
दिल्ली। राजधानी में लगातार हो रहे विरोध प्रदर्शनों के कारण कारोबार प्रभावित होने का मुद्दा अब सुप्रीम कोर्ट पहुंच गया है। त्योहारी सीजन के दौरान मध्य दिल्ली में प्रदर्शनों पर रोक लगाने की मांग करते हुए अदालत में याचिका दायर की गई है। याचिका में दिवाली तक विरोध प्रदर्शनों पर प्रतिबंध लगाने की अपील की गई, लेकिन सुप्रीम कोर्ट ने तत्काल कोई आदेश जारी करने से इनकार कर दिया। अदालत ने कहा कि वह फिलहाल हालात पर नजर रखेगी और मामले में 26 या 27 अक्टूबर को सुनवाई करेगी।
प्रदर्शन और कानून-व्यवस्था से जुड़े पहलुओं पर नजर
सुप्रीम कोर्ट में दायर याचिका में कहा गया है कि लगातार हो रहे प्रदर्शनों के कारण बाजारों और व्यापारिक गतिविधियों पर असर पड़ रहा है। अदालत ने शुक्रवार को 'कॉकरोच जनता पार्टी' की ओर से प्रस्तावित प्रदर्शन के संबंध में भी तत्काल निर्देश देने से इनकार कर दिया।सुनवाई के दौरान अदालत ने उम्मीद जताई कि सभी पक्ष समझदारी से काम लेंगे। कोर्ट ने कहा कि विरोध प्रदर्शन, मूंगफली भेजने की घटना और कानून-व्यवस्था से जुड़े मुद्दों को अलग-अलग करके नहीं देखा जा सकता। कारोबार को नुकसान होने की स्थिति में मुआवजे के पहलू पर भी विचार किया जा सकता है। हालांकि, अदालत पहले यह देखना चाहती है कि आने वाले दिनों में हालात किस दिशा में बढ़ते हैं।
दो दिनों में 2,000 करोड़ रुपये का कारोबार प्रभावित होने का दावा
दिल्ली में हाल के प्रदर्शनों के दौरान कई बाजारों को करीब दो दिनों तक बंद रखना पड़ा था। व्यापारियों का कहना है कि इससे कारोबार को भारी नुकसान हुआ है।चैंबर ऑफ ट्रेड एंड इंडस्ट्री (CTI) की रिपोर्ट के अनुसार, इन दो दिनों में लगभग 2,000 करोड़ रुपये का व्यापार प्रभावित हुआ। संगठन ने इस मुद्दे पर गृह मंत्रालय को पत्र लिखकर प्रदर्शनों पर रोक लगाने की मांग भी की थी। व्यापारियों की चिंता है कि त्योहारों के दौरान बाजार बंद रहने से बिक्री और व्यापारिक गतिविधियों पर और असर पड़ सकता है।
कनॉट प्लेस में 'लहरा दो तिरंगा' रैली का ऐलान
कॉकरोच जनता पार्टी (CJP) ने शुक्रवार शाम पांच बजे दिल्ली के कनॉट प्लेस स्थित सेंट्रल पार्क में 'लहरा दो तिरंगा' रैली आयोजित करने की घोषणा की है। खबर में दावा किया गया है कि प्रस्तावित कार्यक्रम को देखते हुए सुरक्षा व्यवस्था के लिए 28 हजार सुरक्षाकर्मी तैनात किए गए हैं।वहीं, सीजेपी के अभिजीत दीपके ने आशंका जताई है कि उन्हें कभी भी गिरफ्तार किया जा सकता है। फिलहाल, विरोध प्रदर्शनों पर रोक लगाने की मांग पर सुप्रीम कोर्ट का अंतिम रुख अगली सुनवाई के दौरान स्पष्ट होने की उम्मीद है।




















