अम्बिकापुर: वर्ष 2010-11 में सर्व शिक्षा अभियान के तहत स्कूलों में फर्नीचर खरीदी के नाम पर हुई कथित वित्तीय अनियमितताओं के मामले में राज्य आर्थिक अपराध अन्वेषण ब्यूरो एवं एंटी करप्शन ब्यूरो (EOW/ACB), छत्तीसगढ़ ने बड़ी कार्रवाई की है। एजेंसी ने 10 आरोपियों के खिलाफ करीब 20 हजार पन्नों का चालान विशेष न्यायालय (भ्रष्टाचार निवारण अधिनियम), अम्बिकापुर में पेश किया है। जांच में शासन को कुल 67,48,008.28 की आर्थिक क्षति होने की बात सामने आई है।

EOW/ACB ने यह चालान अपराध क्रमांक 28/2017 में 12 अक्टूबर 2026 को भ्रष्टाचार निवारण अधिनियम, 1988 की धारा 13(1)(डी), 13(2) और भारतीय दंड संहिता की धारा 120-बी, 409 एवं 420 के तहत प्रस्तुत किया है। मामले में तत्कालीन जिला परियोजना समन्वयक सहित विभिन्न फर्मों के संचालकों को आरोपी बनाया गया है।

फर्नीचर खरीदी के लिए मिले थे 2.70 करोड़ रुपये

जांच के अनुसार, वर्ष 2010-11 में सर्व शिक्षा अभियान के अंतर्गत अविभाजित सरगुजा जिले के मिडिल स्कूलों में फर्नीचर खरीदी के लिए करीब 2.70 करोड़ रुपये का आवंटन मिला था। जिला कार्यालय, राजीव गांधी शिक्षा मिशन, अम्बिकापुर ने तत्कालीन कलेक्टर एवं जिला मिशन संचालक की स्वीकृति के बाद सीएसआईडीसी की निर्धारित दरों पर 10 फर्मों को क्रय आदेश जारी किए थे।इन फर्मों के नाम 28 मार्च 2011 को कुल 2,68,18,838 रुपये के चेक जारी किए गए। क्रय आदेश में 20 दिनों के भीतर फर्नीचर की आपूर्ति करने की शर्त रखी गई थी। हालांकि, जांच में आरोप लगा कि निर्धारित प्रक्रिया का पालन किए बिना ही भुगतान कर दिया गया।

भौतिक सत्यापन से पहले बांट दिए गए चेक

समाचार पत्रों में शिकायतें प्रकाशित होने के बाद स्कूल शिक्षा विभाग ने 20 अप्रैल 2013 को जांच के निर्देश दिए थे। इसके बाद कलेक्टर सरगुजा द्वारा गठित तीन सदस्यीय समिति ने 3 से 12 जून 2013 तक जांच की और 19 जुलाई 2013 को अपनी रिपोर्ट प्रस्तुत की।जांच समिति के अनुसार, कलेक्टर ने फर्नीचर का भौतिक सत्यापन करने के बाद ही चेक जारी करने के निर्देश दिए थे। इसके बावजूद तत्कालीन जिला परियोजना समन्वयक सत्यप्रकाश पाण्डेय ने कथित तौर पर लेखापाल से चेक लेकर 6 से 9 अप्रैल 2011 के बीच फर्मों को वितरित कर दिए।जांच में यह भी सामने आया कि कई फर्मों ने स्कूलवार आपूर्ति सूची और प्रधान पाठकों के हस्ताक्षरयुक्त प्राप्ति प्रमाणपत्र उपलब्ध नहीं कराए थे। फर्नीचर की गुणवत्ता जांच, क्रय समिति से भौतिक सत्यापन और फर्मों के साथ अनुबंध जैसी प्रक्रियाओं का पालन नहीं किए जाने की बात भी सामने आई। इसके अलावा तीन प्रतिशत सुरक्षा निधि जमा नहीं कराने की अनियमितता भी दर्ज की गई।

कथित फर्जी फर्म के नाम पर 22.91 लाख का भुगतान

विवेचना में दर्शन फेब्रिकेटर, रायपुर के नाम जारी क्रय आदेश को लेकर भी गंभीर आरोप सामने आए। एजेंसी के अनुसार, तत्कालीन जिला परियोजना समन्वयक सत्यप्रकाश पाण्डेय ने कथित तौर पर यह आदेश संबंधित फर्म के संचालक सुरेश कटारिया को देने के बजाय आकृति प्रिंटिंग प्रेस, अम्बिकापुर के संचालक संजय पटेल को दिया।आरोप है कि संजय पटेल ने दर्शन फेब्रिकेशन के नाम से ओरियंटल बैंक ऑफ कॉमर्स, अम्बिकापुर में खाता खुलवाया। इस खाते में 28 मार्च 2011 को 22,91,909 रुपये का चेक जमा किया गया और राशि निकाल ली गई। जांच के मुताबिक, इस फर्म ने किसी भी स्कूल में फर्नीचर की आपूर्ति नहीं की।

