Brajmohan Ram Odisha Governor Appointment: झारखंड के पलामू से पूर्व सांसद ब्रजमोहन राम को ओडिशा का राज्यपाल नियुक्त किया गया है। इस अहम जिम्मेदारी की जानकारी मिलने से पहले उनके साथ एक दिलचस्प घटना हुई। प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी ने उन्हें कई बार फोन किया, लेकिन मोबाइल पर प्राइवेट नंबर दिखाई देने के कारण उन्होंने कॉल रिसीव नहीं की। ब्रजमोहन राम को जरा भी अंदाजा नहीं था कि बार-बार आ रही कॉल देश के प्रधानमंत्री की है। जब उन्हें इस बात का पता चला, तो वह हैरान रह गए।

करीब 10 बार आई कॉल, फिर भी नहीं उठाया फोन

ब्रजमोहन राम ने मीडिया से बातचीत में इस घटनाक्रम का जिक्र किया। उनके मुताबिक, मंगलवार सुबह उनके मोबाइल पर एक प्राइवेट नंबर से लगातार फोन आ रहे थे। करीब 10 बार कॉल आने के बावजूद उन्होंने फोन नहीं उठाया, क्योंकि उन्हें कॉल करने वाले की पहचान नहीं थी।बाद में उन्हें बताया गया कि प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी उनसे बात करना चाहते हैं। इसके बाद उनकी प्रधानमंत्री से बातचीत हुई। पीएम मोदी ने उनसे 'जोहार' कहकर अभिवादन किया और संगठन से जुड़ी जानकारी ली। बातचीत के दौरान प्रधानमंत्री ने उन्हें सरकार की ओर से एक महत्वपूर्ण जिम्मेदारी सौंपे जाने की जानकारी भी दी।

अमित शाह ने फोन कर बताया राज्यपाल बनने का फैसला

प्रधानमंत्री से बातचीत के बाद केंद्रीय गृह मंत्री अमित शाह ने भी ब्रजमोहन राम को फोन किया। इसी दौरान उन्हें ओडिशा का राज्यपाल नियुक्त किए जाने की जानकारी मिली। हालांकि, उन्हें उस समय इस फैसले को सार्वजनिक नहीं करने के लिए कहा गया था।इस तरह जिस कॉल को वह सामान्य प्राइवेट नंबर समझकर नजरअंदाज कर रहे थे, उसी के जरिए उन्हें प्रधानमंत्री से बातचीत करने और नई जिम्मेदारी मिलने की जानकारी मिली।

झारखंड के भाजपा नेताओं ने जताई खुशी

ब्रजमोहन राम की नियुक्ति के बाद झारखंड भाजपा के नेताओं ने प्रसन्नता जाहिर की। भाजपा प्रदेश अध्यक्ष आदित्य साहू और केंद्रीय रक्षा राज्य मंत्री संजय सेठ ने इसे झारखंड के लिए सम्मान की बात बताया।वहीं, नेता प्रतिपक्ष बाबूलाल मरांडी ने उम्मीद जताई कि ब्रजमोहन राम अपने अनुभव और समझ के आधार पर ओडिशा में राज्यपाल की संवैधानिक जिम्मेदारियों का प्रभावी ढंग से निर्वहन करेंगे।

एक फोन कॉल से मिली बड़ी जिम्मेदारी की जानकारी

ब्रजमोहन राम के लिए यह घटनाक्रम किसी अप्रत्याशित अनुभव से कम नहीं था। सुबह जिस फोन कॉल को उन्होंने अनजान नंबर समझकर नजरअंदाज किया, कुछ ही समय बाद वही उनके जीवन की बड़ी खबर से जुड़ी निकली। ओडिशा के राज्यपाल के रूप में उनकी नियुक्ति के बाद अब उनसे नई संवैधानिक जिम्मेदारी निभाने की उम्मीद की जा रही है।

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