बलरामपुर:  छत्तीसगढ़ के बलरामपुर जिले में मवेशी तस्करी के खिलाफ पुलिस की कार्रवाई लगातार जारी है। रघुनाथनगर थाना पुलिस ने संगठित पशु तस्करी के एक मामले में पांच और आरोपियों को गिरफ्तार किया है। पुलिस के अनुसार, गिरफ्तार आरोपियों में स्थानीय स्तर पर मवेशियों की खरीद-बिक्री में मध्यस्थता करने वाले एजेंट और उत्तर प्रदेश तक मवेशियों के परिवहन से जुड़े लोग शामिल हैं।पुलिस ने इस मामले में अपराध क्रमांक 110/2026 के तहत भारतीय न्याय संहिता (बीएनएस) की धारा 111(2), छत्तीसगढ़ कृषक पशु परिरक्षण अधिनियम, 2004 की धारा 4, 6 एवं 10 तथा पशु क्रूरता निवारण अधिनियम, 1960 की धारा 11(1)(घ) के तहत कार्रवाई की है।

केसारी गांव में पकड़े गए थे 34 भैंस और भैंसे

पुलिस से मिली जानकारी के अनुसार, 16 सितंबर 2026 को रघुनाथनगर थाना पुलिस पेट्रोलिंग कर रही थी। इसी दौरान मुखबिर से सूचना मिली कि कुछ लोग केसारी गांव से मवेशियों को अवैध रूप से पैदल उत्तर प्रदेश ले जा रहे हैं। सूचना पर पुलिस टीम ने गांव में घेराबंदी की। पुलिस को देखकर मवेशियों को ले जा रहे लोगों ने भागने का प्रयास किया।इस दौरान पुलिस ने केसारी निवासी दीपक सोनवानी (24 वर्ष) को गिरफ्तार किया और मौके से 34 भैंस एवं भैंसे जब्त किए। कार्रवाई के दौरान कुछ अन्य आरोपी अंधेरे का फायदा उठाकर फरार हो गए थे।

मास्टरमाइंड से पूछताछ के बाद पांच आरोपियों की गिरफ्तारी

पुलिस के मुताबिक, इस प्रकरण में 8 अक्टूबर 2026 को कथित स्थानीय सप्लायर जितेंद्र जायसवाल को गिरफ्तार किया गया था। उससे पूछताछ के बाद पशु तस्करी नेटवर्क से जुड़े पांच अन्य आरोपियों के नाम सामने आए। इसके बाद वरिष्ठ अधिकारियों के निर्देश पर पुलिस टीम ने आरोपियों के ठिकानों पर दबिश देकर रमजान अंसारी, जैनुल अंसारी, ऐनुल्लाह अंसारी, ईसराज अहमद और तस्लिम को गिरफ्तार किया।

किसकी क्या भूमिका बताई गई?

पुलिस के अनुसार, रमजान अंसारी और जैनुल अंसारी स्थानीय स्तर पर एजेंट के रूप में काम करते थे। आरोप है कि वे पशु तस्करी से जुड़े लोगों के कहने पर आसपास के गांवों से मवेशी खरीदते थे और उन्हें आगे पहुंचाने के लिए मध्यस्थता करते थे। इस काम के बदले कमीशन लेने की बात भी सामने आई है।वहीं, ऐनुल्लाह अंसारी पर स्थानीय एजेंट और मवेशी सप्लायर के रूप में काम करने का आरोप है। पुलिस के अनुसार, वह बलरामपुर, सूरजपुर और सरगुजा जिले के विभिन्न गांवों से मवेशी खरीदकर उन्हें सीमावर्ती क्षेत्रों के रास्ते आगे पहुंचाने वाले नेटवर्क से जुड़ा था।उत्तर प्रदेश के सोनभद्र जिले के निवासी ईसराज अहमद और तस्लिम की भूमिका कथित तौर पर परिवहनकर्ताओं की बताई गई है। पुलिस के मुताबिक, दोनों छत्तीसगढ़-उत्तर प्रदेश सीमा से लगे जंगल के पार मवेशियों को पिकअप वाहन में लोड कर उत्तर प्रदेश में नेटवर्क से जुड़े अन्य लोगों तक पहुंचाते थे।

बलरामपुर पुलिस के अनुसार, पुलिस अधीक्षक और अतिरिक्त पुलिस अधीक्षक के दिशा-निर्देश पर जिले में पशु तस्करी के विरुद्ध विशेष अभियान चलाया जा रहा है। इसी अभियान के तहत मामले की जांच आगे बढ़ाते हुए पांच आरोपियों को गिरफ्तार किया गया है।

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