छत्तीसगढ़ में शिक्षकों के तबादले से जुड़ा एक मामला शिक्षा विभाग की कार्यप्रणाली पर गंभीर सवाल खड़े कर गया। विभाग ने धमतरी जिले में प्रधानाध्यापक के पद पर कार्यरत दूज बाई कंवर को तबादला आदेश में सहायक शिक्षक के रूप में दर्ज कर दिया। इस आधार पर उनका स्थानांतरण दूसरे स्कूल में कर दिया गया।मामला हाई कोर्ट पहुंचा तो सुनवाई के दौरान राज्य सरकार ने खुद इसे प्रशासनिक भूल माना। कोर्ट ने इसके बाद संबंधित तबादला आदेश को याचिकाकर्ता की सीमा तक रद्द कर दिया।

6 अगस्त को जारी हुआ था तबादला आदेश

दूज बाई कंवर धमतरी जिले के कुरूद ब्लॉक के शासकीय प्राथमिक स्कूल बिछपारा परखंडा में प्रधानाध्यापक के पद पर कार्यरत थीं। स्कूल शिक्षा विभाग ने 6 अगस्त को उनका तबादला मगरलोड ब्लॉक के शासकीय प्राथमिक स्कूल लाडेर में कर दिया।याचिकाकर्ता ने इस आदेश को चुनौती देते हुए हाई कोर्ट में याचिका दाखिल की। उनका कहना था कि विभाग ने उनके पद की सही जानकारी तक दर्ज नहीं की और इसी गलत विवरण के आधार पर तबादला कर दिया।

जिस पद पर तबादला हुआ, वहां भी समस्या

तबादला आदेश में दूज बाई कंवर को सहायक शिक्षक बताया गया था, जबकि वह प्रधानाध्यापक के पद पर कार्यरत थीं। इतना ही नहीं, जिस स्कूल में उनका तबादला किया गया था, वहां पहले से प्रधानाध्यापक पदस्थ था।इस स्थिति ने तबादला प्रक्रिया में विभागीय रिकॉर्ड की जांच और रिक्त पदों की वास्तविक स्थिति का सत्यापन किए जाने पर सवाल खड़े कर दिए।

सरकार ने कोर्ट में स्वीकार की प्रशासनिक चूक

मामले की सुनवाई न्यायमूर्ति बिभु दत्त गुरु की एकलपीठ के समक्ष हुई। सुनवाई के दौरान राज्य सरकार की ओर से पेश शासकीय अधिवक्ता ने स्वीकार किया कि रिकॉर्ड में हुई त्रुटि और प्रशासनिक भूल के कारण याचिकाकर्ता को सहायक शिक्षक मान लिया गया था।कोर्ट ने सरकार की इस स्वीकारोक्ति और उपलब्ध तथ्यों को देखते हुए माना कि तबादला आदेश जारी करने से पहले याचिकाकर्ता की वास्तविक पदस्थापना और पद की स्थिति पर उचित विचार नहीं किया गया।

तबादला आदेश रद्द, नए आदेश का रास्ता खुला

हाई कोर्ट ने 6 अगस्त को जारी तबादला आदेश को दूज बाई कंवर की सीमा तक निरस्त कर दिया। हालांकि, कोर्ट ने विभाग के लिए नया आदेश जारी करने का रास्ता खुला रखा है।विभाग वास्तविक रिक्त पद, सेवा नियमों और कर्मचारी की सही पदस्थापना को ध्यान में रखते हुए नया तबादला आदेश जारी कर सकता है।यह मामला केवल एक कर्मचारी के तबादले तक सीमित नहीं है। इससे सरकारी विभागों में रिकॉर्ड सत्यापन, पद की सही जानकारी और रिक्त पदों की जांच के बाद ही प्रशासनिक आदेश जारी करने की आवश्यकता भी सामने आती है।

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