वंदे मातरम विवाद पर देशभर में सियासी घमासान, छत्तीसगढ़ में भी भाजपा का विरोध प्रदर्शन तेज

नई दिल्ली/रायपुर/अंबिकापुर/बलरामपुर। स्वतंत्रता दिवस के अवसर पर नई दिल्ली स्थित कांग्रेस मुख्यालय में आयोजित समारोह के दौरान राष्ट्रीय गीत वंदे मातरम के गायन को लेकर शुरू हुआ विवाद अब राष्ट्रीय राजनीति का बड़ा मुद्दा बन गया है। भारतीय जनता पार्टी ने कांग्रेस नेतृत्व पर राष्ट्रीय गीत के अपमान का आरोप लगाया है, जबकि कांग्रेस ने इन आरोपों को पूरी तरह खारिज करते हुए भाजपा पर राजनीतिक लाभ लेने के लिए विवाद खड़ा करने का आरोप लगाया है। इस मुद्दे को लेकर देशभर में भाजपा कार्यकर्ताओं द्वारा विरोध प्रदर्शन किए जा रहे हैं। छत्तीसगढ़ में भी भाजपा और भारतीय जनता युवा मोर्चा के कार्यकर्ता सड़कों पर उतरकर कांग्रेस के खिलाफ प्रदर्शन कर रहे हैं।

आखिर क्या है पूरा विवाद?

15 अगस्त को कांग्रेस मुख्यालय में स्वतंत्रता दिवस समारोह आयोजित किया गया था। कार्यक्रम के दौरान वंदे मातरम का गायन हो रहा था। इसी बीच का एक वीडियो सोशल मीडिया पर वायरल हुआ, जिसमें कांग्रेस संसदीय दल की अध्यक्ष सोनिया गांधी और कांग्रेस अध्यक्ष मल्लिकार्जुन खड़गे के बीच बातचीत होती दिखाई देती है। भाजपा नेताओं ने आरोप लगाया कि सोनिया गांधी ने गीत को रोकने का संकेत दिया और कांग्रेस नेतृत्व ने राष्ट्रीय गीत के प्रति सम्मान नहीं दिखाया।

हालांकि कांग्रेस ने इस आरोप को सिरे से नकारते हुए कहा कि वीडियो को भ्रामक तरीके से प्रस्तुत किया जा रहा है। पार्टी का कहना है कि वंदे मातरम का पूरा गायन हुआ था तथा सोनिया गांधी केवल मल्लिकार्जुन खड़गे के बैठने की व्यवस्था को लेकर संकेत कर रही थीं। कांग्रेस नेताओं के अनुसार भाजपा जानबूझकर इस विषय को राजनीतिक रंग देने का प्रयास कर रही है।

अमित शाह ने मांगा जवाब,भाजपा नेताओं ने की माफी की मांग

केंद्रीय गृह मंत्री अमित शाह ने इस मामले पर कांग्रेस पर तीखा हमला बोलते हुए कहा कि वंदे मातरम करोड़ों भारतीयों की आस्था, राष्ट्रभक्ति और स्वतंत्रता संग्राम की विरासत का प्रतीक है। उन्होंने कहा कि स्वतंत्रता दिवस जैसे राष्ट्रीय पर्व पर राष्ट्रीय गीत के प्रति कथित असम्मान बेहद दुर्भाग्यपूर्ण है और कांग्रेस को देश की जनता के सामने अपना पक्ष स्पष्ट करना चाहिए।

भाजपा के राष्ट्रीय प्रवक्ताओं और वरिष्ठ नेताओं ने कांग्रेस नेतृत्व से सार्वजनिक माफी मांगने की मांग उठाई है। भाजपा नेताओं का कहना है कि वंदे मातरम केवल एक गीत नहीं बल्कि भारत की राष्ट्रीय चेतना और स्वतंत्रता संग्राम का प्रेरणास्रोत है। पार्टी नेताओं ने आरोप लगाया कि कांग्रेस नेतृत्व की मानसिकता राष्ट्रीय प्रतीकों के प्रति सम्मानजनक नहीं रही है।