पूछताछ में संजय पटेल ने कथित तौर पर सात लाख रुपये कमीशन के रूप में सत्यप्रकाश पाण्डेय को देने की बात कही। हालांकि, इन आरोपों पर अंतिम निर्णय न्यायालय में होना है।

दूसरी फर्म ने भी भुगतान के बाद नहीं की आपूर्ति

मामले में महारानी स्टील एंड अप्लायंस, रायपुर के संचालक प्रेमचंद जैन को भी 11,44,349 रुपये का चेक जारी किया गया था। जांच के अनुसार, राशि निकालने के बावजूद संबंधित फर्म ने किसी स्कूल में फर्नीचर की आपूर्ति नहीं की। प्रेमचंद जैन की मृत्यु 7 अगस्त 2025 को हो चुकी है।

वहीं, शेष आठ फर्मों द्वारा क्रय आदेश में निर्धारित मात्रा से कम फर्नीचर की आपूर्ति किए जाने की बात सामने आई। इस तरह भुगतान और वास्तविक आपूर्ति के बीच अंतर को शासन को हुई आर्थिक क्षति का प्रमुख आधार माना गया।

67.48 लाख रुपये की आर्थिक क्षति

EOW/ACB की फर्मवार गणना के अनुसार, आपूर्ति नहीं किए गए फर्नीचर की राशि 56,84,848 रुपये, वैट की अंकित राशि 9,47,938 रुपये और निरीक्षण शुल्क 1,15,222.28 रुपये का गबन होना पाया गया। इन मदों को मिलाकर कुल आर्थिक क्षति 67,48,008.28 रुपये आंकी गई है।

इन 10 आरोपियों के खिलाफ पेश हुआ चालान

चालान में तत्कालीन जिला परियोजना समन्वयक सत्यप्रकाश पाण्डेय, वर्तमान में सेवानिवृत्त, और दर्शन फेब्रिकेशन के संचालक संजय पटेल सहित कुल 10 आरोपियों के नाम शामिल हैं।अन्य आरोपियों में अम्बिका अलमीरा एंड स्टील फेब्रिकेटर्स के संचालक अजय कुमार अग्रवाल, सेलेनो स्टील की संचालिका ममता अग्रवाल, महामाया फेब्रिकेटर्स के संचालक बिधी सिंह कटलारिया, सूर्या स्टील एंड वुडन इंडस्ट्रीज के संचालक राजकुमार बंसल, श्री साई इंडस्ट्रीज के संचालक संदीप तिवारी, श्याम मेटल प्रोडक्ट्स के संचालक हितेश कुमार अग्रवाल, श्री श्याम इंडस्ट्रीज के संचालक रितेश कुमार अग्रवाल और पंकज फर्नीचर मार्ट के संचालक संजीव गुप्ता शामिल हैं।

एजेंसी का आरोप है कि सत्यप्रकाश पाण्डेय ने संबंधित आपूर्तिकर्ताओं के साथ मिलकर कथित आपराधिक षड्यंत्र के तहत शासकीय राशि का दुरुपयोग किया और नियमों की अनदेखी कर आपूर्ति से पहले भुगतान कराया।

अगस्त में हुई थी दो आरोपियों की गिरफ्तारी

EOW/ACB के अनुसार, सत्यप्रकाश पाण्डेय और संजय पटेल को अपना पक्ष रखने तथा बयान दर्ज कराने के लिए कई बार नोटिस दिए गए थे। एजेंसी का कहना है कि दोनों ने विवेचना में सहयोग नहीं किया। इसके बाद 19 अगस्त 2026 को गिरफ्तारी के कारणों से अवगत कराते हुए दोनों को गिरफ्तार किया गया। परिजनों को सूचना देने के बाद उन्हें न्यायिक मजिस्ट्रेट, अम्बिकापुर के समक्ष पेश किया गया, जहां से 24 अगस्त 2026 तक न्यायिक रिमांड प्राप्त हुआ था।

करीब 15 वर्ष पुराने इस मामले में अब विशेष न्यायालय में चालान पेश होने के बाद आगे की न्यायिक प्रक्रिया के तहत आरोपों पर विचार किया जाएगा। आरोपियों के खिलाफ लगाए गए आरोपों पर अंतिम फैसला न्यायालय द्वारा किया जाएगा।

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