ययोजना और महाविद्यालयों में प्रभावी क्रियान्वयन के विभिन्न पहलुओं की जानकारी दी।

डॉ. सोमाली गुप्ता ने अंग्रेजी संप्रेषण कौशल की आवश्यकता और वर्तमान उच्च शिक्षा व्यवस्था में इसकी प्रासंगिकता को रेखांकित किया। उन्होंने विशेष रूप से जनजातीय विद्यार्थियों के लिए अंग्रेजी भाषा में दक्षता विकसित करने को शैक्षणिक अवसरों के विस्तार और आत्मविश्वास निर्माण की दिशा में महत्वपूर्ण बताया।
मुख्य अतिथि डॉ. एस. गुप्ता ने अपने संबोधन में इस पायलट प्रोजेक्ट के महत्व को स्पष्ट करते हुए कहा कि जनजातीय विद्यार्थियों को गुणवत्तापूर्ण उच्च शिक्षा के अवसर उपलब्ध कराने, उनकी भाषायी क्षमताओं को विकसित करने तथा उन्हें व्यापक शैक्षणिक एवं व्यावसायिक अवसरों से जोड़ने में यह योजना महत्वपूर्ण भूमिका निभा सकती है।

संभागीय मास्टर ट्रेनर्स ने दिया प्रशिक्षण
स्वागत समारोह के पश्चात अंग्रेजी संप्रेषण प्रशिक्षण कार्यक्रम के अंतर्गत संभागीय मास्टर ट्रेनर्स संजीव लकड़ा, अगस्टिन कुजूर, डॉ. राजीव रंजन तिग्गा एवं खेमचंद नायक ने प्रतिभागी शिक्षकों को प्रशिक्षण प्रदान किया।
प्रशिक्षण सत्र में अंग्रेजी संप्रेषण कौशल के विकास, विद्यार्थियों की सक्रिय सहभागिता, कक्षा में संवादपरक शिक्षण पद्धति के उपयोग तथा जनजातीय विद्यार्थियों में अंग्रेजी बोलने के प्रति आत्मविश्वास विकसित करने जैसे महत्वपूर्ण विषयों पर मार्गदर्शन दिया गया। प्रशिक्षण का उद्देश्य शिक्षकों को ऐसी प्रभावी शिक्षण तकनीकों से परिचित कराना था, जिनके माध्यम से वे अपने-अपने महाविद्यालयों में विद्यार्थियों की भाषायी दक्षता और अकादमिक क्षमता को बेहतर बना सकें।

प्रशिक्षण के दौरान इस बात पर विशेष बल दिया गया कि अंग्रेजी भाषा सीखने की प्रक्रिया को सरल, सहज, व्यावहारिक और विद्यार्थी-केंद्रित बनाया जाए, ताकि ग्रामीण एवं जनजातीय अंचलों के विद्यार्थी बिना किसी संकोच के अंग्रेजी में संवाद करने के लिए प्रोत्साहित हों।
समापन समारोह में शिक्षकों को किया गया प्रोत्साहित
प्रशिक्षण सत्र के उपरांत आयोजित समापन समारोह में सरगुजा संभाग के अतिरिक्त संचालक प्रोफेसर रिजवान उल्ला मुख्य अतिथि के रूप में उपस्थित रहे। उन्होंने प्रतिभागी शिक्षकों को संबोधित करते हुए कार्यशाला में प्राप्त प्रशिक्षण के महत्व को समझाया तथा योजना के उद्देश्यों को गंभीरता और जिम्मेदारी के साथ धरातल पर लागू करने के लिए प्रेरित किया।

उन्होंने शिक्षकों से अपेक्षा की कि वे प्रशिक्षण में सीखी गई तकनीकों का उपयोग अपने महाविद्यालयों में नियमित रूप से करें तथा विद्यार्थियों को अंग्रेजी संप्रेषण कौशल में दक्ष बनाने के लिए निरंतर प्रयास करें। उन्होंने कहा कि किसी भी शैक्षणिक योजना की सफलता उसके प्रभावी क्रियान्वयन और शिक्षकों की सक्रिय भूमिका पर निर्भर करती है।
समापन समारोह की अध्यक्षता महाविद्यालय के प्राचार्य डॉ अनिल कुमार सिन्हा ने की। कार्यशाला के माध्यम से प्रतिभागी शिक्षकों को पायलट प्रोजेक्ट के उद्देश्यों, प्रशिक्षण पद्धतियों तथा जनजातीय विद्यार्थियों के शैक्षणिक सशक्तिकरण की दिशा में अपनी भूमिका को समझने का अवसर प्राप्त हुआ।

यह प्रशिक्षण कार्यशाला छत्तीसगढ़ के जनजातीय अंचलों में उच्च शिक्षा की गुणवत्ता बढ़ाने, विद्यार्थियों में अंग्रेजी संप्रेषण कौशल विकसित करने तथा उन्हें भविष्य की शैक्षणिक एवं रोजगार संबंधी चुनौतियों के लिए तैयार करने की दिशा में एक महत्वपूर्ण कदम सिद्ध होगी।

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