
मध्य प्रदेश : किसी आपात स्थिति में पुलिस सहायता कितनी जल्दी मौके पर पहुंचती है, अब इस पर लगातार नजर रखी जाएगी। डायल-112 की फर्स्ट रिस्पॉन्स व्हीकल यानी एफआरवी के घटनास्थल तक पहुंचने के समय की जिलावार निगरानी शुरू कर दी गई है। पुलिस रेडियो मुख्यालय अब रोजाना यह देख रहा है कि किस जिले में पुलिस की प्रतिक्रिया सबसे तेज रही और कहां पहुंचने में ज्यादा समय लगा।
इस व्यवस्था का मकसद केवल आंकड़े जुटाना नहीं, बल्कि देरी के वास्तविक कारणों को पहचानकर रिस्पॉन्स सिस्टम को बेहतर बनाना है। जिन एफआरवी का रिस्पॉन्स टाइम लगातार ज्यादा पाया जाएगा, उनके स्टाफ से देरी की वजह पूछी जाएगी। यदि जांच में लगातार लापरवाही सामने आती है, तो संबंधित टीम के खिलाफ कार्रवाई भी की जा सकती है।
एक-एक मिनट कम करने की तैयारी
पुलिस रेडियो मुख्यालय अब प्रदेश के औसत रिस्पॉन्स टाइम को चरणबद्ध तरीके से कम करने की दिशा में काम कर रहा है। फिलहाल करीब 15 मिनट के औसत को पहले 13 मिनट और फिर 10 मिनट तक लाने का लक्ष्य रखा गया है।
इस लक्ष्य को हासिल करने के लिए केवल एफआरवी स्टाफ की निगरानी पर निर्भर नहीं रहा जाएगा। पुलिस को किन तकनीकी अड़चनों का सामना करना पड़ रहा है और घटनास्थल तक पहुंचने में कौन सी व्यावहारिक परेशानियां सामने आती हैं, इसकी भी समीक्षा की जा रही है।
जिलों के प्रदर्शन पर रहेगी सीधी नजर
रिस्पॉन्स टाइम में सुधार के लिए जिलों के एसपी के साथ समन्वय की जिम्मेदारी एसएसपी रेडियो समीर सौरभ ने संभाली है। जिलावार आंकड़ों की समीक्षा के जरिए उन क्षेत्रों की पहचान की जाएगी, जहां पुलिस सहायता पहुंचने में अपेक्षाकृत अधिक समय लग रहा है।
इससे यह पता लगाने में मदद मिलेगी कि समस्या वाहन की उपलब्धता से जुड़ी है, तकनीकी व्यवस्था से, रास्ते की स्थिति से या फिर किसी अन्य स्तर पर देरी हो रही है।
सिर्फ रिकॉर्ड नहीं, कार्रवाई का भी सिस्टम
नई निगरानी व्यवस्था में सबसे महत्वपूर्ण पहलू यह है कि ज्यादा रिस्पॉन्स टाइम को केवल आंकड़े के रूप में दर्ज करके छोड़ने की तैयारी नहीं है। लगातार देरी करने वाली एफआरवी टीमों से जवाब मांगा जाएगा और कारणों की समीक्षा होगी।
अगर किसी टीम की ओर से बार-बार लापरवाही सामने आती है, तो कार्रवाई की जा सकती है। इससे पुलिसकर्मियों पर तेजी से प्रतिक्रिया देने का दबाव बढ़ेगा और आम लोगों को आपात स्थिति में मदद मिलने का समय कम करने की कोशिश होगी।
आखिरकार लक्ष्य यही है कि डायल-112 की मदद मांगने के बाद लोगों को पुलिस के पहुंचने के लिए कम से कम इंतजार करना पड़े और प्रदेश का औसत रिस्पॉन्स टाइम 10 मिनट के आसपास लाया जा सके।




















