
हरदोई: आर्थिक चुनौतियां और सीमित संसाधन किसी के सपनों को रोक नहीं सकते, बशर्ते आगे बढ़ने का हौसला हो। उत्तर प्रदेश के हरदोई जिले की प्रतिमा वर्मा ने अपनी मेहनत से यह साबित कर दिखाया है। कभी खेती पर निर्भर परिवार की आर्थिक मुश्किलों से जूझने वाली प्रतिमा आज कृषि उद्यमी के रूप में अपनी पहचान बना चुकी हैं। उनके पास खुद का ट्रैक्टर है और वह दुग्ध संग्रहण केंद्र भी चला रही हैं। साथ ही, आधुनिक कृषि यंत्रों की सेवाएं देकर सैकड़ों किसानों की मदद कर रही हैं।
सुरसा विकासखंड के चेतापुरवा गांव की रहने वाली प्रतिमा की इस उपलब्धि को मुख्यमंत्री योगी आदित्यनाथ से भी सम्मान मिल चुका है। उनकी कहानी ग्रामीण महिलाओं के लिए स्वरोजगार और आत्मनिर्भरता की प्रेरणा बन रही है।
स्वयं सहायता समूह से शुरू हुआ बदलाव
प्रतिमा वर्मा का परिवार खेती-किसानी पर निर्भर था। आमदनी के सीमित साधनों के कारण घर का खर्च चलाना चुनौतीपूर्ण था। दूसरी ओर, गांव के छोटे और सीमांत किसानों के सामने महंगे कृषि उपकरण खरीदना भी आसान नहीं था। प्रतिमा ने इसी समस्या में रोजगार की संभावना तलाश की।
19 अक्टूबर 2022 को गठित जय भोले बाबा आजीविका महिला स्वयं सहायता समूह से जुड़कर उन्होंने अपने लिए नए अवसरों की तलाश शुरू की। अप्रैल 2023 में एचसीएल फाउंडेशन के सहयोग से कस्टम हायरिंग सेंटर स्थापित हुआ। इस केंद्र के माध्यम से किसानों को किराये पर कृषि यंत्र उपलब्ध कराने की व्यवस्था की गई।
कृषि यंत्रों का प्रशिक्षण लेकर शुरू किया काम
कृषि उद्यम को आगे बढ़ाने के लिए प्रतिमा ने पावर टिलर, रीपर-बाइंडर, ब्रश कटर और बैटरी से चलने वाले स्प्रेयर जैसे उपकरणों के संचालन और रखरखाव का प्रशिक्षण लिया। शुरुआत में सामाजिक रूढ़ियों और पारिवारिक जिम्मेदारियों के कारण कई चुनौतियां सामने आईं, लेकिन उन्होंने अपना प्रयास जारी रखा।
धीरे-धीरे किसानों का भरोसा बढ़ा और उनके काम का दायरा भी विस्तृत होने लगा। किफायती दरों पर कृषि उपकरण उपलब्ध होने से छोटे किसानों को खेती के जरूरी काम पूरे करने में मदद मिली।
366 किसानों तक पहुंचीं प्रतिमा की सेवाएं
प्रतिमा अब तक 366 लघु एवं सीमांत किसानों को कृषि यंत्रों की सेवाएं उपलब्ध करा चुकी हैं। उनके माध्यम से 877 कच्चा बीघा भूमि पर कृषि कार्यों में सहायता दी गई। इस काम से उन्होंने करीब 2.60 लाख रुपये की आय अर्जित की।
आमदनी में सुधार होने के बाद प्रतिमा ने अपना ट्रैक्टर खरीदा। उन्होंने आय के दूसरे साधन के रूप में दुग्ध संग्रहण केंद्र भी शुरू किया। इस तरह कृषि सेवाओं के साथ उन्होंने अपने उद्यम को आगे बढ़ाने के लिए अतिरिक्त रास्ते भी तैयार किए।
दूसरी महिलाओं को भी आत्मनिर्भर बनाना है लक्ष्य
प्रतिमा का मानना है कि प्रशिक्षण, सही मार्गदर्शन और संस्थागत सहयोग से ग्रामीण महिलाएं भी अपनी आर्थिक स्थिति मजबूत कर सकती हैं। वह चाहती हैं कि गांव की अधिक से अधिक महिलाएं स्वयं सहायता समूहों से जुड़ें, नए कौशल सीखें और स्वरोजगार की दिशा में कदम बढ़ाएं।
प्रतिमा वर्मा का सफर दिखाता है कि सीमित संसाधनों के बावजूद मेहनत, प्रशिक्षण और सही अवसरों के सहारे आर्थिक आत्मनिर्भरता हासिल की जा सकती है। उनकी पहल से न केवल उनके परिवार की स्थिति में सुधार हुआ है, बल्कि गांव के छोटे किसानों को भी कृषि कार्यों के लिए जरूरी सुविधाएं मिल रही हैं।


















