इंदौर : सीहोर पुलिस ने कथित साइबर ठगी से जुड़े एक नेटवर्क का पता लगाते हुए इंदौर से पांच लोगों को गिरफ्तार किया है। पुलिस के मुताबिक, आरोपियों पर धोखाधड़ी से हासिल रकम को क्रिप्टोकरेंसी USDT में बदलने और आगे ट्रांसफर करने में भूमिका निभाने का आरोप है। जांच के दौरान एक चीनी नागरिक से जुड़े कथित नेटवर्क का भी उल्लेख सामने आया है। हालांकि, उसकी वास्तविक भूमिका और गिरफ्तार आरोपियों से उसके संबंधों की पुष्टि के लिए जांच जारी है।मामला सीहोर निवासी कंचन तोमर की शिकायत के बाद सामने आया। वह एक वेबसाइट के लिए घर से काम करती थीं। शिकायत के आधार पर पुलिस ने भारतीय न्याय संहिता की धारा 318(4) के तहत मामला दर्ज कर डिजिटल लेन-देन की जांच शुरू की।

नेशनल साइबरक्राइम पोर्टल से मिली जांच को दिशा

पुलिस ने शिकायत से जुड़ी जानकारी नेशनल साइबरक्राइम रिपोर्टिंग पोर्टल के माध्यम से खंगालनी शुरू की। तकनीकी जांच के दौरान बैंक खाते, एटीएम निकासी और संदिग्ध लेन-देन से जुड़े कई तथ्य सामने आए।पुलिस के अनुसार, शिकायतकर्ता के खाते से कथित तौर पर 9 और 10 अप्रैल को एटीएम के जरिए रकम निकाली गई थी। इसके बाद जांच टीम ने बैंकिंग रिकॉर्ड और तकनीकी जानकारी को आपस में जोड़कर उन लोगों तक पहुंचने का प्रयास किया, जिनके जरिए रकम आगे भेजी गई थी।इसी डिजिटल ट्रेल का पीछा करते हुए जांच इंदौर तक पहुंची।

इंदौर से पांच आरोपी गिरफ्तार

तकनीकी साक्ष्यों के आधार पर पुलिस ने इंदौर में कार्रवाई करते हुए पांच संदिग्धों को गिरफ्तार किया। पुलिस का आरोप है कि इन लोगों की भूमिका साइबर धोखाधड़ी से प्राप्त रकम को USDT में बदलने से जुड़ी हो सकती है।अब जांच का फोकस इस बात पर है कि आरोपियों को रकम कहां से मिलती थी, उसे किस माध्यम से USDT में बदला जाता था और डिजिटल करेंसी के जरिए आगे किन लोगों या खातों तक पहुंचाया जाता था।पुलिस यह भी पता लगाने में जुटी है कि गिरफ्तार आरोपी सीधे साइबर ठगी में शामिल थे या उनका इस्तेमाल केवल ठगी की रकम को आगे पहुंचाने के लिए किया जा रहा था।

चीनी नागरिक से जुड़े कथित नेटवर्क की भी पड़ताल

जांच के दौरान एक चीनी नागरिक से जुड़े कथित नेटवर्क का भी उल्लेख सामने आया है। फिलहाल पुलिस इस व्यक्ति की भूमिका, गिरफ्तार आरोपियों से उसके संपर्क और पूरे नेटवर्क में उसकी संभावित भागीदारी की जांच कर रही है।साइबर अपराध में रकम को कई बैंक खातों, एटीएम, डिजिटल माध्यमों और क्रिप्टोकरेंसी के जरिए अलग-अलग जगहों पर भेजे जाने से उसकी वास्तविक दिशा का पता लगाना चुनौतीपूर्ण हो जाता है। ऐसे में पुलिस बैंकिंग और डिजिटल रिकॉर्ड को जोड़कर रकम के स्रोत से लेकर अंतिम लाभार्थी तक पहुंचने का प्रयास कर रही है।

USDT ट्रांजेक्शन पर पुलिस की नजर

पुलिस के मुताबिक, गिरफ्तार आरोपियों पर कथित तौर पर ठगी की रकम को USDT में बदलने का आरोप है। USDT एक स्टेबलकॉइन है, जिसकी कीमत अमेरिकी डॉलर से जुड़ी रहती है और जिसका इस्तेमाल डिजिटल परिसंपत्ति के रूप में लेन-देन तथा ट्रांसफर में किया जाता है।जांच एजेंसियां यह पता लगाने में जुटी हैं कि रकम को USDT में बदलने के बाद किन डिजिटल वॉलेट या खातों में भेजा गया। इस कड़ी से कथित नेटवर्क में शामिल अन्य लोगों तक पहुंचने में मदद मिल सकती है।

शिकायतकर्ता के खाते तक पहुंच कैसे बनी, इसकी भी जांच

पुलिस कंचन तोमर के बैंक खाते से जुड़ी गतिविधियों की भी विस्तृत जांच कर रही है। मुख्य सवाल यह है कि खाते से रकम किस प्रक्रिया के जरिए निकली और आरोपियों तक बैंकिंग या अन्य डिजिटल जानकारी कैसे पहुंची।जांच टीम बैंक रिकॉर्ड के साथ मोबाइल नंबर, डिजिटल उपकरण, एटीएम गतिविधियों और क्रिप्टोकरेंसी ट्रांजेक्शन जैसी जानकारियों को भी आपस में जोड़ रही है।

पांच गिरफ्तारियों के बाद भी जांच जारी

पांच लोगों की गिरफ्तारी के बावजूद पुलिस के लिए मामला अभी पूरी तरह सुलझा नहीं है। जांच एजेंसियां नेटवर्क से जुड़े अन्य संदिग्धों की तलाश कर रही हैं। साथ ही यह पता लगाने की कोशिश की जा रही है कि कथित ठगी की रकम का पूरा प्रवाह किस तरह संचालित हुआ और उसका अंतिम गंतव्य क्या था।फिलहाल पुलिस गिरफ्तार आरोपियों से पूछताछ कर रही है। चीनी नागरिक से जुड़े कथित संपर्क, बैंक खातों से हुई निकासी और USDT में हुए संभावित रूपांतरण की कड़ियां स्पष्ट होने के बाद ही पूरे नेटवर्क की वास्तविक तस्वीर सामने आने की उम्मीद है।

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