
नई दिल्ली। जंतर-मंतर पर हुए प्रदर्शन के दौरान छात्र के गंभीर रूप से घायल होने के मामले ने एक बार फिर सियासी तूल पकड़ लिया है। दिल्ली यूनिवर्सिटी के छात्र साहिल लोचब को कथित तौर पर पैलेट गन के छर्रे लगने के बाद आंख समेत शरीर के कई हिस्सों में गंभीर चोट आई थी। घटना के करीब एक महीने बाद राहुल गांधी छात्र के समर्थन में आगे आए और FIR दर्ज कराने की मांग को लेकर संसद मार्ग थाने के बाहर धरने पर बैठ गए। करीब 5 घंटे तक चले धरने के बाद दिल्ली पुलिस ने अज्ञात के खिलाफ FIR दर्ज कर ली।
कौन हैं साहिल लोचब?
साहिल लोचब दिल्ली यूनिवर्सिटी के छात्र हैं और मूल रूप से हरियाणा के रहने वाले हैं। फिलहाल वह अपने परिवार के साथ दिल्ली के नजफगढ़ इलाके में रहते हैं। साहिल एक साधारण किसान परिवार से आते हैं और उनके पिता ड्राइवर का काम करते हैं। वह तीन भाई-बहनों में सबसे बड़े बताए गए हैं।
20 जुलाई के प्रदर्शन में हुए थे गंभीर रूप से घायल
जानकारी के अनुसार, साहिल 20 जुलाई 2026 को जंतर-मंतर पर नीट में कथित धांधली के खिलाफ आयोजित प्रदर्शन में शामिल हुए थे। आरोप है कि प्रदर्शन के दौरान पुलिस कार्रवाई में पैलेट गन का इस्तेमाल किया गया, जिससे साहिल गंभीर रूप से घायल हो गए।बताया गया कि उनके चेहरे, गर्दन, छाती और आंखों में 200 से अधिक छर्रे लगे। मेडिकल रिपोर्ट के अनुसार, उनकी दाईं आंख को सबसे ज्यादा नुकसान पहुंचा। कथित तौर पर तीन छर्रे कॉर्निया को चीरते हुए आंख के अंदर तक पहुंच गए, जिससे उनकी आंख की रोशनी को गंभीर क्षति हुई।
एक महीने तक न्याय की मांग, फिर राहुल गांधी पहुंचे थाने
घटना के बाद साहिल और उनका परिवार कार्रवाई की मांग कर रहा था। एक महीने बाद शुक्रवार को राहुल गांधी ने साहिल से मुलाकात की और उनके साथ संसद मार्ग थाना पहुंचे। उन्होंने FIR दर्ज किए जाने की मांग की और साफ कहा कि शिकायत दर्ज होने तक वह वहां से नहीं हटेंगे।राहुल गांधी करीब 5 घंटे तक धरने पर बैठे रहे। इसके बाद दिल्ली पुलिस ने मामले में अज्ञात के खिलाफ FIR दर्ज की और इसकी प्रति राहुल गांधी को सौंप दी।
अब जांच में सामने आएगा पैलेट गन चलाने का सच
FIR दर्ज होने के बाद अब जांच का मुख्य केंद्र यह होगा कि प्रदर्शन के दौरान पैलेट गन किसने और किन परिस्थितियों में चलाई। पुलिस जांच, घटनास्थल के वीडियो, प्रत्यक्षदर्शियों के बयान और अन्य साक्ष्यों के आधार पर आगे की कार्रवाई तय की जाएगी। इस मामले ने प्रदर्शन के दौरान पुलिस कार्रवाई और छात्र सुरक्षा को लेकर गंभीर सवाल खड़े कर दिए हैं।



















