
अंबिकापुर: राजीव गांधी पीजी कॉलेज में 8 अक्टूबर को कॉलेज के सभा कक्ष में महिला स्वास्थ्य पर केंद्रित एक जागरूकता सत्र का आयोजन किया गया। सत्र का विषय पीसीओडी (पॉलीसिस्टिक ओवेरियन डिजीज) और पीसीओएस (पॉलीसिस्टिक ओवरी सिंड्रोम) था। यह कार्यक्रम कॉलेज के सोशल इनोवेशन एवं कम्युनिटी एंगेजमेंट सेल के सहयोग से आयोजित किया गया।
इस कार्यक्रम की योजना और संचालन यूथ लीडरशिप सर्टिफिकेट कोर्स के पांच विद्यार्थियों खुशी, आस्था, निधि, मुकेश और अर्पिता ने किया।
सत्र की योजना बनाने से पहले विद्यार्थियों ने कॉलेज परिसर में गूगल फॉर्म के माध्यम से एक सर्वे किया, ताकि यह जाना जा सके कि छात्राओं को पीसीओडी और पीसीओएस के बारे में कितनी जानकारी है। इस सर्वे में कुल 75 छात्राओं ने अपनी प्रतिक्रिया दी। परिणामों में सामने आया कि 67 प्रतिशत छात्राओं को पीसीओडी और पीसीओएस के बारे में जानकारी नहीं थी, जबकि कई छात्राओं के मन में इस विषय को लेकर गलत धारणाएं भी थीं।
इन निष्कर्षों के आधार पर टीम ने तय किया कि छात्राओं को इन समस्याओं के लक्षण, कारण और प्रबंधन के बारे में सरल भाषा में जानकारी देने के लिए एक जागरूकता सत्र आयोजित किया जाए।विद्यार्थियों ने सत्र के लिए विशेषज्ञ वक्ता के रूप में कंसल्टेंट गायनेकोलॉजिस्ट एवं महिला स्वास्थ्य विशेषज्ञ डॉ. रुपल ठाकुर (एमबीबीएस, डीजीओ) को आमंत्रित किया। उन्होंने छात्राओं से सीधा संवाद किया और उनके प्रश्नों के उत्तर दिए। सत्र काफी संवादात्मक रहा और छात्राओं ने विशेषज्ञ से कई सवाल पूछे। कार्यक्रम में कुल 35 छात्राओं ने भाग लिया।सत्र में सबसे पहले पीसीओडी और पीसीओएस का परिचय देते हुए उनके लक्षणों और संभावित कारणों पर चर्चा की गई। इसके बाद हार्मोनल असंतुलन और उसका महिलाओं के स्वास्थ्य पर पड़ने वाले प्रभाव को समझाया गया। प्रजनन स्वास्थ्य पर इन समस्याओं के असर, संभावित जोखिम और उनके प्रबंधन के बारे में भी जानकारी दी गई। विशेषज्ञ ने इन विषयों से जुड़े आम मिथकों और भ्रांतियों के पीछे की सच्चाई भी बताई। अंत में संतुलित आहार, नियमित व्यायाम और स्वस्थ जीवनशैली अपनाकर स्वयं की देखभाल के महत्व पर जोर दिया गया।
कार्यक्रम में प्राचार्य प्रभारी डॉ. एस.एन. पांडेय, महिला प्रकोष्ठ तथा सोशल इनोवेशन एवं कम्युनिटी एंगेजमेंट सेल की सदस्य डॉ. कामिनी, मुहिम फाउंडेशन की टीम के सदस्य रोस अंजलि, आकृति और ऋषिकेश उपस्थित रहे।
कॉलेज प्रशासन ने विद्यार्थियों की सराहना की, जिन्होंने अपने साथियों के बीच एक वास्तविक स्वास्थ्य समस्या की पहचान की और जागरूकता सत्र के माध्यम से इसे दूर करने की पहल की।




















