
नई दिल्ली। एक्सप्रेसवे और नेशनल हाइवे प्रोजेक्ट्स में काम की क्वालिटी में सुधार करने और लापरवाही को रोकने के लिए सड़क परिवहन मंत्रालय बड़ा फैसला लिया है। मंत्रालय ने लगभग 5,000 किलोमीटर लंबे एक्सप्रेसवे और हाईवे के निर्माण शुरू होने से लेकर प्रोजेक्ट पूरा होने तक निरीक्षण और जांच के लिए थर्ड पार्टी ऑडिट को अनिवार्य करने का फैसला लिया है।शुरुआत में तृतीय-पक्ष निरीक्षण एजेंसी (TPIA) को तीन साल की अवधि के लिए नियुक्त किया जाएगा।
EIL चुनने का फैसला
एक अंग्रेजी वेबसाइट से मिली जानकारी के अनुसार, मंत्रालय ने पेट्रोलियम मंत्रालय के तहत आने वाली इंजीनियरिंग कंसल्टेंसी फर्म 'इंजीनियर्स इंडिया लिमिटेड' (EIL) को चुनने का फैसला किया है। यह एजेंसी मुख्य रूप से देश भर के एक्सप्रेसवे, सिक्स-लेन और फोर-लेन वाले नेशनल हाईवे का ऑडिट करेगी।
गौरतलब कि वर्तमान में, निर्माण कार्य की गुणवत्ता की जांच (थर्ड-पार्टी क्वालिटी ऑडिट) स्वतंत्र ऑडिटरों द्वारा की जाती है। इनमें से अधिकांश एनएचएआई (NHAI) और अन्य सरकारी एजेंसियों द्वारा सूचीबद्ध सेवानिवृत्त सरकारी इंजीनियर होते हैं।
इस एजेंसी को कुल मिलाकर 5,000 किलोमीटर लंबे सड़क नेटवर्क के निरीक्षण की जिम्मेदारी दी जाएगी। इसमें 770 किलोमीटर एक्सप्रेसवे, 2,200 किलोमीटर छह-लेन वाले राजमार्ग, और चार-लेन और दो-लेन वाले नेशनल हाईवे के 1,000-1,000 किलोमीटर के हिस्से शामिल हैं।निर्माण की उच्च गुणवत्ता सुनिश्चित करने के उद्देश्य से, इसी साल की शुरुआत में प्रधानमंत्री कार्यालय (PMO) ने सड़क परिवहन मंत्रालय को स्वतंत्र थर्ड-पार्टी ऑडिट शुरू करने का निर्देश दिया था। योजना के मुताबिक, 'इंजीनियर्स इंडिया लिमिटेड' (EIL) की भूमिका मुख्य रूप से अनुबंध में तय तकनीकी मानकों और दिशा-निर्देशों के पालन की "जांच और निरीक्षण" तक ही सीमित रहेगी।
इससे पहले भी 'इंजीनियर्स इंडिया लिमिटेड' (EIL) ऐसी जांच कर चुका है। तत्कालीन प्रधानमंत्री अटल बिहारी वाजपेयी के कार्यकाल में जब देश की पहली सबसे बड़ी राजमार्ग परियोजना 'स्वर्ण चतुर्भुज' (Golden Quadrilateral) का निर्माण हो रहा था, तब EIL ने ही थर्ड-पार्टी क्वालिटी चेक का जिम्मा संभाला था।




















