
रायपुर : छत्तीसगढ़ की राजधानी रायपुर में साइबर ठगों ने एक बुजुर्ग महिला को डिजिटल अरेस्ट का डर दिखाकर 7 लाख रुपये ठग लिए। आरोपियों ने खुद को राष्ट्रीय जांच एजेंसी (NIA) का अधिकारी बताकर महिला को करीब पांच दिन तक मानसिक दबाव में रखा। उन्हें फर्जी बैंक खाते और मनी लॉन्ड्रिंग के मामले में फंसाने की धमकी दी गई। डर के कारण महिला ने अपनी फिक्स्ड डिपॉजिट (FD) तुड़वाई और ठगों के बताए खाते में रकम ट्रांसफर कर दी। ठगी का पता चलने के बाद पीड़िता ने गंज थाने में शिकायत दर्ज कराई है।
7 अक्टूबर को आया व्हाट्सएप कॉल, गिरफ्तारी का दिखाया डर
पीड़ित 62 वर्षीय महिला रायपुर के स्टेशन रोड इलाके में रहती हैं और मशीनों की मरम्मत का काम करती हैं। शिकायत के मुताबिक, 7 अक्टूबर की दोपहर उनके मोबाइल पर व्हाट्सएप कॉल आया। कॉल करने वाले व्यक्ति ने अपना नाम विक्रम सिंह बताया और खुद को रायपुर में तैनात NIA अधिकारी बताया।उसने महिला से कहा कि उनके आधार कार्ड का इस्तेमाल कर महाराष्ट्र में एक फर्जी बैंक खाता खोला गया है। दावा किया गया कि इस खाते में मनी लॉन्ड्रिंग से जुड़ी रकम आई है और उनके नाम पर गिरफ्तारी वारंट जारी हो चुका है। इस तरह महिला को कानूनी कार्रवाई और जेल भेजने का डर दिखाया गया।
फर्जी दस्तावेज भेजकर हासिल की निजी जानकारी
ठगों ने अपने दावों पर भरोसा दिलाने के लिए महिला को व्हाट्सएप पर एक कथित आधिकारिक पत्र भी भेजा। इसके बाद उनसे परिवार, संपत्ति, बैंक खातों और एफडी से जुड़ी जानकारी पूछी गई।अगले दिन, 8 अक्टूबर को महिला की बातचीत राकेश अग्रवाल नाम के एक अन्य व्यक्ति से कराई गई। उसे वरिष्ठ अधिकारी बताकर महिला पर दबाव बनाया गया। आरोपियों ने लगातार फोन करके उन्हें यह विश्वास दिलाने की कोशिश की कि वह गंभीर आपराधिक मामले में फंस चुकी हैं और गिरफ्तारी से बचने के लिए उन्हें जांच में सहयोग करना होगा।
एफडी तुड़वाई और खाते में ट्रांसफर कराए 7 लाख रुपये
लगातार मिल रही धमकियों से घबराकर महिला ने 9 अक्टूबर को केनरा बैंक में अपनी एफडी तुड़वाने की प्रक्रिया शुरू की। इस दौरान भी ठग फोन के जरिए उन्हें निर्देश देते रहे।12 अक्टूबर को आरोपियों ने महिला से एचडीएफसी बैंक के माध्यम से रकम ट्रांसफर करने को कहा। कथित तौर पर वीडियो कॉल पर ही उनसे RTGS फॉर्म भरवाया गया। फॉर्म में महाकाली मेटल नाम से जुड़े खाते का विवरण दर्ज कराया गया और महिला से 7 लाख रुपये ट्रांसफर करा लिए गए।रकम भेजने के बाद महिला ने भुगतान की रसीद भी व्हाट्सएप पर आरोपियों को भेज दी। इस तरह फर्जी जांच और गिरफ्तारी का डर दिखाकर ठगों ने उनकी बचत पर हाथ साफ कर दिया।
RBI के नाम से भेजा नकली सर्टिफिकेट, फिर हुआ शक
महिला का भरोसा बनाए रखने के लिए आरोपियों ने भारतीय रिजर्व बैंक (RBI) के नाम से एक कथित सर्टिफिकेट भी भेजा। उन्हें उम्मीद दिलाई गई कि जांच की प्रक्रिया पूरी होने के बाद जरूरी अनापत्ति प्रमाणपत्र (NOC) मिल जाएगा।हालांकि, जब महिला को एनओसी नहीं मिली तो उन्हें पूरे मामले पर संदेह होने लगा। इसके बाद उन्हें एहसास हुआ कि सरकारी अधिकारी बनकर उनसे पैसे ठगे गए हैं।
गंज थाने में शिकायत, पुलिस ने शुरू की जांच
ठगी का पता चलने के बाद महिला गंज थाने पहुंचीं और पूरे मामले की शिकायत दर्ज कराई। पुलिस ने अज्ञात आरोपियों के खिलाफ मामला दर्ज कर संबंधित बैंक खाते की जांच शुरू कर दी है। अब जांच में यह पता लगाने की कोशिश की जा रही है कि रकम किस खाते में पहुंची और इस वारदात के पीछे कौन लोग शामिल हैं।
डिजिटल अरेस्ट के नाम पर होने वाली ठगी से रहें सावधान
साइबर ठग अक्सर पुलिस, NIA, CBI या अन्य सरकारी एजेंसियों का अधिकारी बनकर लोगों को गिरफ्तारी और कानूनी कार्रवाई का डर दिखाते हैं। वे फर्जी दस्तावेज और वीडियो कॉल का इस्तेमाल कर पीड़ित को लगातार अपने नियंत्रण में रखने की कोशिश करते हैं।ध्यान रखें कि फोन या वीडियो कॉल पर खुद को सरकारी अधिकारी बताने वाला कोई व्यक्ति आपको डिजिटल अरेस्ट में रखने या जांच के नाम पर निजी खाते से पैसे ट्रांसफर करने का आदेश नहीं दे सकता। ऐसी कॉल आने पर घबराकर रकम न भेजें। संबंधित एजेंसी या पुलिस से आधिकारिक माध्यम से संपर्क करें और साइबर ठगी होने पर तुरंत शिकायत दर्ज कराएं।




















