
बिलासपुर: बिलासपुर-कटनी रेलमार्ग स्थित भनवारटंक टनल में ट्रेन के सामने अचानक तेंदुआ आ जाने का वीडियो सोशल मीडिया पर वायरल हो रहा है। घने जंगल और सुरंग के अंधेरे के बीच रेलवे ट्रैक पर तेंदुए को दौड़ते देख लोको पायलट ने तत्काल सूझबूझ का परिचय देते हुए इमरजेंसी ब्रेक लगाया और ट्रेन की रफ्तार नियंत्रित कर दी। इस त्वरित कार्रवाई से न केवल वन्यजीव की जान बची, बल्कि संभावित रेल हादसा भी टल गया।
घटना के बाद लोको पायलट और ट्रेन के चालक दल की सतर्कता की सराहना हो रही है। हालांकि, अब सवाल यह भी उठ रहा है कि ऐसी परिस्थितियों में जान जोखिम में डालकर हादसा टालने वाले रेलकर्मियों को रेलवे प्रशासन की ओर से किस तरह का सम्मान दिया जाएगा।
क्या लोको पायलट को मिलेगा संरक्षा पुरस्कार?
घटना के बाद बिलासपुर रेल मंडल (SECR) के सामने यह सवाल है कि क्या संबंधित लोको पायलट और क्रू को संरक्षा पुरस्कार, प्रशस्ति पत्र या प्रोत्साहन राशि से सम्मानित किया जाएगा। वहीं, रेल मंत्रालय स्तर पर भी ऐसे कर्मचारियों को विशेष सम्मान अथवा अन्य सेवा लाभ दिए जाने की मांग उठ रही है।
वन्यजीवों की सुरक्षा को लेकर भी सवाल
भनवारटंक क्षेत्र घने जंगलों से घिरा हुआ है और रेलवे ट्रैक वन्यजीवों की आवाजाही वाले क्षेत्र से होकर गुजरता है। ऐसे में तेंदुए सहित अन्य वन्यजीवों के ट्रैक पर आने की आशंका बनी रहती है। इस घटना ने रेलवे और वन विभाग के बीच बेहतर समन्वय तथा वन्यजीव सुरक्षा व्यवस्था की जरूरत को फिर सामने ला दिया है।
विशेषज्ञों और स्थानीय स्तर पर यह सवाल उठ रहा है कि संवेदनशील रेलखंडों में वन्यजीवों की गतिविधियों की निगरानी के लिए आधुनिक सेंसर, कैमरे, अलर्ट सिस्टम और अन्य तकनीकी उपायों को मजबूत क्यों नहीं किया जा रहा है। जंगल और सुरंग के मुहानों के आसपास गति नियंत्रण तथा निगरानी व्यवस्था को भी प्रभावी बनाने की जरूरत बताई जा रही है।
केवल लोको पायलट की सतर्कता पर निर्भर नहीं रह सकती सुरक्षा
भनवारटंक की घटना में लोको पायलट की सूझबूझ ने एक वन्यजीव की जान बचा ली, लेकिन हर बार ऐसी स्थिति में केवल चालक की सतर्कता पर निर्भर रहना पर्याप्त नहीं हो सकता। रेलवे और वन विभाग को संवेदनशील रेलखंडों की संयुक्त पहचान कर वहां ट्रैक फेंसिंग, निगरानी कैमरे, चेतावनी प्रणाली और जरूरत के अनुसार वन्यजीव सुरक्षा ढांचे को मजबूत करना होगा।
अब देखना होगा कि इस घटना के बाद रेलवे प्रशासन लोको पायलट की बहादुरी और तत्परता को औपचारिक सराहना तक सीमित रखता है या उसे उचित सम्मान देने के साथ-साथ भनवारटंक क्षेत्र में वन्यजीव सुरक्षा के लिए ठोस कदम भी उठाता है।




















