
नई दिल्ली। सॉवरेन गोल्ड बॉन्ड में निवेश करने वालों के लिए अहम अपडेट सामने आया है। भारतीय रिजर्व बैंक ने SGB 2021-22 सीरीज VI के समय से पहले रिडेम्पशन के लिए प्रति यूनिट 15,334 रुपये की कीमत निर्धारित कर दी है। इस सीरीज का प्रीमैच्योर रिडेम्पशन 7 सितंबर 2026 को होगा।
5 साल बाद मिला समय से पहले रिडेम्पशन का विकल्प
RBI के अनुसार, यह सॉवरेन गोल्ड बॉन्ड 7 सितंबर 2021 को जारी किया गया था। स्कीम के नियमों के तहत निवेशक जारी होने के पांच वर्ष पूरे होने के बाद ब्याज भुगतान की तारीख पर समय से पहले बॉन्ड भुना सकते हैं।
15,334 रुपये कैसे तय हुई रिडेम्पशन कीमत?
रिडेम्पशन मूल्य तय करने के लिए इंडिया बुलियन एंड ज्वैलर्स एसोसिएशन द्वारा जारी 999 शुद्धता वाले सोने के भाव को आधार बनाया जाता है।
RBI ने बताया कि 2, 3 और 4 सितंबर 2026 के दौरान सोने की क्लोजिंग कीमतों के साधारण औसत के आधार पर SGB 2021-22 सीरीज VI की रिडेम्पशन कीमत 15,334 रुपये प्रति यूनिट तय की गई है।
कौन रख सकता है सॉवरेन गोल्ड बॉन्ड?
सॉवरेन गोल्ड बॉन्ड योजना के तहत भारत में रहने वाले व्यक्ति बॉन्ड में निवेश कर सकते हैं। इसके अलावा ट्रस्ट, हिंदू अविभाजित परिवार, चैरिटेबल संस्थाएं और विश्वविद्यालय भी निर्धारित नियमों के तहत इन्हें रख सकते हैं। निवेश व्यक्तिगत रूप से, नाबालिग की ओर से या संयुक्त रूप से भी किया जा सकता है।
सिर्फ रिडेम्पशन कीमत से नहीं निकलेगा वास्तविक मुनाफा
RBI के नोटिफिकेशन में सितंबर 2021 वाली इस सीरीज की मूल इश्यू कीमत का उल्लेख नहीं किया गया है। ऐसे में केवल 15,334 रुपये की रिडेम्पशन कीमत देखकर निवेशकों के वास्तविक लाभ या कुल रिटर्न की गणना नहीं की जा सकती।
निवेशक को कितना फायदा हुआ, यह जानने के लिए बॉन्ड की खरीद कीमत, निवेश की मात्रा और मिलने वाले ब्याज को भी ध्यान में रखना जरूरी होगा।
पहले भी निवेशकों को मिला है शानदार रिटर्न
इससे पहले RBI ने SGB 2020-21 सीरीज VII के निवेशकों के लिए समय से पहले रिडेम्पशन की सुविधा उपलब्ध कराई थी। उस समय प्रति यूनिट रिडेम्पशन कीमत 15,254 रुपये तय की गई थी।
उस सीरीज में जिन निवेशकों ने 5,051 रुपये प्रति यूनिट की इश्यू कीमत पर निवेश किया था, उन्हें पूंजीगत लाभ के रूप में 200 प्रतिशत से अधिक का फायदा मिलने की संभावना बनी थी।
अब SGB 2021-22 सीरीज VI के निवेशकों की नजर 7 सितंबर के रिडेम्पशन पर टिकी है, क्योंकि सोने की मजबूत कीमतों ने गोल्ड बॉन्ड निवेश को एक बार फिर चर्चा में ला दिया है।



