भाजपा सांसद मनोज तिवारी, राष्ट्रीय प्रवक्ता सुधांशु त्रिवेदी सहित कई नेताओं ने कांग्रेस की आलोचना करते हुए इसे देशवासियों की भावनाओं को आहत करने वाला कृत्य बताया है। वहीं पश्चिम बंगाल विधानसभा में नेता प्रतिपक्ष सुवेंदु अधिकारी ने भी कांग्रेस नेतृत्व पर निशाना साधते हुए माफी की मांग की है।

कांग्रेस ने आरोपों को बताया राजनीतिक प्रोपेगेंडा

कांग्रेस महासचिव जयराम रमेश ने भाजपा के आरोपों को निराधार बताते हुए कहा कि कार्यक्रम में वंदे मातरम का पूर्ण गायन हुआ था और किसी ने उसे रोकने का प्रयास नहीं किया। उन्होंने कहा कि भाजपा वास्तविक मुद्दों से ध्यान हटाने के लिए इस प्रकार के विवाद खड़े कर रही है।कांग्रेस नेताओं का कहना है कि वीडियो का एक छोटा हिस्सा वायरल कर गलत संदेश देने की कोशिश की जा रही है, जबकि पूरे कार्यक्रम का वीडियो देखने पर स्थिति स्पष्ट हो जाती है।

छत्तीसगढ़ में भी बढ़ी राजनीतिक सरगर्मी

राष्ट्रीय स्तर पर शुरू हुआ यह विवाद अब छत्तीसगढ़ की राजनीति में भी पहुंच गया है। भाजपा और भाजयुमो के कार्यकर्ताओं ने रायपुर, दुर्ग, बिलासपुर, अंबिकापुर, बलरामपुर सहित कई जिलों में विरोध प्रदर्शन शुरू कर दिए हैं। सरगुजा जिले में भी विरोध देखने को मिल वहां और बलरामपुर जिले में भारतीय जनता युवा मोर्चा द्वारा दुर्गा मंदिर प्रांगण से अटल चौक तक मशाल रैली निकाली गई। रैली में बड़ी संख्या में युवा मोर्चा के पदाधिकारी और कार्यकर्ता शामिल हुए। इस दौरान कांग्रेस के खिलाफ नारेबाजी की गई तथा राष्ट्रीय गीत वंदे मातरम का सामूहिक गायन कर सम्मान व्यक्त किया गया।

राजनीतिक गलियारों में चर्चा तेज

राजनीतिक जानकारों का मानना है कि आने वाले दिनों में यह मुद्दा और अधिक राजनीतिक रूप ले सकता है। भाजपा इस विषय को राष्ट्र सम्मान और राष्ट्रीय अस्मिता से जोड़कर जनता के बीच ले जा रही है, जबकि कांग्रेस इसे राजनीतिक प्रोपेगेंडा बता रही है। ऐसे में यह विवाद आने वाले समय में राष्ट्रीय राजनीति के प्रमुख मुद्दों में शामिल हो सकता है।

क्या है वंदे मातरम का महत्व?

बंकिमचंद्र चट्टोपाध्याय द्वारा रचित वंदे मातरम भारत के स्वतंत्रता आंदोलन का प्रमुख प्रेरणास्रोत रहा है। संविधान सभा ने 24 जनवरी 1950 को इसे राष्ट्रीय गीत का दर्जा प्रदान किया था। स्वतंत्रता संग्राम के दौरान यह गीत लाखों स्वतंत्रता सेनानियों के लिए प्रेरणा का स्रोत बना और आज भी राष्ट्रभक्ति तथा राष्ट्रीय एकता का प्रतीक माना जाता है।

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